Types of Complaints Before the Banking Ombudsman, Commercial Paper, Rating Expectation

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बैंकिंग लोकपाल के समक्ष शिकायतों के प्रकार (Types of complaints before the Banking Ombudsman)

  • बैंकिंग लोकपाल बैंकिंग सेवाओं में निम्नलिखित कमियों के संबंध में किसी भी शिकायत को प्राप्त कर सकता है और विचार कर सकता है।

  • अदायगी न होना या चेकों, ड्राफ्टों, बिलों आदि की वसूली अथवा भुगतान में असाधारण विलंब।

  • किसी भी प्रयोजन हेतु अदायगी के लिए प्रदत्त कम मूल्य वर्ग के नोटों का बिना किसी पर्याप्त कारण के स्वीकार नहीं किया जाना तथा उनके संबंध में किसी भी तरह का कमीशन वसूल करना।

  • सिक्कों को बिना किसी पर्याप्त कारण के स्वीकार न करना तथा उसके संबंध में कमीशन लेना।

  • आवक परेषणों के भुगतान में विलंब अथवा भुगतान न करना।

  • ड्राफ्ट भुगतान आदेश अथवा बैंकर्स चेक जारी करने में विलंब अथवा जारी न करना।

  • कामकाज के निर्धारत समय का पालन न किया जाना।

  • गारंटी या साखपत्र संबंधी प्रतिबध्दताओं को सकारने में असफल रहना।

  • बैंक अथवा उसके सीधे बिक्री एजेंटो दव्ारा लिखित रूप में वचन दी गई बैंकिंग सुविधाएँ (ऋणो और अग्रिमों के अतिरिक्त) प्रदान करने में विलंब अथवा उपलब्ध न कराना।

  • बैंक दव्ारा सुनिश्चित बचत, चालू या अन्य खाते में जमाराशियों पर लागू ब्याज दर के संबंध में रिज़र्व बैंक के निर्देश यदि कोई हों, का पालन न करना, जमाराशियों का भुगतान न करना, पार्टियों के खातों में आय जमा न करना, विलंब करना।

  • निर्यातकों के लिए निर्यात प्राप्तियाँ मिलने, निर्यात बिलों पर कार्रवाई, बिलों की वसूली आदि में विलंब बशर्तें के ऐसी शिकायतें बैंक के भारत में परिचालन से संबंधित हों।

  • इंकार करने के लिए किसी वैध कारण के बिना जमा खाता खोलने हेतु इंकार।

  • ग्राहक को पर्याप्त पूर्व सूचना दिए बिना प्रभार लगाना।

  • एटीएम/डेबिट कार्ड परिचालन या क्रेडिट कार्ड परिचालन पर रिज़र्व बैंक के अनुदेशों का बैंक अथवा उनके अनुषंगियों दव्ारा अनुपालन न होना।

  • पेंशन संवितरण में विलंब अथवा संवितरण न करना (कुछ हद तक इस शिकायत हेतु संबंधित बैंक दव्ारा की गई कार्रवाई के लिए बैंक को उत्तरदायी ठहरा सकते हैं लेकिन उनके कर्मचारियों के मामले में नहीं)

  • रिज़र्व बैंक/सरकार दव्ारा की गई अपेक्षा के अनुसार करों के प्रति भुगतान स्वीकार करने में विलंब अथवा इंकार करना।

  • सरकारी प्रतिभूतियाँ जारी करने से इंकार अथवा विलंब, या सेवा प्रदान करने में असमर्थता अथवा सेवा प्रदान करने या शोधन में विलंब।

  • बिना पर्याप्त सूचना अथवा बिना पर्याप्त कारण के जमा लेखों को जबरन बंद करना।

  • लेखे बंद करने से इंकार या बंद करने में विलंब।

  • बैंक दव्ारा अपनाई गई बेहतर व्यवहार संहिता का अनुपालन न करना।

  • बैंकिंग अथवा अन्य सेवाओं के संबंध में रिज़र्व बैंक दव्ारा जारी निदेशों के उल्लघंन से संबंधित अन्य कोई मामला।

क्या बैंकिंग लोकपाल अनिवासी भारतीयों की शिकायतों पर विचार कर सकता है?

हाँ, बैंकिंग लोकपाल भारत में अपना खाता रखनेवाले अनिवासी भारतीयों से विदेश से उनके विप्रेषणों, जमाराशियों और बैंक-संबंधी अन्य मामलों के संबंध में प्राप्त शिकायतों पर विचार कर सकता है।

बैंकिंग लोकपाल को आवेदन करना

  • वह बैंकिंग लोकपाल के समक्ष तभी शिकायत दर्ज करा सकता है यदि संबंधित बैंक दव्ारा उसका अभ्यावेदन प्राप्त करने के बाद बैंक से उसे एक महीने के भीतर जवाब नहीं प्राप्त हुआ है या बैंक ने शिकायत खारिज कर दी हो या बैंक दव्ारा दिये गए जवाब से शिकायतकर्ता संतुष्ट नहीं है।

  • बैंकिंग लोकपाल के समक्ष शिकायत दर्ज कराने हेतु शिकायतकर्ता के लिए यह आवश्यक है कि पहले वह शिकायत में नामित बैंक को एक लिखित अभ्यावेदन प्रस्तुत करते हुए सीधे बैंक से एक संतोषप्रद समाधान प्राप्त करने का प्रयास करे तथापि कार्रवाई आरंभ किए जाने के कारणों के बाद एक वर्ष की अवधि के भीतर शिकायत दर्ज की जाए।

  • उसी विषय वस्तु पर शिकायत नहीं की जा सकती जिसका निपटान किन्हीं पूर्ववर्ती कार्यवाहियों में बैंकिंग लोकपाल के कार्यालय दव्ारा किया गया हो।

  • शिकायतकर्ता दव्ारा किसी अधिनिर्णय की अस्वीकृति विधि के अनुसार उसे उपलब्ध अन्य उपाय और/अथवा समाधानों को प्रभावित नहीं करती है।

  • बैंक के पास यह विकल्प है कि वह इस योजना के अंतर्गत अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष कोई अपील दर्ज करे।

  • अधिनिर्णय के विरुद्ध अपीलीय प्राधिकारी भारतीय रिज़र्व बैंक में उप गवर्नर हैं।

  • इस अधिनिर्णय से पीड़ित दोनों पक्ष इस अधिनिर्णय की प्राप्ति की तारीख से तीस दिनों के भीतर अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष इस अधिनिर्णय के विरुद्ध अपील कर सकते है अपीलीय अधिकारी यदि वह इस बात से संतुष्ट है कि समय के भीतर अपील हेतु आवेदन करने के लिए आवेदनकर्ता के पास पर्याप्त कारण है तो वह तीस दिनों तक की एक और अवधि की अनुमति दे सकता है।

इस योजना के संबंध में रिज़र्व बैंक की क्या भूमिका है।

भारतीय रिज़र्व बैंक दव्ारा बैंकिंग लोकपाल योजना का गठन बैंकों के ग्राहकों को एक शीघ्र शिकायत निवारण व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए किया गया है यह बैंकिंग सेवाओं से संबंधित शिकायतों तथा इस योजना में यथा निर्दिष्ट अन्य मामलों के समाधान हेतु एक सांस्थिक और विधिक ढाँचा उपलब्ध कराता है यह योजना भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम की, 1949 धारा 35 क के अनुसार रिज़र्व बैंक दव्ारा जारी निदेशक के माध्यम से लागू की गई है रिज़र्व बैंक अपने सेवारत वरिष्ठ अधिकारियों को भी बैंकिंग लोकपाल के रूप में नियुक्त करेगा और बेहतर प्रभाव के लिए इसे पूर्ण रूप से निधि भी प्रदान करेगा।

बैंकिंग लोकपाल योजना कब लागू की गई।

बैंकिंग लोकपाल योजना पहली बार वर्ष 1995में लागू की गई और इसे वर्ष 2002 में संशोधित किया गया।

वाणिज्यिक पत्र (commercial paper)

वाणिज्यिक पत्र एक गैर जमानती मुद्रा बाजार लिखत है जिसे वचन-पत्र के रूप में जारी किया जाता है। निजी तौर पर जारी की जाने वाली लिखत के रूप में वाणिज्यिक पत्र भारत में 1990 में प्रारंभ किया गया ताकि उच्च दर्जे के कार्पोरेट उधारकर्ता अपने अल्पावधि उधारों के स्त्रोतों का विविधिकरण कर सकें और निवेशकों को एक अतिरिक्त लिखत मुहैया कराया जा सके। बाद में प्राथमिक व्यापारियों अनुषंगी व्यापारियों और अखिल भारतीय वित्तीय संस्थाओं को भी वाणिज्यिक पत्र जारी करने की अनुमति प्रदान की गई ताकि वे अपने परिचालनों के लिये अपनी अल्पावधि निधि करने की अनुमति प्रदान की गई ताकि वे अपने परिचालनों के लिये अपनी अल्पावधि निधि आवश्यकताओं को पूरा कर सकें।

वाणिज्यिक पत्र के पात्र जारीकर्ता

  • कंपनियाँ, प्राथमिक व्यापारी और अखिल भारतीय वित्तीय संस्थाएँं, जिन्हें भारतीय रिज़र्व बैंक दव्ारा निर्धारित समग्र सीमा के तहत अल्पावधि संसाधन जुटाने की अनुमति प्रदान की गई है: वाणिज्यिक पत्र जारी करने के लिये पात्र हैं।

  • एक कंपनी वाणिज्यिक पत्र जारी करने के लिये पात्र है बशर्ते कि (क) लेखापरीक्षित अद्यतन तुलन पत्र के अनुसार कंपनी की वास्तविक स्वाधिकृत निधि चार करोड़ रुपये से कम नहीं होनी चाहिये (ख) कंपनी को बैंक/बैंकों या अखिल भारतीय वित्तीय संस्था/संस्थाओं दव्ारा कार्यशील पूंजी मंजूर की गयी हो और (ग) कंपनी के उधार संबधी खाते को वित्त प्रदान करने वाले बैंक/बैंको/संस्था/संस्थाओं दव्ारा मानक आस्ति के रूप में वर्गीकृत किया गया हो।

रेटिंग अपेक्षा (Rating expectation)

सभी पात्र प्रतिभागी वाणिज्यिक पत्र जारी करने के लिये क्रेडिट रेटिंग इन्फार्मेशन सर्विस़े ऑफ इंडिया लि. (क्रिसिल) या इन्वेस्टमेंट इन्फार्मेशन और क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ऑफ इंडिया लि. (आईसीआरए) या क्रेडिट एनालेसिस एंड रिसर्च लि. (केअर) या एफआईटीसीएच रेटिंग्स इंडिया प्रा. लि. या इस प्रयोजन के लिये समय-समय पर भारतीय रिज़र्व बैंक दव्ारा निर्धारित किसी अन्य रेटिंग एजेंसी से क्रेडिट रेटिंग प्राप्त करेें। न्यूनतम क्रेडिट रेटिंग क्रिसिल की पी-2 या इसी के समतुल्य किसी अन्य एजेंसी की होनी चाहिये। वाणिज्यिक पत्र जारी करने के समय जारीकर्ता यह सुनिश्चित करेगा कि इस प्रकार प्राप्त की गई रेटिंग वर्तमान समय की है और इसकी समीक्षा लंबित नहीं है।

परिपक्वता

वाणिज्यिक पत्र निर्गम की तारीख से न्यूनतम 7 दिन और अधिकतम 1 वर्ष तक की परिपक्वता अवधि के लिये जारी किये जा सकते हैं। वाणिज्यिक पत्र की परिपक्वता की तारीख जारीकर्ता की क्रेडिट रेटिंग की वैधता की तारीख से अधिक नहीं होनी चाहिये।

मूल्यवर्ग

वाणिज्यिक पत्र 5 लाख रु. के मूल्यवर्ग या उसके गुणजों में जारी किये जा सकते हैं। किसी एक निवेशक दव्ारा निवेशित राशि (अंकित मूल्य) 5 लाख रुपये से कम नहीं होनी चाहिये।

वाणिज्यिक पत्र जारी करने की सीमा और राशि

  • वाणिज्यिक पत्र ’स्टैंड अलोन’ उत्पाद के रूप में जारी किया जा सकता है। किसी जारीकर्ता दव्ारा जारी किये गये वाणिज्यिक पत्रों की समग्र राशि इसके निदेशक मंडल दव्ारा अनुमोदित सीमा या विनिर्दिष्ट रेटिंग के लिये क्रेडिट रेटिंग एजेंसी दव्ारा दर्शायी गयी मात्रा जो भी कम हो, के भीतर होनी चाहिये। तथापि, बैंक और वित्तीय संस्थाओं को वाणिज्यिक पत्रों सहित वित्तपोषण करने वाली कंपनियों के संसाधन ढांचे को ध्यान में रखते हुए कार्यशील पूंजी सीमाओं को निर्धारित करने के लिये लचीलापन उपलब्ध रहेगा।

  • वित्तीय संस्थाएंँ जारी करने की तारीख से 1 वर्ष से अधिक एवं 3 वर्ष से कम अवधि के लिए जमा प्रमाणपत्र जारी कर सकता हैं।

  • जारी किए जाने वाले प्रस्तावित वाणिज्यि पत्र की कुल राशि जारीकर्ता दव्ारा अभिदान के लिए इश्यू खोलने की तारीख से दो सप्ताह के भीतर जुटाई जानी चाहिये। वाणिज्यिक पत्र एक दिन या विभिन्न तारीखों को टुकड़ों में जारी किये जा सकते हैं बशर्तें कि विभिन्न तारीखों को जारी किये जाने की स्थिति में प्रत्येक वाणिज्यिक पत्र की परिपक्वता की तारीख समान होगी।

जारीकर्ता और भुगतानकर्ता एजेंट (आइपीए)

वाणिज्यिक पत्र जारी करने के लिये केवल अनुसूचित बैंक ही आइपीए के रूप में कार्य कर सकता है।

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