सागर पत्तन (Sea fall) Part 1 for NTA (UGC)-NET

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  • केन्द्र सरकार ने हाल ही में सागर पत्तन के निर्माण हेतु 515 करोड़ रुपये के अनुदान को मंजूरी दी है।

  • यह पश्चिम बंगाल के सागर दव्ीप समूह में 12,000 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित गहरा समुद्री पत्तन है।

  • कोलकाता और हल्दिया बंदरगाह, हुगली नदी के उथले जल के कारण बड़े जहाजों को नहीं संभाल सकते। अत:, पश्चिम बंगाल में एक वैकल्पिक पत्तन की आवश्यकता है।

भारत का पहला तटीय आर्थिक गलियारा

इस तटीय आर्थिक गलियारे के बारे में

  • भारत ने तमिलनाडु में तूतीकोरिन से पश्चिम बंगाल तक अपने पहले पूर्वी तट आर्थिक गलियारा के निर्माण की योजना तैयार कर ली है।

  • हाल ही में, इस परियोजना के एक भाग के रूप में, एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने विशाखापट्टनम और चेन्नई के बीच औद्योगिक गलियारे (विशाखापट्टनम चेन्नई इंडस्ट्रियल (औद्योगिक) कॉरिडोर (कारिडोर): वीसीआईसी) के निर्माण के लिए 631 मिलियन (दस लाख) डॉलर (मुद्रा) के ऋण की मंजूरी प्रदान की है।

  • इस निधि की मदद से 2,500 किलोमीटर वाले ईसीईसी के 800 किलोमीटर के प्रथम खंड को विकसित करने में सहायता मिलेगी। शेष 215 मिलियन डॉलर का वित्तपोषण आंध्र प्रदेश सरकार दव्ारा किया जाएगा।

  • इसके पीछे निहित विचार में न सिर्फ नए बंदरगाहों का निर्माण करना या पुराने का उन्नयन करना शामिल है, अपितु इसके दव्ारा पूरे औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को नई ऊँचाई प्रदान करना है, जिसमें अनेक पत्तन सम्मिलित होंगे।

  • एडीबी की इस ऋण की सहायता से सरकार को एक कुशल कार्यबल और अनुकूल व्यापार नीतियों का निर्माण करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही अत्याधुनिक तकनीक वाले औद्योगिक क्लस्टरों (समूहों), सड़क, कुशल परिवहन, विश्वसनीय जल और विद्युत आपूर्ति आदि की सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

तटीय आर्थिक क्षेत्र

  • कंपनी (संघ) की तटीय अवस्थिति कंपनियों को विश्व के बाजारों में अपने व्यवसायों के निर्बाध संचालन हेतु एक अनुकूल स्थिति उपलब्ध कराती है। चीन ने अपने यहां इस अवसर का सफलतापूर्वक दोहन किया है।

  • इसी कारण से नीति आयोग ने यह सुझाव प्रस्तुत किया है कि भारत को भी तटीय आर्थिक क्षेत्रों के निर्माण पर काम करना चाहिए। उल्लेखनीय है कि सागरमाला पहल के आलोक में यह (CEZs) और महत्वपूर्ण हो गया है।

मेरीटाइम (समुद्री) क्लस्टर (समूह) और सीईजेड

  • जहाजरानी मंत्रालय के सागरमाला कार्यक्रम के तहत तैयार की गई एक ड्राफ्ट (प्रारूप) रिपोर्ट (विवरण) के अनुसार, भारतीय समुद्र तट के साथ अवस्थित मेरीटाइम क्लस्टर्स वस्तुत: आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण केन्द्र बिन्दुओं में से एक होंगे।

  • तटीय आर्थिक क्लस्टरों के पत्तन आधारित औद्योगिक विकास पर एक रिपोर्ट में, अंतर्निहित संभावना वाले क्षेत्रों के रूप में तमिलनाडु और गुजरात में दो प्रमुख मेरीटाइम क्लस्टरों की पहचान की गयी है।

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