मॉरिशस के साथ दोहरे कराधान से बचाव समझौते में संशोधन (Modifications From Mauritius With Double Taxation – Economy)

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मॉरिशस के साथ 30 साल पूराने दोहरे कराधान से बचाव समझौते में संशोधन के प्रोटोकॉल (मसविदा बनाना) पर हाल ही में हस्ताक्षर किए गए हैं।

दोहरे कराधान से बचाव समझौता क्या है?

• कर दो प्रकार के होते हें-स्रोत आधारित और निवासी आधारित।

• ज्यादातर पश्चिमी देश निवासी आधारित कराधान पर भरोसा करते हैं (क्योंकि उनकी वैश्विक आय अधिक है), जबकि भारत जैसे विकासशील देश निवेश के अवसरों के कारण स्रोत आधारित कराधान के पक्ष में हैं।

• जब स्रोत देश और निवासी देश कराधान के अपने अधिकारों का प्रयोग एक साथ करते हैं, तो दोहरे कराधान की समस्या पैदा होती है; इससे बचने के लिए ही यह समझौता किया जाता है।

स्शााेंधन की जरूरत क्यों थी?

• 1983 की संधि के अनुसार, केवल मॉरिशस के ही पूंजीगत लाभ पर कराधान की अनुमति थी। लेकिन मॉरीशस ने इसे लागू नहीं किया। इसलिए कंपनियाँ (संघ) पूरी तरह से कर मुक्त हो गयीं।

• इस वजह से कर बचाने के लिए मॉरीशस से बड़े पैमाने पर विदेशी प्रत्यक्ष निवेश की आमद हुई (भारत में कुल विदेशी प्रत्यक्ष निवेश का 34 प्रतिशत)

संशोधन की मुख्य विशेषताएं

• भारत अब मॉरीशस में स्थित कंपनी पर भी पूंजीगत लाभ पर कर लगा सकता है।

• 2019 तक दो वर्ष की संक्रमणकालीन अवधि के लिए कर की सीमा भारतीय दरों की 50 प्रतिशत रहेगी- यह लाभ एक कंपनी को तभी मिलेगा अगर वह मुख्य उद्देश्य और वैध व्यापार की जरूरी आवश्यकता पूरी करे। यदि मॉरीशस में परिचालित हो रही किसी कंपनी का पिछले 12 महीनों में कुल व्यय 27 लाख रूपये से कम होगा तो उसे दिखावटी कंपनी माना जाएगा।

• यह सिंगापुर संधि के लिए भी लागू होगा।

लाभ

• यह धन के राउंड (चरण) ट्रिपिंग (तेज़ चलनेवाला) के लिए संधि के दुरुप्रयोग को रोकने में मदद करेगा, निवेश को व्यवस्थित करेगा, दोहरे गौर कराधान को रोकेगा और कर अनिश्चितता कम करेगा।

• कर चोरी के लिए मॉरीशस में दिखावटी कंपनी बनाने के लिए कोई प्रोत्साहन नहीं मिलेगा।

• यह आधार के कमजोर होने एवं मुनाफे का हस्तांतरण (बीईपीएस) से निपटने के लिए ओईसीडी और जी-20 देशा निर्देशों के अनुरूप भारत दव्ारा अनुपालन सुनिश्चित करेगा।

• समान बर्ताव का प्रावधान लंबे समय में अधिक विदेशी निवेश को आकर्षित करेगा।

समस्याएँ

• विदेशी प्रत्यक्ष निवेश में गिरावट आएगी: मॉरीशस और सिंगापुर से भारत में 50 प्रतिशत विदेशी निवेश आता है।

• साइप्रस और नीदरलैंड जैसी अन्य जगहों के माध्यम से पैसा भारत में भेजा जा सकता है।

• पी-नोट्‌स की तरह ऋण और शेयर साधनों में निवेश के अपारदर्शी तरीकों की उपस्थिति।

• बीईपीएस का अर्थ वे कर योजना रणनीतियां हैं जो कर नियमों में कमियों को भुना कर, लाभ को कम आर्थिक गतिविधि वाले देश में ले जाते हैं, जिससे उन्हें बहुत कम कॉर्पोरेट (संयुक्त संस्था) टैक्स (कर) देना होता है।

• बीईपीएस का विकासशील देशों के लिए प्रमुख महत्व है, क्योंकि वे कॉर्पोरेट आय कर पर अधिक निर्भर हैं।

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