सुगम्य भारत अभियान (Accessible India Campaign –Social Issues)

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• अंतर्राष्ट्रीय नि:शक्त-जन दिवस (3 दिसम्बर) पर भारत सरकार ने सुगम्य भारत अभियान की शुरुआत की। यह नि:शक्तजनों की सभी सुविधाओं तक पहुँच सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर प्रारंभ एक फ्लैगशिप अभियान है।

• यह अभियान सार्वभौमिक सुगमता की प्राप्ति के लिए, तीन अलग-अलग मापदंडों को लक्षित करता है। ये तीन मापदंड निम्नलिखित हैं-

§ परिवेश का निर्माण

§ परिवहन परिवेश तंत्र तथा सूचना

§ संचार परिवेश तंत्र/अवसंरचना का निर्माण करना।

• अंतर्राष्ट्रीय नि:शक्तजन दिवस 2015 का विषय था ’इन्क्लूजन मैटर्स : एक्सेस एंड एम्पावरमेंट फॉर पीपल ऑफ आल एबिलिटीज’

कार्यक्रम के लक्ष्य तथा उद्देश्य

• इस अभियान का लक्ष्य परिवहन, सरकारी भवनों, पर्यटक स्थलों, विमानपत्तनों, रेलवे स्टेशनों तथा इंटरनेट तकनीकी को नि:शक्त जनों के लिये सुगम बनाना है।

• इस अभियान के तहत निश्चित समय सीमा के भीतर महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किये गए हैं। इसमें विभिन्न हितधारकों को लक्ष्य प्रति प्रतिबद्ध बनाने का प्रयास किया जाएगा तथा अभियान के बारे में जागरुकता फेलाने के लिए सामाजिक जनसंचार माध्यमों तथा सूचना तकनीकी का प्रयोग किया जाएगा।

• राष्ट्रीय राजधानी तथा सभी राज्य की राजधानियों के सभी सरकारी भवनों के कम से कम 50 प्रतिशत भाग को नि:शक्त जनों के लिए जुलाई 2018 तक पूरी तरह सुगम्य बनाया जाएगा।

• देश के सभी अंतर्राष्ट्रीय हवाइअड्‌डों तथा ए1, ए और बी श्रेणी के सभी रेलवे स्टेशनों को जुलाई 2016 तक नि:शक्त जनों के लिए पूरी तरह सुगम्य बना दिया जाएगा।

• मार्च 2018 तक देश में सरकारी क्षेत्र के सार्वजनिक परिवहन वाहनों के कम से कम 10 प्रतिशत भाग को नि:शक्त जनों के लिए सुगम्य बना दिया जाएगा।

• यह भी सुनिश्चित किया गया कि मार्च 2018 तक केंद्रीय सरकार तथा राज्य सरकारों दव्ारा जारी सभी दस्तावेजों के कम से कम 50 प्रतिशत को नि:शक्त जनों के लिए सुगमता मानकों से युक्त कर दिया जाएगा।

राष्ट्रीय कानून तथा अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय (कर्न्वेशन)

• भारत नि:शक्तजनों के अधिकारों पर, संयुक्त राष्ट्र अभिसमय का हस्ताक्षरकर्ता देश है।

• नि:शक्जन (समान अवसर, अधिकारों का संरक्षण तथा संपूर्ण सहभागिता) अधिनियम 1995 के अनुसार राज्य निम्नलिखित सुविधाओं को उपलब्ध कराएगा।

• सार्वजनिक भवनों में रैम्प (चढ़ने-उतरने के लिए सीढ़ियों के स्थान पर ढाल का प्रयोग करना)

• पहियायुक्त कुर्सी के प्रयोगकर्ताओं के लिए शौचालयों का प्रबंध।

लिफ्ट या एलीवेटर्स में ब्रेल प्रतीक-चिह्न तथा ध्वनि संकेत।

• अस्तपतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्दों तथा अन्य पुनर्वास केन्द्रों में रैम्प।

सरकारी पहल तथा कुछ प्रस्तावित उपाय

• सरकार संपूर्ण देश में सुगम्य पुलिस स्टेशन, सुगम्य अस्पताल तथा सुगम्य पर्यटन क्षेत्रों को निर्माण करेगी।

• टेलीविजन कार्यक्रमों की सुगम्यता को बढ़ाने के लिए उनमें अनुशीर्षक, लिखे हुए को बोलने में बदलना तथा श्रव्य विवरण जैसी विशेषताओ को सम्मिलित करना हैं।

• अगम्य क्षेत्रों तक पहुँच सुनिश्चित करने हेतु क्राउड (भीड़ में आना) सोर्सिंग प्लेटफॉर्म (उद्गम स्थान) निर्मित करने के लिए मोबाइल एवं वेब एप्लीकेशन (आवेदन पत्र) का निर्माण किया जाएगा।

• एक ’सुगम्यता सूचकांक’ निर्माण की प्रक्रिया में है। इसके दव्ारा नि:शक्तजनों के लिए किसी प्रणाली की उपयुक्ता को मापा जाएगा।

• नि:शक्तजनों के लिये प्रयुक्त ’विकलांग’ शब्द के स्थान ’दिव्यांग’ शब्द का प्रयोग प्रस्तावित है।

• मूक और बधिर व्यक्तियों के लिए अलग-अलग संस्थान तथा नयी ब्रेल भाषा का निर्माण।

• सरकार ने 1700 करोड़ रुपयें की लागत से नि:शक्तजनों के लिए एक विशेष विश्वविद्यालय स्थापित करने का निर्णय किया हैं।

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