राष्ट्रवाद का उदय (Rise of Nationalism) for NTSE Part 5 for NTSE

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प्रमुख विचार-

  • मराठो की ताकत अफगानों ने खतम की और जब सब -दूसरे के खिलाफ लड़ रहे थे, तब अंग्रेज आ पड़े और वे सबको दबा सकने में सफल हो सके। देश पहले से ही मुसलमानों और हिन्दुओं के ही बीच नही वरन जनजातियों और जातियों में विभक्त था। यह समाज ऐसे संतुलन पर आश्रित था जिसका आधार था-सदस्यों का पारस्परिक विकर्षण और वैधानिक पार्थक्य। ऐसा देश और ऐसा समाज तो मानो विजय का पूर्वनिश्चिय भक्ष्य था।

    -कार्ल मार्क्स

  • और बातों के अतिरिक्त, भारतीय आदर्शो पर आधारित और पश्चिम की विचारधारा और संस्कृति के सम्मिश्रण से संभव (उनके दव्ारा शासित या नियंत्रित नहीं) शिक्षा पद्धति और राष्ट्रीय भावना का विकास भारत के लिए आवश्यक है।

    -एनी बेसेंट

  • भारत में अंग्रेजी साम्राज्य तो बन ही जाता परन्तु उसका स्वरूप भिन्न होता तथा उसमें समय भी अधिक लगता।

    -पर्सीवल स्पीयर

  • अंग्रेजी सरकार पूर्वकाल में, कम से कम सैद्धांतिक रूप से, भारतीय एकता तथा प्रजातंत्र की समर्थक थी। वह इस बात पर गर्व करती थी कि उसके शासन से राजनीतिक एकता आई है यद्यपि यह एकता केवल समान दासता की एकता थी।

    -जवाहर लाल नेहरू

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