एनसीईआरटी कक्षा 11मनोविज्ञान अध्याय 1: मनोविज्ञान क्या है यूट्यूब व्याख्यान हैंडआउट्स for NTSE

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एनसीईआरटी कक्षा 11 मनोविज्ञान अध्याय 1: मनोविज्ञान क्या है?

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मनोविज्ञान क्यों?

  • खुद को जानना

  • दूसरों को जानना

  • लोग क्यों सपने देखते हैं ये जानना|

  • क्यों लोग वेश भूसा में व्यवहार करते है|

प्रमुख HPS अहलूवालिया, पाकिस्तान के साथ युद्ध में पीड़ित चोट की वजह से कमर के निचे के भाग में लकवा हो गया था, जो माउन्ट एवरेस्ट पर चढ़ गए थे| – उनको एवरेस्ट चढ़ने के लिए किस चीजने प्रेरित किया ? यह मनोविज्ञानको सम्बोधित करता है|

स्पष्ट अनुशासन

  • लगातार विकसित होता है|

  • घटना की सीमा को एक परिभाषा से पकड़ा नहीं जा सकता है|

  • सायको (आत्मा) + लोगोस (अध्ययन) – आत्मा या मन का अध्ययन

  • अब यह मानव अनुभव का अध्ययन है या व्यक्तिगत, डायाडिक (दो व्यक्ति) और संगठनात्मक व्यवहार – जैविक और सामाजिक आधार पर भी हो सकता है|

मनोविज्ञान को औपचारिक रूप से एक विज्ञान के रूप में परिभाषित किया जाता है जो अध्ययन करता है

  • मानसिक प्रक्रियायें (चेतना या जागरूकता),

  • अनुभव(व्यक्तिपरक – जाग्रत – सकारात्मक या नकारात्मक) – योगी मध्यस्थता या एक नशे की लत

  • व्यवहार – गतिविधियों के प्रति अनुक्रिया या प्रतिक्रिया - प्रत्यक्ष (बाहरी) या गुप्त (आंतरिक), सरल या जटिल – एक बाघ को देखकर भागने का फैसला करना – उत्तेजना और प्रतिक्रिया (S-R)

दिमाग विरुद्ध मन

  • मस्तिष्क की गतिविधियां मस्तिष्क की कल्पना द्वारा देखी जाती हैं|

  • मस्तिष्क के विपरीत, दिमाग में भौतिक संरचना नहीं है या कोई स्थान नहीं है। मन हमारी बातचीत और अनुभवों के रूप में उभरता और विकसित होता है|

  • हम क्या पढ़ते हैं? यह याद रखना, सीखना, जानना, समझना, महसूस करना है|

  • हम विषय को वैज्ञानिक और वस्तुनिष्ठ बनाने की कोशिश करते हैं – आत्म-प्रतिबिंब और आत्म-ज्ञान

  • 1879 में विल्हेम वुन्ट द्वारा लीपजिग में पहली प्रयोगशाला स्थापित की गई |(सचेत अनुभव) – आत्मनिरीक्षण और संरचनावादियों

  • FMRI और EEG वास्तविक समय में दिमागमें होने वाली प्रक्रियाओं का अध्ययन करना संभव बनाता है|

  • मानव कंप्यूटर पर परस्पर क्रिया और कृत्रिम बुद्धि के लिए मनोविज्ञान की आवश्यकता है|

  • दो धाराएं

  • शारीरिक और जैविक विज्ञान में विधि का उपयोग

  • सामाजिक और सांस्कृतिक विज्ञान की विधि का उपयोग

  • कारण और परिणाम का संबंध जानें ताकि व्यवहारिक घटनाओं की भविष्यवाणी की जा सके|

क़ुदरती विज्ञान के रूप में मनोविज्ञान

  • विचार की परिभाषा पर आम सहमति उसकी मात्रा |

  • मनोविज्ञान डेसकार्टेस से प्रभावित था| और बाद में भौतिकी जिस विकास से बढ़ी है जिसे निगनात्मक मॉडल कहा जाता है – यदि आपके पास घटना को समझाने के सिद्धांत हैं तो वैज्ञानिक प्रगति हो सकती है|

  • सिद्धांत – कुछ जटिल घटनाओं के बारे में बयानों का समूह प्रस्तावों की सहायता से समझाया जा सकता है जो पारस्परिक संबंध हैं|

  • सिद्धांत के आधार पर – एक घटना के लिए सही समाधान की पेशकश करने के लिए परिकल्पना प्रस्तावित या जांच की जाती है| – यह हक़ीक़त के आधार पर परखा और साबित किया जाता है|

  • सिद्धांत संशोधित किया जाता है यदि एकत्रित माहिती परिकल्पना से अलग होती है|

  • जैविक विज्ञान में विकासवादी दृष्टिकोण भी मुख्य होता है|

सामाजिक विज्ञान के रूप में मनोविज्ञान

  • यह अपने समाज में मनुष्यों के व्यवहार का अध्ययन करता है - सांस्कृतिक संदर्भ - उनके व्यवहार में भिन्नताएं हैं और अनुभव जो ज्ञात मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों का उपयोग करके भविष्यवाणी करने में मुश्किल होती है|

  • संकट के मामले में लोग अनौपचारिक बन जाते हैं और लूटपाट में शामिल हो जाते हैं|

  • स्पेरी और पेनरोज़ – एक विषय के रूप में मनोविज्ञान को सम्मान दिया|

  • दिमाग के बिना मन अस्तित्व में नहीं हो सकता है, लेकिन मन का एक अलग अस्तित्व है|

  • वह व्यक्ति जिसने दुर्घटना में अपने हाथ खो दिए हो – काल्पनिक हाथ होते है (हलन चलन महेसुस करता है– कॉफी के कप तक पहुंचने की कोशिश करता है)

  • भावात्मक तंत्रिका विज्ञान में हाल के अध्ययनों ने स्पष्ट रूप से दिखाया है कि मन और व्यवहार के बीच एक संबंध होता है। यह निश्चित मानसिक दर्शन तकनीकोका उपयोग करना और स्पष्ट भावनाओंको महेसुस करना बयान करता है।

  • सायकोन्यूरोमयुनोलोजी: दिमागकी प्रति रक्षाको मजबूत करने महत्वका योगदान देता है।

  • आपका दोस्त दूर है – प्रतिक्रियाओं – जो नजरोसे दूर होता है वो दिमागसे भी दूर होता है या दिलमे होने वाली दूरिको बढ़ता है|

  • विज्ञान के रूप में मनोविज्ञान व्यवहार के नमूने की तलाश करता है जिसे अनुमान किया जा सकता है और व्यवहार के बाद उसे समझाया नहीं जा सकता है|

  • द्वैक – एक समस्या देने पर बहुत जल्दी छोड़ने वाले बच्चों पर काम किया – समझाया कि असफलता इसलिए थी क्योंकि उन्होंने कड़ी मेहनत नहीं की थी (इसीलिए नहीं क्योंकि समस्याएं मुश्किल थीं) – प्रशिक्षण के बाद - जो हमेशा सफल रहे थे क्योंकि उन्हें आसान समस्याएं दी गई थीं, जब उन्हें सफलता और असफलता दोनों का अनुभव था, तो उन्हें असफलता का सामना करना पड़ा और उन्हें प्रयासों की कमी में असफलता को विशेषता देने के लिए सिखाया गया।

मनोविज्ञान का क्रम-विकास

Image of the evolution of psychology

Image of the Evolution of Psychology

Image of the evolution of psychology

आत्मनिरीक्षण – वह प्रक्रिया जिसमें व्यक्ति खुद्को या विषय को विस्तार से अपने अनुभवों का वर्णन करते हैं – कम वैज्ञानिक और बाहरी समीक्षों द्वारा साबित नहीं किया जा सकता है| (विल्हेम वुन्ट)

कार्यानुरूप (विलियम जेम्स) – कैम्ब्रिज, मैसाचुसेट्स में मनोवैज्ञानिक प्रयोगशाला की स्थापना की| – दिमाग की रचना पर ध्यान केंद्रित नहीं करते हैं, लेकिन दिमाग क्या करता है और व्यवहार कैसे कार्य करता है – चेतना का स्वरूप मानसिक प्रक्रियाओंकी चल रही धारा जैसा है।

जॉन डूई – अपने पर्यावरण को अनुकूलित करके प्रभावी ढंग से काम करना चाहते है|

संरचनावाद – 20-वीं सदी – जर्मनी में गेस्टाल्ट मनोविज्ञान – अवधारणात्मक अनुभवों पर केंद्रित है - हमारे अवधारणात्मक अनुभव धारणाके घटकों के योगसे कई अधिक है । – फिल्म में तेजी से चलती तसवीरोका क्रम होता है|– अनुभव समग्र है|

व्यवहारवाद – लगभग 1910 – जॉन वॉटसन – दिमाग और चेतना के विचारों को अस्वीकार कर दिया – ध्यान देने योग्य और निरीक्षण करने योग्य पर ध्यान केंद्रित किया– उत्तेजना के जवाब का अध्ययन जिसे निष्पक्ष रूप से मापा जा सकता है|

बाद में स्किनर द्वारा प्रयुक्त किया गया|

मनोविश्लेषण – फ्रोइड – मानव व्यवहार अजाग्रुत इच्छाओ और संघर्षोंकी गतिशील अभिव्यक्ति है। - मनूष्य अपनी इच्छाओंकी तलाशमे आनंदकी संतुष्टि के लिए अजाग्रुत इच्छासे प्रेरित होता है|

मानववादी दृष्टिकोण – रोजर्स और मस्लोव द्वारा मानव प्रकृति का सकारात्मक दृष्टिकोण – मानव की स्वतंत्र इच्छा और प्राकृतिक क्षमता विकसित करने और मानव क्षमता को प्रकट करने का प्रयास कर रहा है|

संज्ञानात्मक दृष्टिकोण – इस बात पर ध्यान केंद्रित करें कि हम दुनिया को कैसे जानते हैं – सोचना, समझना, याद रखना, समस्या हल करना – मनुष्यका दिमाग कमयुटर की तरह सूचनाओं पर प्रक्रिया करता है जैसे - प्राप्त करना, प्रक्रिया, बदलना, संग्रह करना और जानकारी प्राप्त करना है|

रचनावाद – मनुष्य भौतिक और सामाजिक दुनिया में अपनी खोज के माध्यम से सक्रिय रूप से अपने दिमाग का निर्माण कर रहे हैं – पीएगेट और वयगोत्स्की – मनूष्यका मन सामाजिक और सांस्कृतिक प्रक्रिया के माध्यम से विकसित होता है|

पीएगेट – बच्चे सक्रिय रूप से अपना मन बनाते हैं|

वयगोत्स्की – दिमाग सांस्कृतिक निर्माणके कारन बच्चे और वयस्कों के बिच जुडी हुई बातचीत है।

भारत में विकास

  • मानव जागरूकता पर विचार, खुद, मन-शरीर संबंध, और विभिन्न प्रकार के मानसिक कार्यों जैसे अनुभूति, धारणा, भ्रम, ध्यान और तर्क|

  • 1915- कलकत्ता विश्वविद्यालय में तत्वज्ञान विभाग शुरू हुआ जहां प्रयोगात्मक मनोविज्ञान का पहला पाठ्यक्रम पेश किया गया था और पहली मनोविज्ञान प्रयोगशाला स्थापित की गई थी|

  • 1916 - कलकत्ता विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान विभाग का पहला विभाग शुरू किया और बाद में 1938में मनोविज्ञान प्रयुक्त किया गया|

    • नरेन्द्रनाथ सेनगुप्ता – प्रयोगात्मक परंपराओं में वुण्ट के तहत प्रशिक्षित किया गया|

    • गिरीन्द्र शंकरबोज मनोविश्लेषण में प्रशिक्षित थे – 1922 में भारतीय मनोविश्लेषण संघ की स्थापना की|

    • वे कलकत्ता विभागके बाद मसूरी और पटना आए|

  • UGC में उत्कल यूनिवर्सिटी, भुवनेश्वर और यूनिवर्सिटी ऑफ़ अलाहाबाद ये दो केंद्र मनोविज्ञान द्वारा समर्थित थे|

  • दुर्गानाथ सिन्हा अपनी पुस्तक "साइकोलॉजी इन थर्ड वर्ल्ड कंट्री" : 1986 में प्रकाशित भारतीय अनुभव "चार चरणों में भारत में एक सामाजिक विज्ञान के रूप में आधुनिक मनोविज्ञान के इतिहास का पता लगाता है|

    • 1947 तक - प्रयोगात्मक, मनोविश्लेषण और मनोवैज्ञानिक परीक्षण किया गया|

    • 1960 तक – विभिन्न शाखाओं में विस्तार – भारतीय संदर्भ में पश्चिमी मनोविज्ञान को जोड़ा गया|

    • 1960 के दशक के बाद – समस्या उन्मुख अनुसंधान

    • 1970 के दशक – स्वदेशीकरण का चरण – प्राचीन पाठ और मूर्तियों से आए पश्चिमी तंत्र को अस्वीकार कर दिया|

  • अब भारत में विभिन्न क्षेत्रों में लागू किया गया है|

मनोविज्ञान की शाखाएं

  • संज्ञानात्मक मनोविज्ञान कमाई, संचयन, हेरफेर, और जानकारी के परिवर्तन में शामिल मानसिक प्रक्रियाओं की जांच करता है – निर्णय लेना और समस्या हल करना|

  • जैविक मनोविज्ञान व्यवहार और भौतिक तंत्र के बीच संबंधों पर केंद्रित होता है – नई शाखा तंत्रिका मनोविज्ञान है|

  • विकास मनोविज्ञान शारीरिक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक परिवर्तनों का अध्ययन करता है जो विभिन्न उम्र में होता है और विचार से बुढ़ापे तक, एक जीवन काल की अवस्था- बुद्धि, अनुभूति, भावना, स्वभाव, सदाचार, और सामाजिक संबंध का समावेश करता है|

  • सामाजिक मनोविज्ञानसे पता चलता है कि लोग अपने सामाजिक वातावरण से कैसे प्रभावित होते हैं और कैसे सोचते हैं|

  • विरूद्ध-सांस्कृतिक और सांस्कृतिक मनोविज्ञान व्यवहार, विचार और भावना को समझने में संस्कृति की भूमिका की जांच करता है|

  • पर्यावरणीय मनोविज्ञान मानव व्यवहार पर तापमान, नमी, प्रदूषण, और क़ुदरती मुसीबतो जैसे भौतिक साधनोंकी परस्पर क्रियाका अध्ययन करता है – बेकार निराकरण, जनसंख्या विस्फोट, सामुदायिक संसाधन

  • स्वास्थ्य मनोविज्ञान मनोवैज्ञानिक कारकों की भूमिका पर केंद्रित है (उदाहरण के लिए, तनाव, चिंता) बीमारी का विकास, स्र्कावट और उपचार में उपयोग होता है|

  • नैदानिक और परामर्श मनोविज्ञान विभिन्न प्रकार के मनोवैज्ञानिक विकारों के कारणों, उपचार और रुकावटसे संबंधित है जैसे चिंता, उदासी, खाने विकार और पुराने पदार्थों के दुरुपयोग|

  • उद्योग / संगठनात्मक मनोविज्ञान कार्यस्थल के व्यवहार से संबंधित है – मजदूरों और व्यवस्थापन|

  • शिक्षा संबंधी मनोविज्ञान अध्ययन करता है कि सभी उम्र के लोग कैसे सीखते हैं – विद्यालय में मनोविज्ञान |

  • खेल-कूद मनोविज्ञान अपनी प्रेरणा को बढ़ाकर खेल प्रदर्शन में सुधार के लिए मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों को लागू करता है|

मनोवैज्ञानकि विषय-वस्तु

  • विषय1: अन्य विज्ञान की तरह मनोविज्ञान व्यवहार और मानसिक प्रक्रियाओं के सिद्धांतों को विकसित करने का प्रयास करता है - परिणामको समर्थित आधार सामग्री द्वारा निकाला जाता है प्रयोगात्मक, तुलनात्मक, शारीरिक, विकासात्मक, सामाजिक, और अलग और असामान्य मनोविज्ञान को आम तौर पर "मूल मनोविज्ञान" का प्रतिनिधित्व करने वाले ज्ञानक्षेत्रके रूप में माना जाता है।

  • विषय 2: मानव व्यवहार व्यक्तियों और पर्यावरण के गुणों का एक कार्य है। कर्ट लेविन ने पहले B = f (P, E) का प्रस्ताव दिया - जो बताता है कि व्यवहार एक व्यक्ति और उसके पर्यावरण का परिणाम है। विभेदक मनोविज्ञान, जो व्यक्तिगत मतभेदों पर ध्यान केंद्रित करता है।

  • विषय 3: मानव व्यवहार किसी कारन होता है - सभी मानव व्यवहार को आंतरिक कारणों के संदर्भ में समझाया जा सकता है (जीव के लिए) या बाह्य पर्यावरण में बाह्य स्थान|

  • विषय 4: मानव व्यवहार की समझ सांस्कृतिक रूप से बनाई गई है - द्विपक्षीय दृष्टिकोण जो मानव व्यवहार को समझने में महिला और पुरुष दोनों को जगह देगा|

  • विषय 5: मानव व्यवहार को मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों के उपयोग के माध्यम से नियंत्रित और संशोधित किया जा सकता है – जरूरतमंद लोगों के जीवन में बीच-बचाव बनाए रखना|

मूलभूत वर्सिस प्रयुक्त मनोविज्ञान

  • मूल मनोविज्ञान - नियम और सिद्धांत जो मनोविज्ञान के उपयोग के आधार का निर्माण करते हैं – अनुसंधान उन्मुख

  • प्रयुक्त मनोविज्ञान - विभिन्न संदर्भ जिसमें अनुसंधान से प्राप्त नियम और सिद्धांतों को अर्थपूर्ण रूप से लागू किया जा सकता है – आवेदन उन्मुख

अंतःविषय प्रकृति

  • तत्वज्ञान – मन की प्रकृति और कैसे मनुष्य अपनी प्रेरणा को जानते हैं|

  • औषधि – ICU में मनोवैज्ञानिक परामर्श पोस्ट ऑपरेशन

  • अर्थशास्त्र – आर्थिक व्यवहार, बचत और निर्णय लेना– विकास की भविष्यवाणी (साइमन, स्केलिंग और कहनेमन अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार जीता)

  • राजनीतिविज्ञान – मतदान व्यवहार, स्वरूप

  • समाज-शास्र – अंतर समूह संघर्ष, समाजीकरण

  • कंप्यूटर विज्ञान - संयोजित, क्रमबद्ध और समक्षणिक (समानांतर अध्ययन करना) जानकारी की बनानेका काम

  • कानून और आपराधिकी – दुर्घटना को याद रखना, न्यायपीठ द्वारा निर्णय

  • जन संपर्क – लोगोंके मनोभाव, पत्रकार वर्णन, आम आदमी पर कहानी का असर होना|

  • संगीत और ललित कला – भावनाएं, राग और संगीतीय उपचार

  • वास्तु-कला और डिज़ाइन बनाना – डिजाइन द्वारा मानसिक और भौतिक विस्तार प्रदान करता है|– मानव कार्य करने के लिए ज्ञान के चौराहे|

मनोवैज्ञानिक काम पर

  • नैदानिक मनोवैज्ञानिक – व्यवहारिक समस्याओं के साथ ग्राहक की मदद करना– घर, काम पर चिंता, तनाव

  • परामर्श मनोवैज्ञानिक – प्रेरक और भावनात्मक समस्याओं को झेलना– पुनर्निवेशन, अस्पतालों, स्कूलों

  • सामुदायिक मनोवैज्ञानिक – पुनर्निवेशन

  • स्कूल के मनोवैज्ञानिक – परीक्षण प्रशासक, परिणामों की व्याख्या करना|

  • संगठनात्मक मनोवैज्ञानिक – अधिकारियों और कर्मचारियों का सामना करने वाली समस्याओं से समजोता करना –HRD में विशेषज्ञ

रोजबरोजके जीवनमे आवेदन

  • व्यक्तिगत (बेटी को एक शराबी पिता या समस्या से निपटने वाली मां का सामना करना पड़ रहा है)

  • परिवार (परिवार के सदस्यों के बीच संपर्क और बातचीत की कमी)

  • सामुदायिक व्यवस्था (आतंकवादी समूह या सामाजिक रूप से अलग समुदायों)

  • राष्ट्रीय स्तर (पर्यावरण, सामाजिक न्याय, महिला विकास, अंतर समूह संबंध)

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