जलवायु स्मार्ट (आर्कषक) कृषि (Climate Smart Farming – Environment)

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सुर्ख़ियों में क्यों?

हाल ही में जलवायु स्मार्ट कृषि के लिए ग्लोबल एलायंस (जीएसीएसए) के तीन दिवसीय वार्षिक फोरम (विशेष गठन) का आयोजन खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) दव्ारा रोम में किया गया था।

कृषि क्षेत्र में जलवायु स्मार्टनेंस (आकर्षक बनाना) की आवश्यकता

खाद्य सुरक्षा की बढ़ती चुनौतियां: संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) का अनुमान है कि दुनिया की आबादी को खिलाने के लिए कुल कृषि उत्पादन में 60 प्रतिशत की वृद्धि की आवश्यकता होगी।

कृषि पर जलवायु परिवर्तन के नकरात्मक प्रभाव: जलवायु परिवर्तन पहले से ही वैश्विक और स्थानीय स्तर पर कृषि उत्पादन को नकरात्मक रूप से प्रभावित कर रहा है, विशेष रूप से कम आय वाले देशों में जहाँ अनुकूलन क्षमता कमजोर है। कृषि पर प्रभाव खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण आजीविका तथा व्यापक आधार विकास दोनों में कृषि की निर्णायक भूमिका को चुनौती प्रस्तुत करता हैं।

पर्यावरण पर कृषि का प्रभाव: कृषि क्षेत्र, अगर भूमि उपयोग परिवर्तन से उत्पन्न उत्सर्जन को भी शामिल किया जाता है, यह वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का एक-चौथाई भाग उत्पन्न करता है।

सीएसए के बारे में

• जलवायु स्मार्ट कृषि (सीएसए) खाद्य सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन के आपस में जुड़े चुनौतियों का समाधान करने के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण है। यह मूल रूप से तीन मुख्य उद्देश्यों का लक्ष्य रखता है।

• स्तत रूप से कृषि उत्पादकता में वृद्धि, कृषि आय, खाद्य सुरक्षा और विकास में न्यायसंगत बढ़ोत्तरी में सहायता करने के लिए

• अनुकूल है और कई स्तरों पर जलवायु परिवर्तन के लचीलेपन के निर्माण; तथा

• ग्रीनहाउस (शीशे का मकान जिसमें फल-सब्जी/पौधे उगाए जाते हैं) गैस उत्सर्जन को जहाँ संभव हो कम करना और/या दूर करना।

• यह खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) दव्ारा समर्पित हैं।

सीएसए के तत्व

• सीएसए पद्धतियों का एक सेट नहीं है जो सर्वत्र लागू किया जा सके बल्कि यह एक दृष्टिकोण है जो स्थानीय संदर्भों में सन्नहित अलग-अलग तत्वों को शामिल करता है। यह खेत पर और खेत से परे दोनों कार्यों से संबंधित है तथा प्रौदव्ाेगिकियों, नीतियों, संस्थाओं और निवेश को शामिल करता है।

• सीएसए दृष्टिकोण में चार प्रमुख प्रकार की गतिविधियाँ शामिल हैं:

• खाद्य सुरक्षा के लिए कृषि विकास रणनीति के साक्ष्य आधार और मूल्यांकन उपकरण का विस्तार जिससे के आवश्यक अनुकूलन और संभावित शमन का एकीकरण हो।

• पैमाने पर नीतिगत रूपेरखा निर्धारण और कार्यान्वयन सहयोग के लिए आमसहमति बनाना।

• जलवायु जोखिम और अनुकूलन के लिए संदर्भों-’उपयुक्त कृषि पद्धतियों, प्रौद्योगिकी और प्रणालियों का उपयोग कर किसान प्रबंधन को सक्षम बनाने के लिए राष्ट्रीय और स्थानीय संस्थाओं को मजबूत बनाना।

• कार्यान्वयन के समर्थन के लिए वित्त पोषण के लिए विकल्पों को बढ़ाना, जलवायु और कृषि वित्त को जोड़ना।

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