कारोबार करने में सरलता भारत की स्थिति में सुधार (Ease of Doing Business: Improving the Situation of India-Economy)

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• विश्व बैंक (अधिकोष) की डूइंग (करते हुए) बिजनेस (कारोबार) रिपोर्ट (विवरण) वर्ष 2016 के अनुसार भारत 189 देशों की सूची में 130वें स्थान पर है। पिछले वर्ष की रैंकिंग (अत्यंत कष्टदायी) की तुलना में चार स्थानों का सुधार हुआ है।

• दक्षिण-एशियाई अर्थव्यवस्थाओं में भारत ने सबसे अधिक सुधार दर्ज किया है।

• कारोबार करने में सरलता के मामले में भारत अब भी ब्रिक्स देशों में सबसे निचले पायदान पर है।

• दो सूचकों ‘व्यवसाय का आरंभ’ और ‘विद्युत प्राप्ति’ में सुधार से भारत की रैंक्रिंग में सुधार हुआ है।

• नया व्यवसाय आरंभ करने के लिए लगने वाले दिनों की संख्या इस वर्ष भी 29 दिनों पर बनी रही।

चिंतित करने वाले क्षेत्र

• 10 मापदंडो में से दो मापदंडो अनुबंध लागू करना तथा व्यवसाय समापन में भारत का प्रदर्शन बहुत खराब है।

• पिछले 12 महीनों के दौरान व्यवसाय के लिए ऋण प्राप्ति थोड़ी कठिन हुई है। इसके परिणामस्वरूप रैंकिंग में छह स्थानों की गिरावट हुई है।

• वाणिज्यिक विवादों का समाधान करने के मामले में इस सूची के 189 देशों में से आठ दक्षिण एशियाई देशों में है भारत की तुलना में केवल बांग्लादेश की स्थिति निम्नतर है।

दो अध्यादेेशों को कैबिनेट (मंत्रिमंडल) की स्वीकृति

• कैबिनेट ने वाणिज्यिक विवादों के शीघ्र निपटारे के लिए दो अध्यादेशों को अनुमति प्रदान की है। इसमें देश में कारोबार करने में सरलता की स्थिति में सुधार होगा।

• सरकार ने मध्यस्थता और सुलह अधिनियम में संशोधन करने वाले अध्यादेशों को अनुमति प्रदान कर दी है इस संशोधन दव्ारा सरकार और वाणिज्यिक न्यायालय, वाणिज्यिक संभाग और उच्च न्यायालयों के वाणिज्यिक अपीलीय संभाग विधेयक, वर्ष 2015 को प्रभाव में लाएगी।

• मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम, 1996 में प्रस्तावित संशोधन के तहत, मध्यस्थ पंच को 18 महीने के भीतर मामले का निपटारा करना होगा। हालांकि, 12 महीनें पूरे होने के पश्चात्‌ मध्यस्थता वाले मामले विचारधीन न रहें, इसे सुनिश्चित करने के लिए कुछ प्रतिबंध आरोपित किए जाएंगे।

संविधान के तहत अध्यादेश जारी करने की शक्ति

राष्ट्रपति

• संविधान का अनुच्छेद 123 राष्ट्रपति को अध्यादेश प्रख्यापित कर कानून बनाने की शक्ति बनाने की शक्ति देता है जब संसद के किसी भी सदन का सत्र नहीं चल रहा हो और इसके कारण संसद में कानून बनाना संभव नहीं होता है।

• कार्यपालिका के अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति की निम्नलिखित सीमाएं हैं:

1. विधायी सत्र नहीं हो: राष्ट्रपति केवल एक अध्यादेश प्रख्यापित कर सकते हैं जब संसद दोनों सदनों में से कोई भी सत्र में नहीं है।

2. तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है: राष्ट्रपति अध्यादेश तब तक प्रख्यापित कर सकते हैं जब तक कि वह संतुष्ट हो जाएँ की ‘तत्काल कार्रवाई’ की आवश्यकता है।

3. सत्र के दौरान संसद की मंजूरी: अध्यादेश को संसद सत्र के प्रारंभ होने के छह सप्ताह के भीतर संसद दव्ारा अनुमोदित किया जाना चाहिए। अगर इसे छह सप्ताह के भीतर अनुमोदन नहीं किया जाता है तो यह अध्यादेश समाप्त हो जाएंगे।

राज्यपाल

• किसी राज्य का राज्यपाल अनुच्छेद 213 के तहत अध्यादेश जारी कर सकते हैं, जब राज्य विधान सभा (या दव्सदनीय विधायिकाओं में राज्य में दोनों सदन में कोई भी सदन) सत्र में नहीं है।

• राष्ट्रपति और राज्यपाल की शक्तियां अध्यादेश बनाने के संबंध में मोटे तौर पर एक समान हैं।

• हालांकि, राज्यपाल तीन मामलों में राष्ट्रपति से निर्देश के बिना एक अध्यादेश जारी नहीं किया जा सकता है, जहां समान विधेयक पारित करने के लिए राष्ट्रपति की स्वीकृति आवश्यक है।

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