सीएसआर खर्च को बढ़ावा देने के लिए एफसीआरए में सुधार (Improve NCR to Boost CSR Expenditure-Ecology)

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एफसीआरए में क्या संशोधन हुए हैं?

• नए संशोधन के अंतर्गत विदेशी कंपनियों (सभा) के इंडियन (भारतीय) सब्सिडियरी को भारतीय कंपनियों के रूप में पुन: परिभाषित किया गया है, जो कि संशोधन से पहले एफसीआरए (फॉरेन (विदेशी) कॉन्ट्रिब्यूशन (योगदान) रेगुलेशन (अधिनियम) एक्ट (काम करना) ) के तहत “विदेशी स्रोत” के रूप में मानी जाती थीं।

• इसे पूर्वव्यापी प्रभाव (रेट्रोस्पेटिव इफेक्ट) देते हुए वर्ष 2010 से प्रभावी माना गया है, जब एफसीआरए लागू हुआ था।

• अभी तक 50 प्रतिशत से ज्यादा के विदेशी निवेश वाली किसी भी कंपनी को “विदेशी स्रोत” माना जाता था।

सीएसआर (कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व) के बारे में: वैसे फर्म/कंपनियाँ जिनका नेट वर्थ (शुद्ध) (निवल मूल्य) 500 करोड़ रुपये या 1000 करोड़ रुपए का टर्न ओवर या 5 करोड़ रुपये का निवल लाभ है, उन्हें कानूनन अनिवार्यत: अपने तीन साल के औसत लाभ का न्यूनतम 2 प्रतिशत सामाजिक विकास कार्यो पर खर्च करना होता है।

पृष्ठभूमि

• मौजूदा नियमों के अनुसार, 50 प्रतिशत से अधिक विदेशी हिस्सेदारी वाली कंपनियों के धन को विदेशी स्रोत माना जाता था, और उन्हें केवल उन्हीं संगठनों के साथ भागीदारी की अनुमति थी जो एफसीआरए नियमों के तहत गृह मंत्रालय के साथ पंजीकृत हैं।

• यहां तक कि ऐसी कंपनियों (सभा) दव्ारा संचालित संस्थाओं को भी एफसीआरए नियमों के तहत एक लाइसेंस (आज्ञा) प्राप्त करना होता था।

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