मौद्रिक नीति में नकरात्मक ब्याज दरें (Negative Interest Rates in Monetary Policy – Economy)

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सुर्ख़ियों में क्यों?

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक की हाल ही में आयोजित स्प्रिंग (वसंत) मीटिंग (बैठक) के दौरान मौद्रिक नीति पर अत्यधिक निर्भरता तथा विशेष रूप से नकरात्मक ब्याज दरों की चिंताओं के बारे में आवाज उठाई गयी।

नकरात्मक दरों का क्या उपयोग होता हैं?

• खपत में वृद्धि से आर्थिक विकास को प्रेरित करना।

• स्थायी अपस्फीति के मामलों में मद्रास्फीति में वृद्धि लाना।

• नकारात्मक दरों से मुद्रा का अवमूल्यन होता हैं, जिसमें निर्यात में वृद्धि होती है।

नकरात्मक ब्याज दरों के नकरात्मक प्रभाव

• नकरात्मक ब्याज दर बैंकिंग (महाजन) क्षेत्रक और उसकी लाभप्रदता को प्रत्यक्ष रूप से नुकसान पहुँचा सकती है।

• इससे बेवजह करेंसी वार (मुद्रा युद्ध) और प्रतिस्पर्धी अवमूल्यन को बढ़ावा मिल सकता है।

• इससे तरलता जाल की स्थिति पैदा हो सकती है, जहाँ मौद्रिक नीति वांछित परिणाम नहीं दे पाती हैं।

• दीर्घावधि में, नकरात्मक दर नकदी की जमाखोरी को बढ़ावा दे सकती है और अर्थव्यवस्था में धन के प्रवाह को कम कर सकती है।

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