सड़कों के वित्त-पोषण हेतु नवीन प्रतिमान (New Pattern for Roads Financing – Economy)

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• सरकार ने भारतमाला परियोजना को हरी झंडी दे दी है जिसका उद्देश्य 56,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से सीमावर्ती क्षेत्रों में 5,600 कि. मी. नई सड़कों का विकास करना है।

• साथ ही धार्मिक और पर्यटन केन्द्रों को जोड़ने के लिए और पिछड़े क्षेत्रों में सड़क संपर्क में वृद्धि करने हेतु 44,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 4,700 कि. मी. नई सड़कों के निर्माण की आशा है।

• इसके अतिरिक्त, देश में 676 जिला मुख्यालयों में से 100 जिला मुख्यालयों को जोड़ने के लिए विश्व स्तरीय राजमार्गो का विकास किया जाएगा।

उपरोक्त लक्ष्यों को पूरा करने की दिशा में सरकार की पहल

• स्विस चुनौती प्रणाली (एस. सी. एस) : एस. सी. एस कोर क्षेत्र की परियोजनाओं में निजी क्षेत्र की पहलों को सूचीबद्ध करने के लिए बनायाी गयी बोली लगाने की प्रक्रिया है। इस मानक के अनुसार, निजी निवेशक मौलिक रूप से किसी योजना की अवधारणा की स्वतंत्र रूप से संकल्पना कर सकते है और सरकार से परियोजना के मूल्यांकन हेतु प्रस्ताव कर सकते हैं। अवसरंचना कंपनी (सभा) (उदाहरण के लिए पत्तन का स्वामित्व रखने वाली) पहुँच में सुधार के लिए लास्ट (अंतिम) माइल (आधा कोस) सड़क का विकास करने के लिए उत्सुक हो सकती है।

• एस. सी. एस तीसरे पक्ष को परियोजना के विकास की अत्यधिक वर्धित लागत से बचने के लिए निर्दिष्ट अवधि के दौरा परियोजना के लिए श्रेष्ठतर प्रस्ताव करने (चुनौती देने) की अनुमति देता है। हालांकि, मूल प्रस्तावक को पहले मना करने और तीसरे पक्ष दव्ारा दिए गए किसी श्रेष्ठतर प्रस्ताव का काउंटर (गिननेवाला/विपरीत) -मैच करने का अधिकार दिया गया है। लेकिन, एस. सी. एस. अन्यंत्र बहुत अधिक सफल सिद्ध नहीं हुआ है। इस प्रतिमान के अंतर्गत निजी संस्था के लिए भारी भरकम प्रारंभिक निवेश करना आवश्यक होता है जिसे वह संविदा जीते बिना वापस प्राप्त नहीं कर सकता है।

जोखिम की भरपाई के लिए हाईब्रिड (उच्च नस्ल) एन्युइटी (वार्षिकी) मॉडल (आदर्श) : ऐसा पहली बार होने जा रहा है जब सड़क, परिवहन, तथा राजमार्ग मंत्रालय हाईब्रिड एन्युटी मॉडल के अंतर्गत राजमार्ग परियोजनाओं का आवंटन करेगा। हाल ही में कल्पित इस प्रतिमान के अंतर्गत निजी क्षेत्र दव्ारा किए जाने वाले आवश्यक अग्रिम वित्त-पोषण में कटौती की जाएगी और जोखिम का उच्च अनुपात सरकार को अंतरित किया जाएगा। इसके अंतर्गत सरकार कार्य आरंभ करने के लिए विकासकर्ता को परियोजना लागत का 40 प्रतिशत उपलब्ध कराएगी। शेष निवेश ठेकेदार को करना होगा NHAL (निहाल) चुंगी का संग्रहण कर 15 - 20 वर्षो की अवधि में कुल राशि किश्तों में वापस करेगा।

• निधि जारी करने के लिए विकास नीति: सी. सी. ई. ए. ने भविष्य की परियोजनाओं के लिए संभावित पूंजी के रूप में लॉक्ड (बंद) -इन (भीतर) -इक्विटी (निष्पक्षता) जारी करने हेतु निर्माण के पूरा हो जाने के दो वर्ष बाद राजमार्ग परियोजनाओं से बाहर निकलने के लिए विकासकर्ताओं को अनुमति देते हुए निकास नीति का अनुमोदन किया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब निजी क्षेत्र की रुचि पी. पी. पी. परियोजनाओं में कम हो गई है। अधिकांश परियोजनाएं एक भी बोली आकर्षित करने में नाकाम रही है।

• रुकी हुई परियोजनाओं के लिए एन. एच. ए. आई का ऋण: अतिरिक्त इकविटी की कमी या धनराशि आगे चुकाने में रियायती अक्षमता के कारण ठप पड़ी परियोजनाओं को गति देने के लिए सी. सी. ई. ए. ने जब वापसी की पूर्व निर्धारित दर पर अपने कोष से ऋण देने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को अधिकृत किया है।

• सरकार से सरकार को वित्त-पोषण के मानदंडो को उदार बनाने और अनुमति देने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है।

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