दबावग्रस्त आस्तियों की धारणीय संरचना की योजना (Planning of Sustainable Structures of Stressed Assets)

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लक्ष्य

दबावग्रस्त आस्तियों से निपटने में ऋणदाताओं को अधिक समर्थ बनाने और वास्तविक कठिनाइयों का सामना करने वाली संस्थाओं की वित्तीय संरचना में संशोधन करने के लिए अवसर कराकर वास्तविक आस्तियों को पुन: ट्रैक (पिछे जाने) पर लाना।

समस्या की भयावहता

• बैड लोन्स लगभग 6 लाख करोड़ रुपये के हो चुके हैं, जो बैंको (अधिकोषों) के कुल ऋण का 4.35 प्रतिशत है, अत: बैंकिंग (महाजनी) तंत्र में काफी तनाव है।

• कुल दबावग्रस्त आस्तियों (बैड लोन + मानक पुनर्गठित ऋण) के कुल बैंक ऋण के 15 प्रतिशत होने का अनुमान है।

मुख्य बिंदु

§ परियोजनाओं के नकदी प्रवाह के आधार पर बैंक संघर्ष कर रही कंपनियों के कुल ऋण को धारणीय और अधारणीय में विभाजित कर सकते हैं।

§ अधारणीय ऋण को इक्किटी या परिवर्तनीय में परिवर्तित किया जा सकता है। हालांकि कम से कम 50 प्रतिशत कर्ज मौजूदा ऋण के रूप में इसी अवधि में चुका दिया जाना चाहिए।

§ एक बार अधारणीय ऋण के इक्किटी में बदले जाने के बाद, बैंक यह जिम्मेदारी नए मालिक को बेच सकते हैं जिसके पास एक से अधिक प्रबंधनीय ऋण के साथ व्यापार को चलाने का अवसर होगा।

§ निगरानी समिति नामक एक सलाहकार निकाय का गठन किया जाएगा जो बैंको दव्ारा प्रस्तुत समाधान योजना की समीक्षा करेगी। यह दिशानिर्देशों की तर्कसंगतता और उनके पालन करने की प्रतिबद्धता की जांच करेगी और इस पर अपनी राय देगी।

§ कम से कम 500 करोड़ रुपये की ऋण वाली परियोजनायें और जिनका वाणिज्यिक परिचालन शुरू हो गया है, वे ही इस योजना के तहत पुनर्सरचना की पात्र हैं।

भारतीय रिजर्व बैंक दव्ारा उठाए गए अन्य कदम

§ 5: 25 योजना-यह बैंको को विभिन्न परियोजनाओं में नकदी प्रवाह बनाए रखने के लिए प्रत्येक 5 या 7 वर्षों में पुनर्वित्त के साथ, 20 - 25 वर्षों की लंबी अवधि के ऋण देने की अनुमति देता है।

§ समझौता निपटान योजनाएं।

§ रणनीतिक ऋण पुनर्गठन-उधारदाताओं का समूह किसी बीमारी कंपनी में अपने ऋण के एक हिस्से को इक्किटी में स्थानांतरित कर सकता है, इसके लिए उधारदाताओं के पास कम से कम 51 फीसदी हिस्सेदारी होनी चाहिए।

§ कॉर्पोरेट ऋण पुनर्गठन तंत्र और संयुक्त ऋणदाता फोरम (विशेष गठन) ।

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