भैंस का क्लोन (Buffalo Clone – Science and Technology)

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• भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के अंतर्गत केन्द्रीय भैंस अनुसंधान संस्थान (सीआईआरबी) ने क्लोन कटड़ा बनाया है। इसका नाम ‘हिसार गौरव’ रखा गया है।

• यह क्लोन कटड़ा भारत में पहले बने क्लोन से अलग है, क्योंकि यह उन्नत प्रजाति के नर भैंस के पूंछ के उदर पक्ष की कोशिकाओं से बनाया गया है।

• यह हिस्सा सूर्य के प्रकाश से कम से कम संपर्क में आता है, इसलिए इसमें कम उत्परिवर्तन दर हो सकती है। इस प्रकार यह दाता कोशिकाओं को अलग कर स्वस्थ क्लोन बनाने के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है।

• इस बात पर बल दिया गया है कि उन्नत प्रजाति के नर और मादा भैंस की कायिक कोशिकाओं का प्रयोग की गई क्लोनिंग से देश में उच्च कोटि का भैंस जर्मप्लाज्म बहुगुणित हो सकता है, जिससे इस क्षेत्र में क्रांति लाई जा सकती है।

• इस उपलब्धि को हासिल कर सीआईआरबी दुनिया का तीसरा और भारत का दूसरा क्लोन भैंस का उत्पादन करने वाला संस्थान बन गया है। भारत में सबसे पहले राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान करनाल में एक क्लोन बछड़े का उत्पादन किया गया था।

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