मधुमेह (Diabetes – Social Issues)

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सुर्खियों में क्यों?

इस वर्ष 7 अप्रैल को मनाये गए विश्व स्वास्थ्य दिवस का विषय था- ‘बीट (अंश/कंप्यूटर की सबसे छोटी ईकाई) डायबिटीज’ (मधुमेह)

मधुमेह क्यों?

• डब्लयू एच ओ की विवरण और लांसेट अध्ययन से पता चलता है कि 1980 से 2014 के बीच मधुमेह के मामलों में चार गुना वृद्धि हुई और उनमें से आधे मामले भारत, चीन, ब्राजील, इंडोनेशिया और संयुक्त राज्य अमेरिका में पाए गए हैं।

• भारत में 1980 में 11.9 मिलियन मधुमेह के मामले थे। यह संख्या 2014 में बढ़कर 64.5 मिलियन हो गयी है।

• 2030 तक भारत में विश्व सर्वाधिक मधुमेह रोगी होंगे तथा यह ‘विश्व की मधुमेह राजधानी’ होगा।

पृष्ठभूमि

• ब्लड शुगर (शक्कर की बामारी) के उच्च स्तर के कारण व्यक्ति मधुमेह का शिकार होता है। यह स्थिति इंसूलिन के अपर्याप्त उत्पादन से या मानव शरीर के इंसुलिन के प्रति प्रतिक्रिया नहीं करने या दोनों कारणों से संबंधित हो सकती है। यह एक गैर संचारी रोग है।

• मधुमेह के विभिन्न प्रकार:

• टाइप इंसुलिन का उत्पादन नहीं होना या अत्यल्प होना,

• टाइप शरीर इंसुलिन के प्रति प्रतिरोध प्रदर्शित करता है,

• गर्भावस्था संबंधी: गर्भावस्था के दौरान महिलाओं से संबंधित

• पूर्व-मधुमेह: इसमें ब्लड शुगर टाइप दो जितना उच्च नहीं होता।

कारण: तेजी से बढ़ता शहरीकरण, निष्क्रिय जीवन शैली और अस्वास्थ्यकर आहार। मोटापे की वजह से मधुमेह का जोखिम अत्यधिक बढ़ जाता है।

लक्षण: सामान्य लक्षणों में अधिक पेशाब आना, भूख और प्यास का बढ़ जाना शामिल है।

प्रभाव: यह अंधापन, गुर्दे की विफलता या अंग क्षय, हृदयाघात का खतरा, गर्भावस्था की जटिलताओं में वृद्धि आदि जैसी स्थितियाँ पैदा कर सकता है।

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