भ्रूण का लिंग परीक्षण (Fetal Gender Test – Social Issues)

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सुर्खियों में क्यों?

§ महिला एवं बाल विकास मंत्री ने हाल ही में सुझाव दिया है कि गर्भावस्था के दौरान बच्चे के लिंग परीक्षण को अनिवार्य बनाया जाना चाहिए और बच्चे के लिंग का उसी क्षण से पंजीकरण होना चाहिए। इस तरह से बच्चे के जन्म पर नज़र रखी जा सकेगी।

§ लिंग-निर्धारण के बाद भ्रूण पर नज़र रखना और संस्थागत प्रसव की जुड़वां रणनीति से यह सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी कि कन्या भ्रूण का गर्भपात न किया जाए और जन्म के बाद बच्चे को मारा न जाए।

वर्तमान परिदृश्य

§ वर्तमान में लिंग अनुपात में गिरावट का मुकाबला करने के लिए भारत की रणनीति गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन प्रतिषेध) अधिनियम (पीसीपीएनडीटी एक्ट, कानून) , 1994 पर आधारित है।

§ यह अधिनियम भ्रूण के लिंग का परीक्षण करने के लिए अल्ट्रा (सूक्ष्म) सोनोग्राफी पर प्रतिबंध लगाता है।

§ भारत विश्व के सबसे प्रतिकूल शिशु लिंग अनुपात पाले देशों में से एक है। 2011 की जनगणना में शिशु लिंगानुपात में गिरावट आई है। 2001 में प्रति 1000 लड़कों पर 927 लड़कियां थी जबकि 2011 में यह केवल 919 लड़कियां ही रह गयीं।

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