पी नोट्‌स के प्रकटीकरण और केवाईसी के सख्त नियम (Disclosure of P Notes and Strict Rules of KYC – Economy)

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पृष्ठभूमि

§ काले धन पर विशेष जांच दल (एसआईटी) ने सुझाव दिया है कि सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि पी-नोट का उपयोग काले धन को वैध करने के लिए न हो पाए।

§ इससे पहले, 2007 में अपतटीय/विदेशी व्युत्पन्न लिखत भारतीय बाज़ार में आने वाली कुल विदेशी पूँजी का 55 प्रतिशत थी, लेकिन अब यह सिर्फ 9.3 प्रतिशत रह गयी है।

तथ्य

• नए नियमों के तहत, पी-नोट्‌स के सभी उपयोगकर्ताओं को भारतीय केवाईसी और एंट्री मनी (प्रवोश रुपया) लॉर्न्ड्रिंग नियमों का पालन करना होगा।

• इसके बाद, पी-नोट जारीकर्ता को भारतीय वित्तीय खुफिया इकाई के साथ संदिग्ध लेनदने की रिपोर्ट (विवरण) को साझा करना आवश्यक हो जाएगा।

• अपतटीय/विदेशी व्युत्पन्न लिखत धारकों को माह के दौरान सभी मध्यवर्ती स्थानान्तरण अपतटीय/विदेशी व्युत्पन्न लिखत पर मासिक रिपोर्ट पेश करनी होगी।

• अपतटीय/विदेशी व्युत्पन्न लिखत जारीकर्ता को अर्द्ध वार्षिक पर अपतटीय/विदेशी व्युत्पन्न लिखत की पुष्टि करनी होगी।

अपतटीय/विदेशी व्युत्पन्न लिखत क्या हैं?

• अपतटीय/विदेशी व्युत्पन्न लिखत भारतीय इक्किटी अपतटीय/विदेशी व्युत्पन्न लिखती या इक्किटी अपतटीय/विदेशी व्युत्पन्न लिखती डेरिवेटिव (दूसरे से व्युत्पन्न जैसे शब्द, वस्तु आदि) में निवेश के लिए विदेशी निवेशकों दव्ारा इस्तेमाल किये जाना वाला निवेश मार्ग है।

• ये निवेशक या तो अपनी इच्छा से या नियामक प्रतिबंधों की वजह से सेबी के साथ पंजीकृत नहीं हैं।

• ये निवेशक सेबी के साथ पंजीकृत किसी विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) के पास जाते हैं। ये एफआईआई उन निवेशकों की तरफ से भारतीय बाज़ार में खरीद करते हैं और उन्हें अपतटीय/विदेशी व्युत्पन्न लिखत जारी किया जाता है।

• पी-नोट्‌स अपतटीय/विदेशी व्युत्पन्न लिखत का एक प्रकार है।

भारतीय वित्तीय खुफिया इकाई- इसे केंद्रीय राष्ट्रीय एजेंसी (कार्यस्थान) के रूप में 2004 में भारत सरकार दव्ारा स्थापित किया गया था, यह संदिग्ध वित्तीय लेनदेन से संबंधित जानकारी को प्राप्त करने, प्रोसेसिंग, विश्लेषण और प्रसार के लिए जिम्मेदार है।

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