न्यायिक मानक और जवाबदेही (Judicial Standard and Accountability-Act Arrangement of the Governance)

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सुर्ख़ियों में क्यों?

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट (सर्वोच्च न्यायालय) कॉलेजियम ने मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति करणन की कनकता हाई कोर्ट (उच्च न्यायालय) में स्थानांतरण की सिफारिश की थी। ध्यातव्य है कि अपने स्थानांतरण संबंधी वाद की सुनवाई उन्होंने स्वयं की और सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगा दी।

भारत के संविधान के अनुसार न्यायधीशों को हटाने संबंधी प्रावधान

• अनुच्छे 124 (4) के तहत सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को उनके पद में राष्ट्रपति दव्ारा ‘सिद्ध कदाचार’ या ‘दुर्व्यवहार’ के आधार पर केवल तभी हटाया जा सकता है, जब इस संबंध में संसद के दोनों सदनों दव्ारा विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित किया गया हो।

• संविधान के प्रावधानों के अनुसार यह अनिवार्य है कि दुर्व्यवहार या अक्षमता को एक निष्पक्ष ट्रिब्यूनल (धर्मसभा/न्यायालय) की जांच के आधांर पर ही सिद्ध किया जा सकता है। इस प्रकार के ट्रिब्यूनल (धर्मसभा/न्यायालय) का गठन न्यायाधीश जांच अधिनियम 1968 के प्रावधानों के तहत किया जाना चाहिए।

• इसकी प्रकार अनुच्छेद 217बी में उच्च न्यायालय को हटाने की प्रक्रिया दी गयी है।

• अधिनियम के प्रयोग की अतीत में तीन बार परिस्थितियां उत्पन्न हुई किन्तु आज तक किसी भी न्यायाधीश का अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार हटाया नहीं जा सकता है।

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