विशेषाधिकार प्रस्ताव (Privilege Motion-Act Arrangement of the Governance)

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सुर्ख़ियों में क्यों?

• हाल ही में, लोकसभा में विपक्ष के सदस्यों ने मानव संसाधन विकास मंत्री के विरूद्ध विशेषाधिकार प्रस्ताव लाने का नोटिस (सूचना) दिया।

• इस नोटिस के पीछे तर्क था कि मानव संसाधन विकास मंत्री ने एक बहस में दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय और हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय में सरकारी हस्तक्षेप के मुद्दे पर सदन और राष्ट्र को भ्रमित किया है।

विशेषाधिकार प्रस्ताव

• इसे किसी सदस्य दव्ारा तब लाया जाता है जब उसे प्रतीत होता है कि किसी मंत्री या सदस्य ने किसी मामलें का तथ्य छुपाकार अथवा गलत या विकृत तथ्य देकर सदन या उसके एक या अधिक सदस्यों के विशेषाधिकार का उल्लंघन किया है।

• संसदों के विशेषाधिकारों और उन्मूक्तियों का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति के विरूद्ध किसी भी सांसद दव्ारा विशेषाधिकार प्रस्ताव लाया जा सकता है।

• इसका उद्देश्य संबधित मंत्री या किसी अन्य सदस्य की निंदा करना होता है।

लोक सभा और राज्य सभा-दोनों में से प्रत्येक सदन की उनके अपने सदस्यों से बनी अलग-अलग विशेषाधिकार समितियों हैं।

दोनों सदनों के पीठासीन अधिकारी क्रमश: लोकसभा अध्यक्ष और सभापति विशेषाधिकार नोटिस को अस्वीकार कर सकते हैं, या उन्हें विशेषाधिकार समिति को संदर्भित कर सकते हैं, या निर्णय लेने से पहले सदन की राय ले सकते हैं।

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