मेडिकल शिक्षांं शासन-प्रणाली पर रिपोर्ट (Report on Medical Education Governance – Act Arrangement of the Governance)

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सुख़ियों में क्यों?

हाल ही में संसद की एक स्थायी समिति (पीएससी) ने अपनी रिपोर्ट (विवरण) प्रस्तुत की है। इसमें भारतीय चिकित्सा परिषद् (एमसीआई) की कार्य -प्रणाली में गंभीर अनियमितताओं की ओर ध्यान आकृष्ट किया गया तथा “रूपांतरणीय प्रकृति” के परिर्वतनों की मांग की गयी।

रिपोर्ट में सम्मिलित कुछ महत्वपूर्ण टिप्पणियां

• एमसीआई की संरचना अपारदर्शी है, इसमें विविध पृष्ठभूमि के हितधारक सम्मिलित नहीं है, तथा परिषद् में केवल चिकित्सक हैं।

एमसीआई के दव्ारा अधिदेशित न्यूनतम मानक आवश्यकताएँ वस्तुत: “अव्याहारिक तथा कृत्रिम रूप से कठोर मानक है।” ये मेडिकल कॉलेज (चिकित्सा विज्ञान के अनुसार महाविद्यालय) की स्थापना और उनके विस्तार में अड़चन उत्पन्न करते हैं।

• मेडिकल (चिकित्सा विज्ञान के अनुसार) सीट (पीठिका) पाने के लिए 50 लाख रुपए तक ऊंची कैपिटेशन (प्रतिव्यक्ति कर) फीस (शुल्क) ।

• निरीक्षण की वर्तमान प्रणाली में सकारात्मक फीडबैक (अनुक्रिया) का कोई प्रावधान नहीं है, तथा पूरी प्रक्रिया का दृष्टिकोण सुधारात्मक की बजाय दंडात्मक हैं।

सुधार हेतु सुझाव

• तीन क्षेत्रों में समिति ने एमसीआई में आमूलचूल परिवर्तनों की अनुशंसा की है:

• एमसीआई की एक नियामक निकाय के रूप में स्थापना।

• मेडिकल कॉलेज (चिकित्सा विज्ञान के अनुसार महाविद्यालय) का प्रशासन

• भ्रष्टाचार को समाप्त करना।

शक्ति का पृथकरण: पाठयक्रम विकास, शिक्षक प्रशिक्षण तथा स्नातक और स्नातकोतर शिक्षा के लिए मानक तय करने के लिए वर्तमान एमसीआई को चार स्वतंत्र परिषदों के दव्ारा प्रतिस्थापित करना।

भारतीय चिकित्सा परिषद (एमसीआई)

• एमसीआई भारत में मेडिकल शिक्षा के एक- समान तथा उच्च मानकों की स्थापना के उद्देश्य से निर्मित एक वैधानिक निकाय है।

• मेडिसिन (दवाई) पेशे में उपयुक्त मानदंडो को सुनिश्चित कर, जनता के स्वास्थ्य और उनकी सुरक्षा को बढ़ावा देने तथा उनकी निगरानी के लिए यह भारत में काम करने के लिए चिकित्सकों को पंजीकृत करती है।

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