सूचना का अधिकार कानून के 10 वर्ष (Right to Information Act 10 Years-Act Arrangement of the Governance)

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• सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के कार्यान्वयन के 10 वर्ष पूरे हो गए हैं। इसने विगत 10 वर्षों में सरकारी मशीनरी (यंत्रों) की सोच और कामकाज की शैली को परिवर्तित कर दिया है।

• सूचना आयोग की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार भारत में प्रति वर्ष कम से कम 50 लाख आरटीआई आवेदन दायर किए जाते हैं।

• पिछले दशक के दौरान, भारत की कम से कम 2 प्रतिशत आबादी ने इस कानून का प्रयोग किया था।

सूचना का अधिकार अधिनियम के बारे में

• सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई) “नागरिकों के लिए सूचना के अधिकार की व्यावहारिक व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए” भारत की संसद का एक अधिनियम है और इसने तत्कालीन सूचना की स्वतंत्रता अधिनियम, 2002 का स्थान लिया है।

• अधिनियम के प्रावधानों के तहत, कोई भी नागरिक एक लोक प्राधिकारी से जानकारी का अनुरोध कर सकता है जिसे तेसी से या तीस दिनों के भीतर जवाब देना आवश्यक है।

• अधिनियम के तहत जानकारी के व्यापाक प्रचार-प्रसार और कुछ श्रेणियों के अंतर्गत जानकारी को अग्रसक्रिय रूप से उपलब्ध कराने के लिए प्रत्येक लोक प्राधिकारी को उनके रिकॉर्ड (लेख प्रमाण) को कंप्यूटरीकृत (परिकलक दव्ारा काम करना) करने की आवश्यकता है ताकि नागरिकों को औपचारिक रूप से जानकारी के लिए अनुरोध करने की न्यूनतम आवश्यकता पड़े।

• यह कानून 15 जून, 2005 को संसद दव्ारा पारित किया गया था और 12 अक्टूबर 2005 को पूरी तरह से अस्तित्व में आया था।

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