हरियाणा पंचायती राज (संशोधन) अधिनियम 2015 पर सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय (Supreme Court Verdict on Haryana Panchayati Raj Act 2015 – Act Arrangement of the Governance)

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सुख़ियों में क्यों?

हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने हरियाणा पंचायती राज (संशोधन) अधिनियम, 2015 को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करके, पंचायत चुनावों पर हरियाणा सरकार दव्ारा पारित कानून को वैध ठहराया है।

पंचायत चुनाव पर हरियाणा सरकार का कानून

• अगस्त 2015 में हरियाणा सरकार ने हरियाणा पंचायती राज अधिनियम, 1984 में पांच संशोधनों को मंजूरी दी थी।

• इन संशोधनों में स्थानीय निकाय के निर्वाचनों में चुनाव लड़ने के लिए पात्रता के मानदंडो को निर्धारित किया गया है।

• इसमें न्यूनतम क्षैक्षिक योग्यता, घर पर एक उपयुक्त शौचालय के होने, सहकारी ऋणों का बकायादार न होने, या ग्रामीण घरेलू बिजली कनेक्शनों (संयोजन) पर बकाया राशि न होने तथा किसी गंभीर आपराधिक कृत्य के लिए किसी न्यायालय दव्ारा अभियोग न चलाया गया होना जैसे प्रावधान शामिल किये गए हैं।

• ये सभी मानदंड संविधान में उल्लिखित दिवालियापन और विकृत्तचित्त वाले निर्हरता संबंधी प्रावधानों के अतिरिक्त हैं।

• इस कानून के तहत चुनाव लड़ने हेतु आवश्यक योग्यता के रूप में सामन्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए दसवीं कक्षा और सामन्य वर्ग के महिलाओं के साथ-साथ अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों के लिए आठवीं कक्षा (में उत्तीर्ण होना) निर्धारित किया गया है।

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