महिलाओं की स्थिति में सुधार लाने हेतु पैम राजपूत समिति (Pam Rajput Committee to Improve the Status of Women – Social Issues)

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• महिलाओं की स्थिति का अध्ययन करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति 2013 में गठित की गई थी। इसका उद्देश्य 1989 के बाद से महिलाओं की स्थिति पर एक व्यापक अध्ययन करना और महिलाओं की आर्थिक, कानूनी, राजनीति, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा सामाजिक-सांस्कृतिक आवश्यकताओं के समकालीन मूल्यांकन पर आधारित उचित नीतिगत पहुलओं का विकास करना है। ऐसी प्रथम समिति 42 वर्ष पहले संयुक्त राष्ट्र के अनुरोध पर 1971 में स्थापित की गयी थी।

समिति की सिफारिशें

• उच्च स्तरीय समिति का मानना है कि सशस्त्र बल विशेषाधिकार अधिनियम (एएफएसपीए) निरस्त किया जाए, समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर किया जाये और संसद समेत विधायिक के सभी स्तरों पर महलाओं के लिए न्यूनतम 50 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया जाए।

• महिलाओं के विरुद्ध हिंसा से निपटने के लिए समिति ने अनेक विधायी हस्तक्षेपों की आवश्यकता पर जोर दिया है।

• स्थानीय निकायों, राज्य विधानसभाओं, संसद, मंत्रिमंडल और सरकार के सभी निर्णय-निर्धारक निकायों में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत सीटों के आरक्षण की अनुशंसा करते हुए समिति ने टिप्पणी की कि, “शासन और राजनीतिक भागीदारी में लैंगिक समानता, लैंगिक समता की उपलब्धि के लिए पूर्व अपेक्षित शर्त है।”

• समिति ने बेटों को वरीयता देने के कारण उत्पन्न विषम लिंग अनुपात की समस्या, ″ भारत की लापता लड़कियों ″ , को राष्ट्रीय शर्म ″ की संज्ञा दी। सार्वजनिक जीवन जीने वाले सभी व्यक्तियों के लिए लैंगिक स्कोर (अंक पाना) कार्ड का प्रस्ताव करते हुए, इसने यह भी अनुशंसा की कि सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों (सांसदो, विधायकों तथा पंचायती राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों के सदस्यों) को अपने संबंधित निर्वाचन क्षेत्र में लिंगानुपात के लिए जवाबदेह होना चाहिए। वहीं लिंग अनुपात में प्रगति के लिए पुरस्कार और सम्मान प्राप्त होना चाहिए तथा उपेक्षा, निष्क्रियता और अपराध में भागादारी के लिए उन पर अभियोग चलाया जाना चाहिए।

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