बीटी कपास का विकल्प (Last Option of Cotton – Environment)

Get unlimited access to the best preparation resource for CTET-Hindi/Paper-2 : get questions, notes, tests, video lectures and more- for all subjects of CTET-Hindi/Paper-2.

• केंद्र सरकार बीटी कपास जीन के अनुगामी जीन को विकसित करने के लिए काम कर रही है जिसे परंपरागत किस्मों में एकीकृत किया जा सकता है और किसानों को उपलब्ध कराया जा सके।

• यह वर्तमान की बीटी कपास प्रौद्योगिकी, जिसका स्रोत काफी हद तक विदेशी कंपनी (जनसमूह) माहिको मोनसेंटो बायोटिक इंडिया लिमिटेड (भारत, सीमित) (एमएमबी) है, का एक व्यवहार्य विकल्प होगा।

• यह वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) और जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) के संयुक्त प्रयास से होगा।

वैकल्पिक किस्म विकसित करने की आवश्यकता क्यों?

• विदेशी तकनीक पर निर्भरता से मुक्ति।

• किसानों को वहनीय कीमत पर बीज की उपलब्धता में सुधार।

• बीज कंपनियों और बीज प्रौद्योगिकी कंपनियों (एमएमबी की तरह) के बीच वर्तमान लाइसेंस प्रणाली के तहत, बीज खरीदने की क्षमता और उपलब्धता दृष्टतम नहीं है। सरकार इस रॉयल्टी (राजवंशी) और प्रौद्योगिकी साझा प्रणाली में परिवर्तन करने के लिए प्रस्ताव भी लाई है और बीज की कीमतों को विनियमित भी करना चाहती है। एक स्वदेशी विकल्प इस मुद्दे का सही समाधान हो सकता हैं।

बीटी कपास के बारे में

• बीटी कपास आनुवांशिक रूप से संशोधित कपास की एक किस्म है जो कि मूल कपास कीट पर लक्षित मृदा जीवाणु से लिए गए कीटनाशी जन से युक्त है।

• वर्तमान में यही ऐसी जीएम फसल है जिसे कानूनी तौर पर भारत में अनुमति प्राप्त है। बैंगन और सरसों ऐसी जीएम खाद्य फसलें हैं, जो कि नियामक मंजूरी के उन्नत चरणों में होने के बावजूद जीएम विरोधी कार्यकर्ता समूहों दव्ारा कड़े विरोध के कारण किसानों को उपलब्ध नहीं हैं।

Developed by: