राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (National Consumer Dispute Redressal Commission – Governance and Governance)

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सुर्खियों मेंं क्यों?

• राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने 20 साल पहले रक्त आधान के बार एचआईवी संक्रमित एक मरीज को मुंबई के एक अस्पताल दव्ारा 12,000 रुपये का भुगतान करने के लिए आदेश दिया।

• राष्ट्रीय एड्‌स नियंत्रण संगठन दव्ारा जारी आंकड़ों से पता चलता है कि भारत में पिछले 17 महीने में रक्ताधान के मामलों में कम से कम 2,234 लों एचआईवी से संक्रमित हुए हैं।

एनसीडीआरसी के बारे में

• यह उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत 1988 में स्थापित एक अर्ध न्यायिक आयोग है।

• आयोग की अध्यक्षता भारत के उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश के दव्ारा की जाती है।

• उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 21 के प्रावधानों के अनुसार राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के क्षेत्राधिकार के अंतर्गत:

• एक करोड़ से अधिक मूल्य वाली शिकायतों की सुनवाई की जाएगी।

• राज्य आयोगों या जिला पर विवाद निवारण संस्थाओं के दव्ारा दिए गए निर्णयों के संबंध में इसका अपीलीय तथा पुनरावलोकन क्षेत्राधिकार है।

• अधिनियम की धारा 23 के अनुसार मामले से प्रभावित व्यक्ति एनसीडीआरसी के निर्णय के विरूद्ध, 30 दिनों की अवधि के भीतर भारत के सर्वोच्च न्यायालय में अपील कर सकता है।

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986

• यह एक उदार सामाजिक विधान है जिसके माध्यम से उपभोक्ताओं को अधिकार प्रदान करने तथा उनके अधिकारों को बढ़ावा देने और संरक्षण संबंध प्रावधान किये गए हैं।

• उपभोक्ता जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए इसके अंतर्गत केंद्र सरकार के साथ-साथ प्रत्येक राज्य और जिलों में उपभोक्ता संरक्षण परिषदों की स्थापना को अधिदेशित किया गया है।

• केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण परिषद की अध्यक्षता उपभोक्ता मामलों के विभाग के प्रभारी कैबिनेट (मंत्रिमंडल) मंत्री एवं राज्य स्तर पर उपभोक्ता संरक्षण परिषद् की अध्यक्षता, राज्य सरकारों में उपभोक्ता मामलों के प्रभारी मंत्री, के दव्ारा किये जाने का प्रावधान है।

• अधिनियम के अंतर्गत उपभोक्ता विवादों के तीव्र समाधान हेतु राष्ट्रीय आयोग, राज्य आयोगों तथा जिला फोरम की स्थापना के रूप में एक तीन-स्तरीय संरचना का प्रावधान किया गया है।

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