राज्य सभा दव्ारा ‘धन्यवाद प्रस्ताव’ में संशोधन (Amendment to ‘Thanksgiving’ by Rajya Sabha – Act Arrangement of the Governance)

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सुर्ख़ियो में क्यों?

• दो वर्षो में ऐसा दूसरी बार हुआ है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण के प्रति किए जाने वाले धन्यवाद प्रस्ताव में संशोधन किया गया हो।

• यह संशोधन पंचायती चुनावों में भाग लेने की नागरिकों के अधिकार को सीमित करने संबंधी कानून को राजस्थान तथा हरियाणा सरकारों दव्ारा पारित किए जाने पर केंद्रित था।

• 2015 से पूर्व, केवल तीन ऐसे अवसर आए जब राज्य सभा में राष्ट्रपति के संबोधन में संशोधन किया गया। ये संशोधन इंदिरा गांधी, वी. पी. सिंह तथा अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में एक-एक बार हुए।

इन संशोधनों के महत्व

• राष्ट्रपति के संबोधन पर धन्वाद प्रस्ताव में संशोधन अपनाए जाने का सरकार की विश्वसनीयता के लिए बहुत महत्व है।

• यह सत्ताधारी पक्ष पर उनकी निष्क्रियता, कु-शासन तथा अकुशलताओं के विरूद्ध नैतिक जवाबदेही का प्रवर्तन करता है।

• यह हमारे राष्ट्र की राजनीति में राज्यसभा के महत्व तथा प्रासंगिकता तथा सरकार को जवाबदेह बनाए रखने में उसकी सार्थक भूमिका को रेखांकित करता है।

• यह स्पष्ट रूप से हमारे संसदीय लोकतंत्र की गत्यात्मकता को उजागर करता है जो राजनीतिक दलों के शक्ति संतुलन तथा सदन की संरचना पर निर्भर करती है।

• सरकारी नीतियों, कानूनों तथा विनियमों के विरुद्ध असंतोष प्रकट करता है।

• यह सरकार के ध्यान-केंद्र से बाहर के सामाजिक महत्व के मुद्दों पर प्रकाश डालता है।

धन्यवाद प्रस्ताव

• प्रत्येक आम चुनाव के बाद के प्रथम सत्र के प्रारंभ पर तथा प्रत्येक वित्तीय वर्ष के प्रथम सत्र के दौरान राष्ट्रपति के दव्ारा एक साथ समवेत संसद के दोनों सदनों को संबोधित किया जाता है।

• इस संबोधन में, राष्ट्रपति बीते तथा आने वाले वर्ष में सरकार की नीतियों तथा कार्यक्रमों की संक्षिप्त रूप-रेखा प्रस्तुत करते हैं।

• राष्ट्रपति के जिस संबोधन पर संसद के दोनों सदनों में प्रस्ताव के अंतर्गत चर्चा की जाती है, ‘धन्यवाद प्रस्ताव’ कहलाता हैं।

• चर्चा या बहस के अंत में, इस प्रस्ताव पर मतदान कराया जाता है। निम्न सदन में इस प्रस्ताव को पारित होना अनिवार्य होता है। अन्यथा यह सरकार की विफलता या पराजय मानी जाती है।

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