विशेष परिस्थितियों में प्रायोगिक दवाओं का उपयोग (In Special Circumstances the Use of Experimental Drugs – Science and Technology)

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सुर्ख़ियों में क्यों?

• विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) दव्ारा अगस्त 2014 में की गयी घोषणा के अनुसार असाधारण परिस्थितियों में प्रायोगिक दवाओं (जेम्प और कान्वलेसन्ट (बीमारी से अच्छा हो रहा रोगी) प्लाज्मा थेरेपी (उपचार) का प्रयोग करना अनैतिक नहीं था जैसा की इबोला वायरस के प्रकोप के दौरान पश्चिम अफ्रीका में किया गया।

कान्वलेसन्ट प्लाज्मा तकनीक क्या है और यह कैसे काम करता हैं?

• इस तकनीक का मूल आधार यह है कि रोगाग्रस्त होने के बाद जीवित बचे लोगों से एकत्रित रक्त प्लाज्मा में वह प्रतिरक्षी या एंटीबाडी (रोगों से लड़ने की क्षमता के लिए रक्त में तैयार होने वाला पदार्थ) उपस्थित होगा (वायरस के खिलाफ) जो उस वायरस से लड़ने में सक्षम होगा। यह निष्क्रिय प्रतिरक्षा तकनीक के समान है जो तब उत्पन्न होती है जब किसी व्यक्ति को किसी और का एंटीबॉडी दिया जाता है।

• हालांकि, इसकी क्षमता दिए गए एंटीबॉडी की मात्रा पर निर्भर करती है। एंटीबाॉडी के स्तर पर और उसकी प्रभावशीलता के बीच सीधा संबंध है।

• इस तकनीक का इससे पहले खसरा, गलसुआ, निमोनिया, इन्फ्लूएंजा और डिप्थीरिया के इलाज में सफलतापूर्वक प्रयोग किया जा चुका है।

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