Regional Development and Planning, Tribal Development Program, Hilly Area Development

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Hilly Area Development

HADP 1965-66 में जनजातीय विकास क्षेत्र कार्यक्रम के अंतर्गत संकल्पित किया गया तथा इस कार्यक्रम के अंतर्गत उन विशिष्ट पहाड़ी क्षेत्रों को लिया गया जहां पर ऊँचाई 300-600 मी रहे।

  • पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भंगुर।

  • रोपण कृषि प्रणालियों से प्रभावित।

  • जनजातीय निवास स्थल।

  • पर्यावरणीय समस्याओं युक्त जैसे- निर्वनीकरण अवैज्ञानिक कृषि आदि

HA IVth Five Year Plan में क्रियान्वित की गई तथा उसके अंतर्गत 4 क्षेत्र ग्रहण किये गये-

  • असम की पहाड़ियाँ जिसमें North catchment से

  • Darjeeling hills

A herd of sheep walking across a lush green field Descriptio …

Darjeeling Hills

Uttarakhand के पहाड़ी क्षेत्र जैसे-चमोली, रूद्रप्रयाेेग आदि।

  • नीलगिरी की पहाड़ियाँ

  • असम की पहाड़ी:-चाय के बागान एवं मिस्मी, मिरी, एबोर, उफला जनजातियों का निवास।

  • दार्जिलिंग:-चाय के बगान, होप्सा, लेप्चा जैसी जनजातियाँ।

  • यूके:- कृषि , चावल, मक्का जौ तथा फल कृषि बागानी चाय, जोनसारी जनजाति, घोटिया थारू जनजाति।

  • नीलगिरि:- चाय के बागान, आलू (पुर्तगालियों के दव्ारा) टोडा जनजाति qralis (क्यूरलिस) आदि।

इस योजना के अंतर्गत-

  • Tribal development program

    • पर्यावरणीय संरक्षण

    • आर्थिक पिछड़ेपन को दूर करना

    • आपदा प्रबंधन

  • Tribal area development:- 1965-66 में जनजाति विकास कार्यक्रम की रूपरेखा रखी गई। tribe शब्द वैधानिक भाषा में अपरिभाषित है।

  • समाजशास्त्रीय परिभाषा के अनुसार जनजाति एक नृजातीय एवं सांस्कृतिक मानव समूह है जो जटिल एवं भू-भौतिक तथा कठिन जलवायविक परिस्थितियों में समाज की मुख्य धारा से दूर निवास करते है तथा अपनी विलक्षण सांस्कृतिक नृजातीय संरचना से चिन्हित किये जाते है। जनजातीय विकास कार्यक्रम उनके विशिष्ट सामाजिक आर्थिक एवं भौगोलिक दशाओं के परिपेक्ष्य में शामिल किया गया जिसका उद्देश्य हैं-

    • आर्थिक प्रगति है जो उनके सांस्कृतिक विरासत में बिना हस्तक्षेप किये संभव हो।

    • पर्यावरण संरक्षण।

    • विज्ञान एवं प्रगति के मुख्य धारा में प्रवेश।

    • आर्थिक सामाजिक शोषण से संरक्षण।

    • वन संसाधन एवं खनिज संसाधन से प्राप्त आर्थिक लाभों का जनजातियों में न्यायोचित वितरण।

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