Population Growth and Distribution in India, LEE of Model, the Destination Part 19

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भारत में जनसंख्या वृद्धि एवं वितरण (Population Growth and Distribution in India)

  • अवस्था I- High stationary phase :-1872 में प्रथम जनगणना परन्तु असफल। 1851 में सफल रही। अत: भारत के demographic इतिहास का प्रारंभ है। यह चरण 1881 से 1921 तक का है। भारत की कुल जनसंख्या 1881 में 22 करोड़, 1991 में 23.6, 1921 में घटकर 23.1 करोड़ हो गयी अर्थात 1911-21 के मध्य जनसंख्या वृद्धि दर-0.3 प्रतिशत प्राप्तु हुई जिसका मुख्य कारण IWW महामारी, दुर्भिक्ष आकार आदि या अत: 1921 को भारत का great demographic divide माना जाता है क्योंकि इसके पश्चात भारत में कभी भी जनसंख्या पतन नहीं हुआ।

  • अवस्था II :-1921-1951-Early expanding phase :-1951 में कुल जनसंख्या 33 करोड़ प्राप्त हुई जो पाकिस्तान के विभाजन एवं सांप्रदायिक दंगों के बावजूद प्राप्त हुई क्योंकि कुपोषण महामारी पर नियंत्रण, दुर्भिक्ष अकाल पर नियंत्रण imported medicine की उपलब्धता

  • अवस्था III :-जनसंख्या विस्फोटक काल (1951-81)

  • कुल जनसंख्या 30 वर्षों में Double हो गई। 1961-71 में भारत की अधिकतम दशकीय वृद्धि दर 24.9 प्राप्त हुआ। उत्तरप्रदेश में 1971-81 में पुन: जनसंख्या विस्फोट हुए। कुल वृद्धि दर 24.6 कायम रही क्योंकि अन्न संकट समाप्त हुआ और हरित क्रांति, आत्मनिर्भरता, ग्रामीण एवं Tribal क्षेत्रों में दवा चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हुई। BR-45 व्यक्ति/1000 से ऊपर घटकर 20 से कम हो गया।

  • अवस्था IV 1981-वर्तमान:-जनसंख्या वृद्धि दर का पतन 1991 में जनसंख्या 82 करोड़, वृद्धि दर -21.4 प्रतिशत

    • 2001-जनसंख्या वृद्धि दर-19.6 प्रतिशत

    • कुल जनसंख्या-1 बिलियन से अधिक

    • 2011 कुल जनसंख्या-1.21 बिलियन

    • वृद्धि दर-17.6

भारत में वृद्धि दर का निरंतर हास जारी है परन्तु कुल जनसंख्या 2070 में नियत होगी जो पहले 2045 में निर्धारित की गई थी।

वितरण:-

  • उच्च अतिसघन:-जहाँ 750 व्यक्ति/km2 से अधिक हो। जैसे बिहार, बंगाल, केरला, TN, UP History of settlement, high land capability गरीबी, अशिक्षा

  • उच्च सघनता:- 500 से 750

  • moderately high:-250 से 500

  • low :-100-250 जैसे- झारखंड, ओड़िसा, CG etc.

  • very low:- less than 100 जैसे सिक्कम, अरूणांचल प्रदेश आदि।

प्रवसन

  • प्रवसन से तात्पर्य मानव अथवा मानव समूह से किस स्त्रोत से गंतव्य की ओर स्थाई एवं अर्द्धस्थाई रूप से विस्थापना जहाँं पुराने सांस्कृतिक संलग्नता टूटती है एवं नये संस्कृतियों में विलय होता है अर्थात प्रवसन के तीन तत्व है।

    • Distance

    • Intension

    • New cultural afflictions

  • प्रवसन पर Ravenstein का theory :- Ravenstein के नियम के अनुसार प्रवसन मुख्यत: आर्थिक कारकों से प्रेरित होते है एवं लंबी दूरी के प्रवसन पुरूष एवं कम दूरी के migration female विशिष्ट होता है। प्रत्येक बाह्य प्रवसन का प्रभाव प्रति प्रवसन भी होता है।

  • प्रवसन में distance decay law लागू होता है अर्थात migration का आयतन का दूरी के साथ व्युत्क्रमानुपाती संबंध है। कुशल श्रमिकों का migration अधिक दूरी का परन्तु कम संख्या का migration होता है।

LEE का Model:-lee ने migration के push pull model को प्रतिपादित किया।

Push Pull Modal

च्नेी च्नसस डवकंस

Push:-प्रवसन के स्त्रोत पर कार्य करती है।

Pull:-गन्तव्य पर कार्य करती है।

Push Factor

च्नेी थ्बंजवत

  • जननांकीय-उच्च जन्म दर, जनसंख्या विस्फोटक वृद्धि अधिक घनत्व।

  • प्राकृतिक व र्प्यावरणीय:- प्राकृतिक आपदा, बाढ़ सूखा, भूकंप आदि।

  • सामाजिक:-विवाह, गरीबी, बेरोजगारी, महामारी, भेदभाव, जाति भेद सांप्रदायिक हिंसा, सामाजिक प्रदूषण।

  • धार्मिक-सामुदायिक भावना, असुरक्षा

  • राजनैतिक- migration policy, चाइना ने तिब्बत के लिए policy, रसिया का साइबेरिया के लिए policy

The destination of types

ज्मी कमेजपदंजपवद व जलचमे

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