चीन का भूगोल (Geography of China) Part 7 for Andhra Pradesh PSC

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मिटवित रुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्र्‌ुरुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्रुरू टी-

चीन की लगभग 90 प्रतिशत मिटिवित रुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्र्‌ुरुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्रुरू टयाँ वायूढ़ (लोएस) एवं जलोढ़ निक्षेणें दव्ारा निर्मित है। केवल 10 प्रतिशत मिटिवित रुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्र्‌ुरुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्रुरू टयाँं अवशिष्ट एवं स्थानीय हैं। उत्तरी चीन में पेडॉकल एवं दक्षिणी चीन में पेडॉल्फर मिटिवित रुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्र्‌ुरुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्रुरू टयांँ पायी जाती है। पेडॉकल मिटिवित रुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्र्‌ुरुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्रुरू टयों में चूने एवं जीवांश की मात्रा अधिक है, जबकि पेडॉल्फर मिटिवित रुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्र्‌ुरुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्रुरू टयों में एल्युमिनियम (एक प्रकार की चांदी के समान बड़ी हल्की धातु) तथा लोहे की प्रधानता है।

चीन में काली मृदा की कमी हैं। चीन में मुख्यत: जालोढ़ मृदा की ही प्रधानता है। पूर्वी मैदान में जलोढ़ मृदा है। यहाँ नवीन तथा पुराने दोनो प्रकार के जलोढ़ मिलते हैं। मंचूरिया, शान्सी, शेन्सी, शान्तुंग और यूनान के पठार पर लाल मृदा पाए जाते है। लोएस मैदान में लोएस प्रकार की मृदा है। उत्तरी मरुस्थलीय क्षेत्र में मरुस्थलीय मृदा हैं। पश्चिमी क्षेत्र में पर्वतीय मृदा हैं। मैदान बेसिन में तथा तकला मकान मरुस्थल में लंवणीय मृदा पायी जाती है। ऐसी मृदा को playa मृदा भी कहते है। कृषि महत्व की दृष्टि से जलोढ़, लोएस और लाल मृदा प्रमुख है।

उत्तरी चीन की पेडॉकल और दक्षिणी चीन की पेडाल्फर मिटवित रुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्र्‌ुरुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्रुरू टयों के मध्यस्थ गोयांगजी एवं क्वीचाऊ प्रदेश की उच्च भूमियों में ’रेडी जिनास’ नामक गहरे रंग की मिटवित रुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्र्‌ुरुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्रुरू टी पाई जाती है। यह मिटवित रुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्र्‌ुरुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्रुरू टी सामान्यत: चूना पत्थर से निर्मित है, जिसकी पार्श्विका अविकसित है। स्थानीय निवासी इसे ’मकईर् की मिटवित रुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्र्‌ुरुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्रुरू टी’ कहते हैं।

प्राकृतिक वनस्पति-

वर्तमान समय में चीन के मात्र 12 प्रतिशत क्षेत्र को ग्रीन एरिया (हरा क्षेत्र) घोषित किया गया है। चीन का प्राकृतिक वनस्पति में वन, घास के मैदान तथा मरुस्थलीय झाड़ियों की प्रधानता है।

  • वन-

  • जलवायु विषमताओं के कारण यहाँ अनेक प्रकार के वन है। चीन के दक्षिणी भाग में चौड़ी पत्ती वाले सदाबहार वन मिलते हैं, इनमें कपूर, बाँस, टैलो, टुंग, नारियल, चन्द्र, रबड़ इत्यादि प्रमुख वृक्ष हैं। एस-एवरग्रीन (सदाबहार)

  • चीन के दक्षिणी-पूर्वी मानसूनी प्रदेश में पतझड़ वन मिलते हैं। इनमें साल, सागौन, आम इत्यादि वृक्ष प्रमुख हैं। एसई- मानसून

  • चीन के उत्तरी-पूर्वी भाग में शीतोष्ण सदाबहार वन मिलते हैं, इनमें पोपलर, एल्म, शाहबलून, ऐश इत्यादि वृक्ष प्रमुख है।

  • चीन के उच्च पर्वतीय प्रदेशों में नुकीली पत्ती वाले कोणधारी वन मिलते हैं, इनमें पाइन, सीडर तथा लार्च वृक्षों की प्रधानता है।

  • वनों के अंतर्गत चीन का सबसे महत्वपूर्ण वृक्ष टुंग है। इस वृक्ष से तेल निकाला जाता है।

  • घास का मैदान-चीन के एक विस्तृत भू-भाग पर टटेप्स घास के मैदान मिलते हैं, जिनमें 1 मीटर तक ऊँची घास मिलती है। ये घास के मैदान आंतरिक मंगोलिया, सीक्यांग तथा तिब्बत में अधिक मिलते हैं। पर्वतीय ढालों तथा घाटियों के सहारे भी घास मिलती हैं। ये घास के मैदान चीन की 30 प्रतिशत भूमि पर फैले हुए है।

  • मरुस्थलीय झाड़ियाँ- मरुस्थलीय झाड़ियाँ चीन के मरुस्थलीय, अर्द्ध-मरुस्थलीय भागों में मिलती है। इस वनस्पति में छोटी-छोटी कांटेदार झाड़ियां मिलती हैं। ये झाड़ियाँ गोबीओरटोस तथा तकला मकान के मरुस्थलीय भाग तथा शेन्सी एवं कान्शू अर्द्ध - मरुस्थलीय भागों में मिलती हैं। इन शुष्क भागों में नालों तथा जल प्रवाह के श्रोतों के सहारे छोटी-छोटी काँटेदार झाड़ियाँ उग आती है। इन भागों में जहाँ कुछ वर्षा हो जाती है, बिली तथा पोपलर वृक्ष उग जाते है।

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