जापान का भूगोल (Geography of Japan) Part 5 for Andhra Pradesh PSC

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जलवायु-

  • जापान की जलवायु मानसूनी है। एशिया महादव्ीप के पूर्वी शीतोष्ण कटिबंधीय प्रदेशों में स्थित होने के कारण जापान की जलवायु पर धरातल की अपेक्षा सामूहिक दशाओं का प्रभाव अधिक पड़ता है। यही कारण है कि शीत ऋतु में जापान के चारों ओर से समुद्र से घिरे होने के कारण तापमान अधिक गिर नहीं पाता है। पश्चिमी तट पर उत्तरी पश्चिमी शीत मानसूनों का प्रभाव होने के बावजूद भी गर्म क्यूरोसियो समुद्री धारा के कारण पश्चिमी तट पूर्वी तट की भाँति अधिक ठंडा नहीं होने पाता हैं।

  • क्यूरोसियो (गर्म जलधारा) तथा ओयागियो (क्यूराइल/काली धारा) के मिलने से होकैडो के पास हमेशा कुहरा का वातावरण बना रहता है।

टाइफून (आंधी)

ये उष्ण कटिबंधीय चक्रवात हैं जो प्राय ग्रीष्म ऋतु के अंत या पतझड़ ऋतु के प्रारभं में चलते हैं। ये मौसम में अचनाक परिवर्तन लाते है। जुलाई से नवंबर के मध्य औसतन 20 टाइफून आते हैं। इनकी गति तीव्र होने के कारण ज्वारीय लहरोंं एवं तीव्र वर्षा से दक्षिणी पश्चिमी जापान में अपार क्षति होती है। इससे प्रतिवर्ष धान तथा सेव की फसल क्षतिग्रस्त हो जाती हैं।

चक्रवात

शीत ऋतु में जापान निरन्तर चक्रवातों से प्रभावित रहता है। ये चक्रवात एशियाई भूखंड से विशेषकर पछुवा हवाओं के क्षेत्र से पूर्व की तरफ गतिशील होते हैं। इनके दो स्पष्ट मार्ग हैं- प्रथम उत्तर में साइबेरिया तथा मंचूरिया से और दूसरा दक्षिणी चीन से पूर्व की ओर चक्रवात चलते हैं। चक्रवातों की ये दोनों शाखाएं भीषण चक्रवातीय दशाएँ उत्पन्न हो जाती है।

वर्षा

जापान को आर्द्र देश कहा जा सकता है। प्रत्येक भाग में न्यूनाधिक वर्षा अवश्य होती है। जापान में सर्वाधिक वर्षा दक्षिणी-पूर्वी तटीय भागों में होती है। जहाँ वार्षिक वर्षा का औसत 200 से.मी-300 से.मी. तक होता है। जापान में पर्वतीय वर्षा होती है। सामान्यत: जापान के निम्न तीन क्षेत्रों में वर्षा सामान्य से अधिक होती हैं-

  • प्रशांत तटीय भाग जो 350 उत्तरी अक्षांश के दक्षिण में इजू प्रायदव्ीप से क्यूशू दव्ीप तक विस्तृत है जहाँ से होकर न केवल दक्षिणी-पूर्वी मानसून गुजरते है वरनवित रुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्र्‌ुरुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्रुरू चक्रवातों से भी वर्षा होती है।

  • जापान सागरीय तट पर 350 उत्तरी अक्षांश से अकीला तक का प्रदेश (दक्षिणी-पश्चिमी मानसून से)

  • मध्य होन्शू के हिडा उच्च प्रदेश के पश्चिम से फौसा मैग्ना तक।

निम्नलिखित क्षेत्र देश के औसत (100 से.मी.) से भी कम वर्षा प्राप्त करते हैं-

  • होकैडो का अधिकांश भाग

  • उत्तरी होन्शू का प्रशांत तटीय भाग

  • आंतरिक सागर का मध्य बेसिन

  • मध्य होन्शू में अंतपर्वतीय बेसिन

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