शुल्वसूत्र (Sulbasutra – Culture)

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• कई संस्कृत ग्रंथों को सामूहिक रूप से शुल्वसूत्र कहा जाता है जिन्हें वैदिक हिन्दुओं दव्ारा 600 ईसा पूर्व से पहले लिखा गया था। वे उत्तर वैदिक संस्कृत में लिखे गए हैं।

• चार प्रमुख शुल्वसूत्र हैं- बौधायन, मानव, अपस्तम्ब और कात्यायन जिनमें बौधायन को सबसे पुराना माना जाता रहा है।

• शुल्वसूत्र में शुल्व का अर्थ रस्सी या चेन है। शुल्व के दव्ारा ज्यामितीय निर्माण कार्य किये जाते हैं जिनमें विभिन्न त्रिज्याओं और केन्द्रों वाले चाप बनाये जाते थे।

• ये ग्रंथ कल्पसूत्र वंश के वैदिक परिशिष्ट है और इनमें ज्वाला वेदी निर्माण से संबंधित ज्यामिति शामिल है।

• अनुष्ठानो की सफलता के लिए वेदी का मापन अत्यंत सटीक होना चाहिए इसलिए यहाँ गणितीय शुद्धता महत्वपूर्ण हो जाती है।

• ऐसा माना जाता था कि परमेश्वर दव्ारा विशिष्ट उपहार प्राप्त करने हेतु विशिष्ट प्रकार की यज्ञ वेदी का निर्माण किया जाना चाहिए उदाहरण के लिए स्वर्ग प्राप्ति की इच्छा रखने वालों को बाज के आकार की वेदी का निर्माण करवाना चाहिए।

• इतिहासकारों के लिए इस बात का अनुमान लगा पाना मुश्किल है कि शुल्वसूत्र की गणितीय जानकारी क्या सिर्फ तत्कालीन व्यक्तियों ने यूनानियों के समान सिर्फ अपने लिए रखी थी या फिर यह सिर्फ धार्मिक अनुष्ठानों के लिए थी।

• कुछ नियम जैसे एक आयात के समान क्षेत्रफल वाला एक वर्ग बनाने के नियम सटीक है लेकिन एक वृत के बराबर क्षेत्रफल वाला एक वर्ग बनाने के नियम अनुमान पर आधारित है।

अपनी कृति ”गणित की उत्पत्ति” में ए साईडेनबर्ग (A Seidenberg) ने बताया कि प्राचीन बेबीलोन के पास पाइथागोरस प्रमेय का ज्ञान था। यह बहुत ही बुनियादी था, लेकिन यह स्पष्ट रूप से बाद में केवल शुल्वसूत्र में ही उल्लिखित है।

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