आचार संहिता (Code of Ethics – Part 8)

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ऐसे में यह आवश्यक जान पड़ता है कि लाभ के पद की सुस्पष्ट परिभाषा बनाई जाए ताकि शक्तियों को अधिक स्पष्ट रूप से पृथक किया जा सके। वे विधायक जो मंत्री नहीं होते अपने व्यक्तिगत या व्यावसायिक पृष्ठभूमि से प्राय: महत्वपूर्ण विशेषज्ञता वाले होते हैं। इसके अलावा, उन्हें लोक सेवा के अनुभव से लोक नीति की अद्भुत दृष्टि और विवकेशीलता मिलती है। ऐसी विशेषज्ञता और जानकारी कार्यपालिका की नीति निर्माण में मूल्यवान इनपुट दे सकती है। अत: विधायकों को केवल पूर्णतया सलाहकारी प्रकृति की समितियों और आयोगों के गठन में संबंद्ध किया जाना चाहिए। केवल ऐसे पदों पर रह कर कुछ पारिश्रामिक और अन्य सुविधाएं प्राप्त कर लेने से ही वे कार्यपालिका के पद पर नहीं बन जाते। संविधान यह मान्यता देता है कि विशेषज्ञ और सलाहकारी निकायों में ऐसे पदों पर रहने से शक्तियों के पृथक्करण का अतिक्रमण नहीं होता और ऐसे गैर -कार्यपालिका के पद को अयोग्यता से छूट देना संसद और राज्यों के विधायकों पर छोड़ दिया जाता है। परन्तु सीधे निर्णय लेने वाली शक्तियों और क्षेत्र के कार्मिकों के दिन प्रतिदिन नियंत्रण सहित सांविधिक और गैर-सांविधिक कार्यकारी प्राधिकारों सहित नियुक्तियों में अथवा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों के शासी निकायों के पद या निजी उद्यमों में सरकारी नामाकंन स्पष्ट रूप से कार्यकारी उत्तरदायित्व वाले होते हैं और इनमें निर्णय लेने वाली शक्तिया संलिप्त रहती हैं। ऐसी नियुक्तियों में निसंदेह शक्तियों के पृथक्करण का अतिक्रमण होता है। विधायकों को सार्वजनिक निर्माण कार्यो की मंजूरी देने या अनुमोदन देने की विवेकपूर्ण शक्तियां प्रदान करना स्पष्ट रूप से एक कार्यकारी कृत्य का प्रयोग हैं, चाहे विधायकों की सरकार को एक पदनामित पद दे या न दे। यह आवश्यक है कि लाभ के पद की परिभाषा बनाते समय कार्यकारी कृत्यों और कार्यकारी प्राधिकारों में सुस्पष्ट तौर से अंतर किया जाए भले ही ऐसी भूमिका या ऐसे पदों में पारिश्रमिक और सुविधाएं मिलती हों।

दव्तीय प्रशासनिक सुधार, आयोग ने ऐसे हालातों में, कानून में निम्नलिखित संशोधन करने के सुझाव दिये:

• ऐसे सभी सलाहकारी निकायों के कार्यालयों को, जहां पर विधायक के अनुभव और जानकारियां सरकारी नीतियों में इनपुट गिनी जा सकें, लाभ के पद नहीं समझे जाने चाहिए, भले ही ऐसे पद के साथ पारिश्रमिक और सुविधाएं मिलती हों।

• उन सार्वजनिक उद्यमों और सांविधिक और गैर सांविधिक प्राधिकरणों के शासी निकायों के पदों सहित, जिनमें नीति निर्णय करना होता है या संस्थानों का प्रबंध करना होता या व्ययों को अधिकृत करना या उनका अनुमोदन करना होता हो, ऐसे सभी कार्यालयों को लाभ के पद वाले कार्यालय समझा जाना चाहिए और विधायकों को ऐसे पदों को धारण नहीं करना चाहिए। (विधायकों की मर्जी से विवकेशील कोपों या विशिष्ट परियोजनाओं और स्कीमों का निर्धारण करने की शक्ति या लाभार्थियों का चुनाव या व्यय को अधिकृत करना कार्यकारी कृत्यों का निष्पादन समझा जाएगा और अनुच्छेद 102 और अनुच्छेद 191 के अंतर्गत अयोग्यता समझी जाएगी, भले ही नया पद अधिसूचित या धारित कर लिया गया हो या नहीं।)

• यदि कोई सेवारत पदेन मंत्री योजना जैसे संगठनों का सदस्य या अध्यक्ष रहता है, जहां पर मंत्रिपरिषद और किसी संगठन या प्राधिकरण या समिति के बीच नजदीकी समन्वय सरकार के दिन प्रतिदिन के कृत्य के लिए आवश्यक होता हो तो इसे लाभ का पद समझा जाएगा।

उच्चतम न्यायालय का एक निर्णय है कि मंत्रिमंडलों के सदस्य भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत लोक सेवक हैं। दव्तीय प्रशासनिक सुधार आयोग ने भी सिफारिश किया कि संसद सदस्यों और विधानमंडलों के सदस्यों को सूचना अधिकार अधिनियम के अंतर्गत ’लोक प्राधिकारी’ घोषित कर दिया जाना चाहिए सिवाए इसके कि जब वे विधायी कृत्यों का निष्पादन कर रहे हों।

न्यायपालिका के लिए नैतिक ढांचा

न्यायपालिका की स्वतंत्रता न्यायिक नैतिकता के साथ विकट रूप से जुड़ी हुई है। जनता का विश्वास ले कर चलने वाली स्वतंत्र न्यायपालिका विधान के नियम की एक मूल आवश्यकता है। यदि किसी न्यायाधीश दव्ारा ऐसा आचरण किया जाता है जिससे सत्यनिष्ठा और गरिमा का हनन दिखाई देता हो (हाल के वर्षों में कई न्यायाधीशों पर जिनमें सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत मुख्य न्यायाधीश भी शामिल हैं) तो इससे नागरिकों दव्ारा न्यायपालिका पर किए हुए विश्वास को धक्का पहुंचेगा। अत: न्यायाधीश का आचरण हमेशा दोषरहित होना चाहिए।

अमरीका में, फेडरल के न्यायाधीश अमरीकी न्यायाधीशों के लिए आचार संहिता को अपनाते हैं, जो अमरीका की न्यायिक कांग्रेस दव्ारा अपनाए जाने वाले नैतिक सिद्धांतों और मार्गदर्शी सिद्धांतों का एक सेट है। यह आचार संहिता न्यायाधीशों के लिए न्यायिक सत्यनिष्ठा और स्वतंत्रता, न्यायिक तत्परता और निष्पक्षता, अनुज्ञेय अतिरिक्त न्यायिक गतिविधियां और अनौचित्य से बचाव और यहां तक कि उसका लोगों के सामने आने के मुद्दों पर मार्गदर्शन प्रदान करती है।