सूचना का अधिकार (Right to Information) Part 18 for Arunachal Pradesh PSC

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सूचना का अधिकार: एक आकलन

लोक कल्याणकारी एवं जवाबदेह शासन का प्रमुख आधार सूचना का अधिकार है। संवदेनशील एवं स्मार्ट (आकर्षक) शासन को मूर्त रूप देना और जनता का विश्वास अर्जित करना प्रशासकों के सामने एक चुनौती बन चुका है। सूचना का अधिकार एक्ट (अधिनियम) उस आम आदमी के लिए प्रभावी हथियार है जिनकी नौकरशाही में सीधी कोई जान पहचान या दखल नहीं है। इससे शोषण और मनमाने व्यवहार पर अंकुश लग सकेगा और भ्रष्टाचार को नियंत्रित किया जा सकेगा। इससे प्रशासन एवं शासन में जनसहभागिता, मूल्यांकन, फीडबैक (प्रतिक्रिया) और सुधार सुझाव जैसे कारकों का समावेश होगा।

इससे प्रशासनिक निर्णयों में तार्किकता और तठस्थता बढ़ती है लोक प्रशासन को भी जनता की भावनाओं और रुझानाेें का पता चलता है तथा प्रशासनिक गुणवत्ता और विश्वसनीयता बढ़ती है। सजग संवेदनशील एवं उत्तरदायी प्रशासन का विकास होता है। वैसे भी सूचना, ज्ञान, प्रतिभा, जानकारी में स्वयं की बंधन मूक्त करने की नैसर्गिक शक्ति होती है।

भारतीय प्रेस (मुद्रण यंत्र) परिषद के पूर्व अध्यक्ष न्यायमूर्ति पी.बी. सावंत के अनुसार अगर सूचना का अधिकार के साथ साथ अन्य संस्थाओं जैसे जनसंचार माध्यमों, गैर सरकारी संगठनों तथा लोकपाल एवं लोकायुक्त को सक्षम नहीं बनाया गया तो यह अधिकार निरर्थक सिद्ध होगा।

दूरगामी परिणाम आज पूरा विश्व एक गांव की तरह परिलक्षित होता है। कंम्यूटर (परिकलक) एवं संचार तकनीक के समय एवं दूरी के अभाव को समाप्त कर दिया है फिर राजकीय सूचनाओं के अधिकार व्यक्ति क्यों वंचित रहें? अधिकांश ग्रामीण सरकार दव्ारा उन्हें दी जाने वाली सुविधाओं एवं योजनाओं के बारे में अनभिज्ञ रहता है। इसका प्रमुख कारण अशिक्षा व अधिकारी के प्रति अचेत रहना है। वैसे गांवों में संचार माध्यमों जैसे रेडियो, टी.वी., इंटरनेट आदि के माध्यम से लोग अपने अधिकार को जानने की कोशिश कर रहे हैं। मध्य प्रदेश के धार जिले में ज्ञानदत्त योजना के तहत कई सूचना केन्द्र खोले जातेे हैं। यहाँ से कोई भी व्यक्ति कई दस्तावेज प्राप्त कर सकता है और अधिकारियों को शिकायत भेज सकता है। इस परियोजना को स्टोकहोम चैलेंज (चुनौती) अवार्ड (पुरस्कार) भी प्राप्त हुआ है। अब इस सूचना का विस्तार पूरे प्रदेश में कर दिया गया है।

आरटीआई दव्ारा पंचायत या ब्लॉक (खंड) के रिकॉर्ड (विवरण) देखे जा सकते हैं। गांव वाले आवश्यकता पड़ने पर इस विषय पर एक जन सुनवाई का आयोजन भी कर सकते हैं। इस जन सुनवाई में गांव के सभी लोगों को बुलाया जायेगा व विकास कार्यो संबंधी जो जानकारी आरटीआई के उपयोग व गांववासियों की अपनी जाँच से प्राप्त हुई है उसे सबके सामने रखा जायेगा तथा जनसुनवाई में उनको अपना पक्ष प्रस्तुत करने के लिए बुलाया जा सकता है।