सूचना का अधिकार (Right to Information) Part 2 for Arunachal Pradesh PSC

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सूचना के अधिकार और सुशासन के मुद्दे-

  • सूचना के अधिकार एक तो स्वयं एक अधिकार है और कई अन्य अधिकारों को भी सशक्त करता है जबकि सुशासन में मानवाधिकार और मानव विकास के विभिन्न मुद्दे हैं।

  • सुशासन का पारदर्शिता आयाम सीधे-सीधे सूचना के अधिकार पर निर्भर है।

  • सूचना के अधिकार और सुशासन से निष्पादन मूल्यांकन ज्यादा सशक्त होगा और शासन तथा प्रशासन के बारे में नागरिक तथा समाज ज्यादा सूचित होंगे, इसलिए जबावदेही बढ़ेगी।

  • सूचना के अधिकार से सुशासन के श्रेष्ठ अनुभवों के संबंध में तुलनाओं को बढ़ाया जा सकेगा।

  • सूचना के अधिकार से सुशासन के लिए लोक सेवाओं में सक्षमता-निर्माण की प्रवृत्ति बढ़ेगी।

  • राज्य और गैर-राज्य भागीदारी बढ़ाते हुए आर्थिक विकास को साधन और मानव विकास को साध्य बनाया जाएगा।

  • सूचना से सहमति को सबल बनाया जा सकता है और सहमति सुशासन का अभिन्न अंग है।

  • इनसे मानव विकास सूचक और अन्य सूचकों के संदर्भ में गणनाएँ बेहतर बनेगी, इसलिए जवाबदेही बढ़ सके (पी.सी. होता) समिति ने सुशासन के संदर्भ में राज्यों में स्टेट (राज्य) ऑफ (के) गवर्नेस (शिक्षिका) रिपोर्ट (विवरण) लाने का सुझाव दिया

  • इनसे भ्रष्टाचार को रोकने में सहायता मिलती है।

  • सूचना के अधिकार से ई-शासन को बल मिलता है जिससे कि स्मार्ट (आकर्षक) शासन (स्मार्ट (आकर्षक) -सिंपल (सरल), मोरल (आदर्श), एकांउंटेबल (उत्तरदायी), रिसपोन्सिबल (जिम्मेदार) और ट्रांसपिरन्ट (पारदर्शक) गवर्नेंस (शासिका) ) को बढ़ाया जा सकता है।

  • सूचना के अधिकार से लोकसेवा मूल्य विकसित होते हैं जो कि सुशासन के लिए जरूरी है।