सूचना का अधिकार (Right to Information) Part 22 for Arunachal Pradesh PSC

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भाग एक अधिकारिक गुप्तता

  • आधिकारिक गुप्तता अधिनियम 1923 को निरस्त करके इसे राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के एक अध्याय के रूप में शामिल किया जाए।

  • सार्वजनिक मामलों में मंत्रीगण पदभर संभालने के समय पारदर्शिता की शपथ लें।

  • सशस्त्र सेनाओं की अधिनियम की दव्तीय अनुसूची में सम्मिलित किया जाए।

  • अधिनियम की दव्तीय अनुसूची की समय-समय पर समीक्षा की जाए।

  • दव्तीय अनुसूची से सूचीबद्ध सभी संगठनों में लोक सूचना अधिकारी की नियुक्ति कि जाएँ। पीआईओ के आदेशों के विरुद्ध अपील सीआईसी एसआईसी के पास फाइलें की जानी चाहिए।

नियम और प्रक्रियाएँ-

  • सिविल (नागरिक) सेवा नियमों में यह शामिल किया जाए की प्रत्येक सरकारी सेवक सदवित रुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्र्‌ुरुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्रुरू भावना के साथ अपने कर्तव्यों के निष्पादन में जनता की अथवा किसी संगठन को सही एवं पूरी जानकारी देगा परन्तु अनाधिकृत एवं अनुचित लाभ हेतु नहीं।

गोपनीयता वर्गीकरण-

  • आरटीआई अधिनियम के अंतर्गत छूट में अधिकारियों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्टो और परीक्षा प्रश्नपत्रों व संबंद्ध मामलों को शामिल करने के लिए व्यवस्था की जानी चाहिए।

  • एक बार परम गुप्त अथवा गुप्त के रूप में वर्गीकृत दस्तावेजों को 30 वर्ष तक और प्रतिबंधित के रूप में वर्गीकृत दस्तावेजों को 10 वर्ष की अवधि के लिए ऐसे ही बने रहना चाहिए।

  • दस्तावेजों की ग्रेडिंग (श्रेणी) प्रदान करने के लिए प्राधिकृत अधिकारी निम्नांकित स्तर के हों-

  • परम गुप्त-संयुक्त सचिव से कम स्तर का नहीं।

  • गुप्त-उप सचिव से कम स्तर का नहीं।

  • गोपनीय-अवर सचिव से कम स्तर का नहीं।

साथ ही राज्य सरकारें समकक्ष रैंक (श्रेणी) के अधिकारियों को ग्रेडिंग प्रदान करने के लिए प्राधिकृत कर सकती हैं।