सूचना का अधिकार (Right to Information) Part 24 for Arunachal Pradesh PSC

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कार्यान्वयन में मुद्दे-

  • नियमों में संशोधन करके पोस्टल (डाक) ऑर्डर (आदेश) के माध्यम से अदायगी को सम्मिलित किया जाए।

  • राज्यों को केन्द्रीय नियमों के अनुरूप आवेदन-पत्र फीस (शुल्क) के संबंध में नियम तैयार करने चाहिए।

  • राज्य सरकारें फीस की अदायगी की एक विधि के रूप में उपयुक्त राशि के समुचित स्टांप (डाक टिकट) जारी कर सकती हैं।

  • डाकघरों को नगद रूप में फीस प्राप्त करने और आवेदन पत्र के साथ रसीद भेजने के लिए प्राधिकृत किया जा सकता है।

  • भारत सरकार के स्तर पर कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग नोडल (केन्द्रीय) एजेंसी (शाखा) है। उसके पास सभी केन्द्रीय मंत्रालयों/विभाग में कार्यरत सार्वजनिक प्राधिकरणों की एक पूर्ण सूची होनी चाहिए।

  • इन सार्वजनिक प्राधिकरणों का वर्गीकरण निम्नांकित प्रकार हो-संवैधानिक निकाय, एक समान एजेंसियाँ, सांविधिक निकाय सरकारी क्षेत्रक उपक्रम, कार्यकारी आदेशों के तहत स्थित निकाय, पर्याप्त रूप से वित्त पोषित स्वामित्व वाले नियंत्रित निकाय और सरकार दव्ारा पर्याप्त रूप से वित्त पोषित एनजीओ हो।

  • सरकारी प्राधिकरण के पास उसके अधीन तत्काल अगले स्तर के सभी सरकारी प्राधिकरणों के ब्यौरे हों।

  • जिला कलेक्टर/उपायुक्त अथवा जिला परिषद के कार्यालय में प्रकोष्ठ की स्थापना करके एकल खिड़की एजेंसी (शाखा) कायम की जाए।

  • किसी भी संगठन में सबसे निचले स्तर के कार्यालय को, जिसे निर्णय लेने की शक्ति प्राप्त हो अथवा जो अभिलेखों का अभिरक्षक हो, एक सार्वजनिक प्राधिकरण के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए।

  • कोई भी सरकारी सूचना जिसे किसी गैर सरकारी निकाय को हस्तांतरित कर दिया गया हो वह आरटीआई के अंतर्गत प्रकट की जा सकेगी।

  • किसी भी संस्थान को सरकार से ”पर्याप्त निधियन’ प्राप्त समझा जायेगा (अगर उसकी वार्षिक प्रचालन लागत का कम से कम 50 प्रतिशत अथवा पिछले 3 वर्षो में से किसी एक वर्ष में एक करोड़ रूपये के बराबर अथवा राशि प्राप्त हुई हो)।

  • अनुरोध पर 20 वर्ष पुराने अभिलेख उपलब्ध करने की व्यवस्था केवल उन सरकारी अभिलेखों पर लागू होनी चाहिए जिन्हें ऐसी अवधि के लिए परिरक्षित रखे जाने की जरूरत हो।

  • देरी उत्पीड़न और भ्रष्टाचार की शिकायतों से निपटने के लिए राज्य स्वतंत्र लोक शिकायत समाधान प्राधिकरण कायम कर सकते हैं।

  • यदि अनुरोध तुच्छ अथवा कष्टकर हो या अनुरोध पर कार्यवाही से पर्याप्त और अनावश्यक रूप से सरकारी निकाय के संसाधनों का विचलन हो। लोक सूचना अधिकारी आवेदन पूर्व प्राप्त होने के 15 दिन के अंदर अपीलीय अधिकारी के पूर्व अनुमोदन से सूचना के किसी अनुरोध को अस्वीकार कर सकता है।

न्यायपालिका पर कानून को लागू करना-

  • नागरिकों की अभिलेखों की पुन प्राप्ति की सुलभता हो इसलिए विधानमंडलों को सूची पत्र तैयार करने और अभिलेखों के डीजीटीकरण (अंकीय) का कार्य करवाना चाहिए।

  • सीएजी जाँच आयोगों और सदन की समितियों की रिपोर्टों के संबंध से कार्यपालिका शाखा दव्ारा की जाने वाली कार्यवाहियों को ऑनलाइन उपलब्ध होना चाहिए।

  • जिला एवं अधीनस्थ न्यायालय में अभिलेखों को वैज्ञानिक ढंग से भंडारित किया जाए और इनकी प्रशासनिक प्रक्रियाएँ समयबद्ध तरीके से कंम्यूटरीकृत की जाये।

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