वित्तीय समावेशन पर भारतीय रिजर्व बैंक की रिपोर्ट (Report Of The Reserve Bank of India On Financial Inclusion – Economy)

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सुर्ख़ियों में क्यों?

• जुलाई 2015 में भारतीय रिजर्व बैंक दव्ारा गठित दीपक मोहंती समिति ने वित्तीय समावेशन के लिए मध्य अवधि की कार्य योजना तैयार की है।

• समिति ने पाया कि समावेशन के कुछ संकेतकों में सुधार हुआ है, लेकिन फिर भी काफी लोग ऋण हेतु अनौपचारिक माध्यमों जैसे साहूकारों आदि पर निर्भर रहते हैं।

दीपक मोहंती समिति की मुख्य सिफारिशें

• बैंको को महिलाओं के खाता खोलने को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास करने होंगे, तथा सरकार बालिकाओं के लिए कल्याणकारी उपाय के रूप में एक जमा योजना-सुकन्या शिक्षा -पर विचार कर सकती है।

• प्रत्येक व्यक्ति के क्रेडिट (ऋण) खाते से एक बायोमेट्रिक (जीवमितीय) पहचान प्रणाली जैसे आधार जोड़ी जानी चाहिए और ऋण प्रणाली की स्थिरता बढ़ाने और पहुँच में सुधार करने के लिए क्रेडिट सूचना कंपनियों के साथ जानकारी साझा की जानी चाहिए। इससे एक से अधिक ऋण खातो की पहचान करने और ऋण लेने वालों को अधिक ऋणी बनने से रोकने में सहायता मिल सकती है।

• देश के सुदूरवर्ती इलाकों तक सेवा के वितरण में सुधार करने और वित्तीय पहुंच को सुविधाजनक बनाने के लिए तथा अधिकतम संभव गर्वमेंट (सरकार) टू (की ओर) पर्सन (व्यक्ति) (जी2पी) पेमेंट (भुगतान) के लिए मोबाइल (चलनशील) बैंकिंग (महाजन) सुविधा के उपयोग के दव्ारा एक कम लागत वाले समाधान का विकास किया जाना चाहिए।

• कृषि क्षेत्र की सभी गतिविधियों के लिए औपचारिक ऋण की आपूर्ति में वृद्धि करने के लिए भूमि रिकॉर्ड (प्रमाण) का डिजिटलीकरण (अंकसंबंधी) करके आधार कार्ड से जोड़ा जाना चाहिए।

• समिति ने सिफारिश की है कि फसल ऋण पर अल्पकालिक ब्याज दर में छूट या सब्सिडी को चरणबद्ध तरीके से ख़त्म किया जाना चाहिए और इसे छोटे और सीमांत किसानों के लिए एक फसल बीमा योजना से प्रतिस्थापित किया जाना चाहिए।

• समिति ने एप्लीकेशन (अनुप्रयोग) आधारित मोबाइल फोन का इस्तेमाल प्वाइंट-ऑफ-सेल (बिक्री केंद्र) के रूप में करने की सिफारिश की है ताकि जन धन योजना के तहत काफी अधिक संख्या में खोले गए नए खातों और भारी संख्या में जारी किये गए कार्डो के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा निर्मित किया जा सके।

• समिति ने बिजनेस (कारोबार) कॉरेस्पोंडेंट्‌स (समानता) (बीसीएस) के प्रमाणीकरण के लिए प्रशिक्षण की एक वर्गीकृत प्रणाली की सिफारिश की है। अच्छी उपलब्धियों और उन्नत प्रशिक्षण प्राप्त बिजनेस (कारोबार) कॉरेस्पोंडेंट (समानता) पर ऋण उत्पादों जैसे अधिक जटिल वित्तीय कार्यो के लिए भरोसा किया जा सकता है।

• मांग जमा जैसे सरल उत्पादों के साथ बैंकों को विशिष्ट ब्याज मुक्त काउंटर (गिनने का यंत्र) खोलने की अनुमति देना।

• सूक्ष्म और लघु उद्यमों को मौके पर ऋण गारंटी (जमानत) प्रदान करना, और जवाबी गांरटी तथा पुन: बीमा की संभावनाओं का पता लगाने के लिए विविध गारंटी एजेंसियों (शाखाओं) को प्रोत्साहित करना।

• ऋण लेने वाले सूक्ष्म और लघु उद्यमों को एक विशिष्ट पहचान प्रदान करने और इस जानकारी को क्रेडिट (साख) ब्यूरो (सरकारी विभाग) के साथ साझा करने की एक प्रणाली निर्मित करना।

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