जापान का भूगोल (Geography of Japan) Part 8 for Arunachal Pradesh PSC

Get unlimited access to the best preparation resource for UGC : Get detailed illustrated notes covering entire syllabus: point-by-point for high retention.

Download PDF of This Page (Size: 155K)

मिटिवित रुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्र्‌ुरुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्रुरू टयाँ

जापान की मिटवित रुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्र्‌ुरुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्रुरू टी को तीन भागों में बाँटते हैं-

  • लाल एवं पीली मृदा-यह मिटवित रुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्र्‌ुरुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्रुरू टी जापान में क्यूशू, शिकोकू तथा दक्षिणी-पश्चिमी होन्शू दव्ीप में मिलती है। इसमें उपजाऊपन की मात्रा कम होती है।

  • भूरी मृदा-यह मिटवित रुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्र्‌ुरुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्रुरू टी जापान के पूर्वी तथा मध्य होन्शू में पायी जाती है। उत्तरी होन्शू में अम्ल प्रधान भूरी जंगली मिटिवित रुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्र्‌ुरुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्रुरू टयाँ मिलती हैं। कम वर्षा वाले क्षेत्र में इस मिटवित रुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्र्‌ुरुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्रुरू टी की प्रधानता है। पतझड़ वृक्षों की पत्तियाँ इसमें गिरकर सड़ती रहती है अत: इस मिटवित रुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्र्‌ुरुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्रुरू टी में जैवीय तत्व सर्वाधिक पाए जाते हैं। अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में इस मिटवित रुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्र्‌ुरुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्रुरू टी में विक्षालन की क्रिया अधिक होने के कारण इसमें जैविक पदार्थों की कमी पाई जाती हैं।

  • पॉडजोल मृदा-शीतार्द्र जलवायु प्रभावित संपूर्ण होकैडो में पॉडजोल मिटवित रुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्र्‌ुरुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्रुरू टी मिलती है। अतिवृष्टि के कारण इस मिटवित रुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्र्‌ुरुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्रुरू टी में विक्षालन क्रिया अधिक होती है, जिससे इसके उपजाऊ जैवीय तत्व बह जाते हैं। फलत: यह मिटवित रुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्र्‌ुरुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्रुरू टी अपेक्षाकृत कम उपजाऊ होती हैं।

प्राकृतिक वनस्पति

जापानी वनों को तीन भाग में विभाजित करते हैं-

  • शीत-शीतोष्ण कटिबंधीय कोणधारी वन -यह वन जापान के 29 प्रतिशत भाग पर फैले हुए है। इसे शीत प्रदेशीय सदाबार वन भी कहते हैं। अधिक शीत के कारण इन वनों के वृक्षों की पत्तियाँ शंकु के प्रकार की होती है। इन वनों में मिलने वाले मुख्य वृक्ष फर, स्प्रूस पाइन, हेमलाक, लार्च इत्यादि है। इन वनों का आर्थिक महत्व अधिक है। जापान में विकसित कागज तथा लुग्दी उद्योग का कच्चा माल इन्हीं वनों से मिलता है। ये वन जापान के उत्तरी होकैडो तथा उत्तरी हॉन्शू के 1200 मीटर ऊँचे भागों पर मिलते हैं।

  • शीतोष्ण कटिबंधीय मिश्रित वन- मिश्रित वनों में कोणधारी वन एवं चौड़ी पत्ती वाले वन के वृक्ष मिश्रित रूप में पाए जाते हैं। इन वनों में मुख्य वृक्ष बचे, मैपल, पाइन, फर, हेमलॉक, लार्च इत्यादि है। इन वनों का आर्थिक महत्व नकली रेशम का धागा, लुग्दी आदि के उत्पादन में अधिक है। ये वन 300 मी. से लेकर 1200 मीटर की ऊँचाई पर हॉन्शू तथा होकैडो दव्ीप पर अधिक पाए जाते है।

  • चौड़ी पत्ती वाले वन-ये वन जापान में सबसे अधिक भाग में (46 प्रतिशत) फैले हैं। इन वनों को मानसूवी अथवा उपोष्ण वन भी कहते हैं। इन वनों के अंतर्गत, चीड़, बाँस तथा कपूर मुख्य वृक्ष है। ये वन दक्षिणी जापान में क्यूशू तथा दक्षिणी एवं मध्य होन्शू में फैले हुए हैं।

Developed by: