भाग-4 नागरिकता-समता या समानता का अधिकार (अनु 14 − 18) (Part-4: Citizenship-Equal or Right of Equality Article 14 − 18) for Arunachal Pradesh PSC

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समता या समानता का अधिकार (अनु. 14-18) Equal or Right of Equality (Article 14-18)

अनुच्छेद 14:- राज्य किसी भी व्यक्ति को ”विधि के समक्ष समानता” से वंचित नहीं करेगा तथा सभी को ”विधियो के समान संरक्षण प्रदान करेगा।

  • राष्ट्रपति व राज्यपाल के पद के दौरान न्यायालय दव्ारा इनके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की जा सकती-

अनुच्छेद 15:-

15 (i) राज्य किसी भी नागरिक के साथ धर्म, मूलवंश, उदवित रुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्र्‌ुरुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्रुरू भव, जाति वंश के आधार पर विभेद नहीं करेगा।

15 (ii) कोई भी नागरिक किसी भी नागरिक को धर्म, मूलवंश, उदवित रुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्र्‌ुरुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्रुरू भव, जाति वंश के आधार पर सार्वजनिक भोजनालय, होटलो (सराय), सार्वजनिक मनोरंजन के स्थान पर जाने से नहीं रोकेगा।

15 (iii) 15 (1) के बावजूद भी राज्य स्त्री एवं बालक के लिए विशेष प्रावधान कर सकेगा।

15 (iv) राज्य सामाजिक एवं शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़े हुए नागरिको के किन्ही वर्गों की उन्नति के लिए विशेष प्रावधान करेगा।

  • सरकारी सेवाओं में आरक्षण प्रदान करने के मापदंड को नियत करने के लिए 1953 में प्रथम राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग बना। इस आयोग के अध्यक्ष काका कालेलकर थे। इस आयोग की सिफारिशों को नकार दिया गया।

  • सनवित रुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्र्‌ुरुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्रुरू 1977-78 में मंडल आयापेे (बी.पी. मंडल) का गठन किया गया तथा उसने 1980 में अपनी रिपोर्ट (विवरण) दी। इस आयोग की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया गया। इसमें ओबीसीएस को 27 प्रतिशत आरक्षण देने की बात तय हुई।

  • इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ मामले में उच्चतम न्यायालय ने निर्णय दिया की किसी भी शर्त पर आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए।

Types of OBCS

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आरक्षण का अधिकार दिया गया।

नोट (ध्यान दें)-2.5 लाख से कम आय वाले व्यक्तियों को नानक्रीमिलेयर की श्रेणी में रखा गया।

15 (v) (93वां स.स.अ.2005)-राज्य निजी उच्च व्यावसायिक शिक्षण संस्था में (अल्पसंख्यक शिक्षण संस्था को छोड़कर) ओबीसीएस को आरक्षण प्रदान करेगी।

अनुच्छेद 16:- लोक नियोजन के विषय में अवसर की समानता-

16 (i) राज्य के अधीन नियोजन/नियुक्ति से संबंधित विषयों में सभी नागरिकों को अवसर की समानता होगी।

16 (ii) कोई भी नागरिक राज्य के अधीन नियोजन/नियुक्ति से संबंधित विषयों में केवल धर्म, मूल, वंश, जाति, लिंग, उदवित रुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्र्‌ुरुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्रुरू भव, जन्म स्थान तथा निवास के आधार पर अपात्र (अयोग्य) नहीं होगा।

16 (iii) संसद किसी राज्य के अधीन सेवा के लिए उस राज्य का निवासी होना निश्चित कर सकती है।

16 (iv )यदि पिछड़े वर्ग को राज्य के अधीन सेवा में राज्य की राय में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है तो उसे आरक्षण प्रदान किया जाए।

अनुच्छेद 17:- अस्पृश्यता का अंत किया जाता है-

  • संसद को अनु. 35 दव्ारा यह अधिकार दिया गया है कि वह अस्पृश्यता का अंत कर सकता है।

  • इसके लिए संसद ने सनवित रुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्र्‌ुरुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्रुरू -1955 में ”अस्पृश्यता (अपराध) अधिनियम 1955 पारित किया गया।

  • 1976 में इसे संसोधित करके इसके नाम से परिवर्तन कर दिया गया और अब यह ”सिविल (नागरिक) अधिकार संरक्षण अधिनियम 1975” के रूप में प्रवृत्त किया।

अनुच्छेद 18:- उपाधियों का अंत-

जिन उपाधियों को अंग्रेजी सरकार ने प्रदान किया था उसका अंत किया जाता है-

ढवस बसेेंत्रष्कमबपउंसष्झढसपझ राज्य सेना या विद्या संबंधी सम्मान के सिवाय और कोई उपाधि प्रदान नहीं करेगा।

  • भारत का कोई नागरिक किसी विदेशी राज्य से कोई उपाधि स्वीकार नहीं करेगा।

  • जो व्यक्ति भारत का नागरिक न होते हुए राज्य के अधीन लाभ या विश्वास का पद धारण करता है वह विदेशी राज्य से कोई उपाधि राष्ट्रपति की सहमति के बिना स्वीकार नहीं करेगा।

  • राज्य के अधीन लाभ या विश्वास का पद ग्रहण करने वाला कोई व्यक्ति किसी विदेशी राज्य से या उसके अधीन किसी रूप में कोई भेंट, उपलब्धि या पद राष्ट्रपति की सहमति के बिना स्वीकार नहीं करेगा।