भाग-5 नागरिकता-स्वतंत्रता का अधिकार (19 − 22), शोषण के विरुद्ध अधिकार (अनु 23 − 24), धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार (अनु 25 − 28) (Part-5: Right of Liberty (19 − 22), Right against Exploitation (Article 23 − 24), Right to freedom of Religion (Article 25 − 28) ) for Arunachal Pradesh PSC

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स्वतंत्रता का अधिकार (19-22) Right of Liberty (19-22)

अनु. 19 1 (क) -विचार एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता- संविधान में यह प्रावधान किया गया है कि विचार एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर राज्य दव्ारा भारत की प्रभुता और अखंडता राज्य की सुरक्षा, विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों, लोक व्यवस्था, शिष्टाचार या सदाचार के हितो में अथवा न्यायालय-अवमान, मानहानि या अपराध उद्दीपन के आधार पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है।

प्रेस की स्वतंत्रता-अनु. 19-1 (क) के अधीन प्रत्याभूत वाक एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता शामिल है, जिसके अंतर्गत तीन तत्व शामिल किये गये हैं-

  • सूचना के सभी स्रोतों तक पहुंचने की स्वतंत्रता।

  • सूचना को प्रकाशित करने की स्वतंत्रता।

  • प्रकाशित सामग्री के प्रसार, विक्रय तथा प्रचार की स्वतंत्रता।

प्रेस (मुद्रण यंत्र) परिषद का गठन:- भारत में प्रेस की स्वतंत्रता की मान्यता देने के लिए प्रथम प्रेस आयोग दव्ारा 1954 में प्रेस परिषद के गठन के लिए सुझााव दिये गये। सुझाव पर 1956 में प्रेस परिषद का गठन किया गया। प्रेस परिषद में एक अध्यक्ष तथा 28 सदस्य होते हैं। कोई भी व्यक्ति प्रेस परिषद का सदस्य केवल दो बार हो सकता है।

अनु. 19-1 (ख) -शांतिपूर्ण तथा निरायुद्ध सम्मेलन की स्वतंत्रता।

अनु. 19-1 (ग)- संगम या संघ बनाने की स्वतंत्रता।

अनु. 19-1 (घ)- भारत में सर्वत्र स्वतंत्रतापूर्व भ्रमण करने की स्वतंत्रता।

अनु. 19-1 (ङ)- भारत के राज्य क्षेत्र के किसी भाग में निवास करने तथा बस जाने की स्वतंत्रता। (केवल ज.क. को छोड़कर)

अनु. 19-1 (च)- वृत्ति उपजीविका, व्यापार या कारोबार करने की स्वतंत्रता।

अनु. 20- दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण:-

  • किसी भी व्यक्ति को दोषी तब तक नहीं ठहराया जाएगा जब तक कि उसने किसी लागू कानून का उल्लंधन न किया हो और वह उससे अधिक दंड का भागी नहीं होगा जितना उस विधि में निश्चित है।

  • अभियुक्त को एक अपराध के लिए एक ही बार दंडित किया जाएगा दो बार नहीं।

  • अभियुक्त को अपने ही विरूद्ध साक्ष्य देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है।

शोषण के विरुद्ध अधिकार (अनु. 23-24) Right Against Exploitation (Article 23-24)

अनु. 23- मानव के दुर्व्यापार, बेगार तथा इसी प्रकार के अन्य बलात- श्रम का प्रतिषेध किया जाता है।

अनु. 24- 14 वर्ष से कम आयु के बालकों को किसी कारखाने या परिसंकटमय स्थानों पर नियोजित नहीं किया जाएगा।

धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार (अनु. 25-28) Right to Freedom of Religion (Article 25-28)

अनु. 25- प्रत्येक व्यक्ति को अपने अंतकरण के अनुसार किसी भी धर्म को अबाध रूप से मानने आचरण करने तथा प्रचार करने की स्वतंत्रता है।

इस स्वतंत्रता के अधिकार पर लोक व्यवस्था सदाचार एवं स्वास्थ्य के आधार पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है।

  • कृपाण धारण करना सिक्ख धर्म को मानने वालों का अधिकार है।

अनु. 26- धार्मिक कार्यो का प्रबंधन की स्वतंत्रता

  • जंगम संपत्ति

  • स्थावर संपत्ति

अनु. 27-किसी विशेष धर्म की अभिव्यक्ति के लिए कर देने की स्वतंत्रता

  • यदि राज्य किसी संप्रदाय के लिए किसी कार्यक्रम का आयोजन करता है तो राज्य ऐसे कार्य के लिए उस धार्मिक संप्रदाय के लोगों से शुल्क वसूल कर सकता है।

अनु. 28-

  • राज्य दव्ारा स्थापित शिक्षण संस्था में धार्मिक शिक्षाप्रदान नहीं किया जाएगा।

  • यदि किसी ट्रस्ट (संगठन) ने शिक्षण संस्था को स्थापित किया है, जिसका प्रशासन राज्य करता है, वहां धार्मिक शिक्षा प्रदान किया जाएगा।

  • धार्मिक शिक्षा/धार्मिक उपासना में सम्मिलित होने की स्वतंत्रता।