महत्वपूर्ण राजनीतिक दर्शन Part-12: Important Political Philosophies for Arunachal Pradesh PSCfor Arunachal Pradesh PSC

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आचार्य नरेन्द्र देव

आचार्य नरेन्द्र देव पहले विचारक हैं जिन्होंने भारतीय शैली में समाजवाद को विकसित किया। ये कांग्रेस समाजवादी दल के प्रमुख सिद्धांतकार थे और वैचारिक स्तर पर लोकतांत्रिक समाजवाद के निकट थे। आगे चलकर ये ’सोशलिस्ट (समाजवादी) पार्टी (दल)’ से जुड़े और बाद में उसी की उत्तराधिकारी ’प्रजा सोशलिस्ट पार्टी’ से अपनी मृत्यु (1956) तक जुड़े रहे। हिन्दी समर्थक आंदोलन में सक्रिय हिस्सेदारी के लिए भी इन्हें जाना जाता है। इनके प्रमुख विचार निम्नलिखित हैं-

  • इन्होंने मार्क्सवाद और गांधीवाद का मिश्रण किया। इनके अनुसार मार्क्स ने चेतना को कम महत्व दिया है जबकि गांधी ने भौतिकता को। इनका समाजवाद दोनों पक्षों का संतुलन करता है।

  • समाजवाद भारत के लिए नया विचार नहीं है। भारतीय संस्कृति में ’आध्यात्मिक समाजवाद’ को हमेशा माना गया है। आज जरूरत इस बात की है कि हम आध्यात्मिक समाजवाद की उपलिब्ध के लिए भौतिक साधनों के विकास पर बल दें।

  • साम्राज्यवाद और पूंजीवाद दोनों का विरोध करना आवश्यक है क्योंकि दोनों ही मानवीय गरिमा के विरूद्ध हैं। साम्राज्यवाद एक देश का दूसरे देश दव्ारा शोषण है जबकि पूंजीवाद एक वर्ग का दूसरे वर्ग दव्ारा।

  • वर्गो में सहयोग का नहीं, संघर्ष का ही संबंध वास्तविक है; किन्तु वर्ग-संघर्ष के लिए हिंसा का सहारा नहीं लिया जा सकता।

  • समाजवाद का विकास करने के लिए सिर्फ सर्वहारा वर्ग पर्याप्त नहीं है, बल्कि मजदूरों, किसानों और बुद्धिजीवियों तीनों वर्गों को साथ आना होगा।

  • इन्होंने अपने आंदोलन को ’नवजीवन आंदोलन’ का नाम दिया। इसके अंतर्गत मजदूरों से हड़ताल करने को कहा गया, किसानों से किसान सभाएँ आयोजित करने को और बुद्धिजीवियों से वैचारिक समर्थन देने के लिए कहा गया।