महत्वपूर्ण राजनीतिक दर्शन Part-17: Important Political Philosophies for Arunachal Pradesh PSCfor Arunachal Pradesh PSC

Doorsteptutor material for competitive exams is prepared by world's top subject experts: get questions, notes, tests, video lectures and more- for all subjects of your exam.

साम्यवाद या मार्क्सवाद

’साम्यवाद’ या ’मार्क्सवाद’ एक ही विचारधारा के दो नाम हैं जिसे ’वैज्ञानिक समाजवाद’ और ’क्रांतिकारी समाजवाद’ भी कहा जाता है। इसके इन सभी नामों के पीछे कोई न कोई आधार है। इसे ’मार्क्सवाद’ इसके प्रतिपादक कार्ल मार्क्स के नाम के कारण कहा जाता है जबकि ’साम्यवाद’ इसलिए कि इस विचारधारा का अंतिम उद्देश्य जिस आदर्श अवस्था में पहुँचना है, उसका नाम साम्यवाद है। ’वैज्ञानिक समाजवाद’ और ’क्रांतिकारी समाजवाद’ नामों का प्रयोग इसलिए किया जाता है ताकि इसे समाजवाद के दो अन्य रूपों ’स्वप्नदर्शी समाजवाद’ तथा ’विकासवादी समाजवाद’ से अलग किया जा सके।

मार्क्सवाद या साम्यवाद का प्रतिपादन कार्ल मार्क्स और फ्रैडरिक एंजेल्स नामक दो यूरोपीय चिंतकों ने 19वीं सदी में किया था। आगे चलकर 1917 ई. में ’लेनिन’ ने सोवियत रूस में तथा 1949 ई. में ’माओ त्से तुंग’ ने चीन में इसी विचारधारा को आधार बनाकर क्रांतियां कीं तथा नये प्रकार की राजनीतिक प्रणाली का विकास किया। इस दृष्टि से लेनिन तथा माओ को भी मार्क्सवादी विचारधारा का प्रमुख स्तंभ माना जाता है। 20वीं शताब्दी के आरंभ में मार्क्सवाद के भीतर एक नया संप्रदाय विकसित हुआ जिसे ’नवमार्क्सवाद’ कहा जाता है। इस समूह के विचारक पारंपिक मार्क्सवाद के ’क्रांति’ और ’वर्ग’ संघर्ष’ जैसे सिद्धांतों को अस्वीकार करते हैं तथा नए तरीके से मार्क्सवाद की व्याख्या करते हैं।

जहांँ तक भारत का प्रश्न है, स्वाधीनता संग्राम के दौरान मानवेन्द्र नाथ रॉय मार्क्सवाद के प्रखर समर्थकों में शामिल थे। वे लेनिन के सलाहकार मंडल के सदस्य भी रहे, किन्तु 1940 में उनका मार्क्सवाद से मोहभंग हो गया था तथा उनके विचार कुछ बदल गये थे। इसी प्रकार कुछ समय तक पं. जवाहरलाल नेहरू पर भी मार्क्सवाद का असर देखा गया, किन्तु बाद में स्वयं उन्होंने स्पष्ट किया कि वे मार्क्सवाद के कम, समाजवाद के ज्यादा नजदीक हैं। भारतीय स्वाधीनता संग्राम में क्रांतिकारी आंदोलन के दूसरे चरण, जिसमें भगत सिंह जैसे क्रांतिकारी शामिल थे, पर भी मार्क्सवाद का व्यापक असर था। वर्तमान समय में कंप्युनिस्ट (साम्यवादी) पार्टी (दल) ऑफ (का) इंडिया (भारत) (सीपीआई), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट (साम्यवादी) पार्टी (समूह) (सीपीएम), फॉरवर्ड (आगे) ब्लॉक (खंड) आदि राजनीतिक दलों तथा कई नक्सलवादी व माओवादी संगठनों पर इस विचारधारा का स्पष्ट प्रभाव नजर आता है।