इंडियन (भारतीय) वेर्स्टन (पश्चिमी) फिलोसोपी (दर्शन) (Indian Western Philosophy) Part 17 for Goa PSC

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सत्य-सत्याग्रह

  • सत्य शब्द का प्रयोग 2 अर्थों में किया है सीमित तथा व्यापक।

  • व्यापक अर्थ में सत्य और ईश्वर समानार्थक है, ईश्वर में निष्ठा रखते हुये नैतिक जीवन जीना सत्य पूर्ण जीवन इसी दृष्टिकोण से गांधीजी ने अपनी आत्मकथा को सत्य के साथ प्रयोग कहा है।

  • सीमित रूप में सत्य का अर्थ मन, वचन, कर्म से झूठ बोलने या हल करने से दूर रहना, जो तथ्य जिस रूप में देखा.समझा या जाना गया है, उसे उसी रूप में बिना कोई संशोधन किए व्यक्त करना सत्य है।

  • सत्य के मार्ग मे ंचलना कठिन है लेकिन जरूरी है, कठिन इसलिए है कि यह अत्यन्त साहस की माँग करता है और जरूरी इसलिए है कि नैतिक सामाजिक संबंध इसी के आधार पर स्थापित किए जा सकते है।

  • सत्य के मार्ग पर चलने के उपाय (गांधीजी दव्ारा)

  • अनावश्यक अभिव्यक्तियों से बचना चाहिए।

  • तथ्यों से छेड़छाड़ या अतिश्योक्ति जैसे प्रयासों से दूर रहना चाहिए।

  • कष्ठ, निंदा और दूसरों का क्रोध झेलने की क्षमता विकसित करनी चाहिए क्योंकि सत्य बोलने पर यह सब परिणाम स्वाभाविक रूप से होते है।

  • अनावश्यक दार्शनिक उलझनों में भेजने के बनाए अपनी आत्मसूझ से सत्य का आचरण करना चाहिए। गाय को बचाने के लिए झुठ बोलना चाहिए या नही ऐसी समस्याओं का उठाकर सत्य की उपेक्षा करना अनुचित है।

  • अगर मनुष्य अपनी व्यवाहारिक जीवन में सत्य का दृढ़तापूर्वक सामना करे तो निश्चित ही कभी झूठ नहीं बोलेगा।

मनुष्य की कायरता, विवशता/दुर्बलता से पैदा होती है।

अहिंसा के अपवाद-गांधी की अहिंसा-जैनो की अहिंसा की तुलना में लचीली और व्यवहारिक उन्होंने खुद स्पष्ट किया है कि किन परिस्थतियों में अहिंसा के नियम का उल्लंघन उचित है।

  • हिंसक पशुओं, रोग के किटाणुओं, फसल को नष्ट करने वाले कीड़ों की हत्या उचित, शर्त यह समाज के हित में किया जाता हो।

  • अगर कोई प्राणी असहनीय दर्द झेल रहा हो और उसकी मुक्ति का कोई और रास्ता न हो तो उसके जीवन को समाप्त कर देना उचित है, शर्त यह है कि ऐसा सिर्फ उसके हित में किया जाए (यूथेक्िसिया का समर्थन)

  • चिकित्सक दव्ारा शल्य चिकित्सा के लिए की जाने वाली हिंसा (सिर्फ मरीज के हित में सर्जरी (शल्य क्रिया) हो)।

  • अगर हिंसा और कायरता में से ही चुनना हो तो हिंसा करना उचित है।

  • किसी प्राणी के नैतिक/आधात्मिक या भौतिक विकास के लिए ऐसे कष्ट पहुँचाना अहिंसा का उल्लंघन नहीं (माता-पिता दव्ारा बच्चे में नैतिक मूल्य विकसित करने के लिए आदेश देना चाहिए आदि)

गांधीजी के पंचव्रत-

अहिंसा-गांधी उपनिष्द दर्शन पर आधारित ईश्वरस्वार्थवाद सर्वमवित रुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्र्‌ुरुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्रुरू के विचार को मानते है जिसका अर्थ है कि जगत के कण-कण में ईश्वर है, ईश्वर ही अलग-अलग तरीके से विभिन्न मनुष्यों अन्य प्राणियों, पेड़ पौधों तथा भौतिक वस्तुओं में व्यक्त होता है, इन सभी अभिव्यक्तियों में स्वस्थ संबंध का होना नैतिक समाज की शर्त है, संबंधों को उचित रखने की मूल युक्ति है अहिंसा, अंंहसा सिर्फ राजनैतिक आंदोलन का अस्त्र नहीं है वह अंतिम जीवन जीने का मूलभूत तरीका है।

अहिंसा का अर्थ-जीवन भी है मन, वचन कर्म से किसी भी प्राणी को कष्ट न पहुँचाना और कष्ट पहुचानें का विचार भी न लाना इसका अर्थ जीवन है जबकि जीवन के अर्थ में सभी प्राणियों के प्रति प्रेम, दया सहानुभूति और सेवाभाव रखना शामिल ह़़़़़़़़़़ै

गांधी की अहिंसा की विशेषता-

  • अहिंसा सिर्फ आदर्श नहीं है यह मानव जाति का प्राकृतिक नियम है जिस प्रकार हिंसा पशु समुदाय का प्राकृतिक नियम है वैसे ही अहिंसा मानव समुदाय का।

  • अहिंसा के पूर्ण पालन के लिए ईश्वर में अटूट विश्वास जरूरी है ईश्वरी विश्वास से मनुष्य समझ जाता है कि जिसके साथ वह हिंसा करना चाहता है वह भी ईश्वर का ही अभिव्यक्त रूप है। वह ईश्वर के अलावा किसी से नहीं डरता क्योंकि ईश्वरीय ईच्छा के बिना कुछ हो नहीं सकता।

  • अहिंसा अव्यवहारिक नहीं है वह एकमात्र व्यवहारिक मार्ग है हिंसा से तात्कालिक और एकपक्षीय समाधान हो सकते है किन्तु न्यायी तथा सर्वस्वीकृत समाधान सिर्फ अहिंसा से ही संभव है

  • अहिंसा और कायरता समानार्त्थक नहीं है अगर हमें हिंसा और कायरता में से किसी एक को चुनना हो तो हिंसा को चुनना बेहतर है, अहिंसा और कायरता में अंतर यह है कि अहिंसा बहुत ऊँचे और आध्यात्मिक वर्ग पर टीकी होती है जबकि कायरता निम्न वर्ग में टिकी होती है।

Mahatma Gandhi Prabhav
mahatma gandhi ke prabhav kin kin vastuo par pade uske lagti mahiti

महात्मा गांधी-प्रभाव

  • उपनिषद दर्शन

  • ”ईशावास्यमिद सर्व”

  • सब कुछ ईश्वर ही है और कुछ नहीं

pantheism पांथेइसम (देवपूजा) जगत और ईश्वर एक है

  • गीता

  • स्वधर्म की धारणा

  • वर्ण व्यवस्था पर विश्वास

निमिन्तोवादनेश्वरवाद-ईश्वर का जगत है।

  • ईसा मसीह का प्रभाव-करुणा-एक गाल पर तमाचा मारे तो दूसरे गाल भी आगे कर दो

  • जौन रस्किन का प्रभाव- अन्टू द लॉर्ट-हिन्द स्वराज का प्रभाव (गांधी जी की बुक (किताब) है)

  • हेनरी डेविड ब्यूरो का प्रभाव-सबसे अच्छा शासन वह है जो सबसे कम शासन करे। अराजकतावाद

  • टालस्टॉय का प्रभाव-अराजकतावाद का समर्थन किया-राज्य की आवश्यकता नहीं

  • जैन, बौद्ध और योग दर्शन का प्रभाव-पंचव्रत का प्रभाव

केवलनिमितेश्वैर

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