KAS Hindi Mains 2010 Paper 2

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Note :—

  1. Answer must be written in Devna ¯gari ¯.

  2. Number of marks carried by each question are indicated at the end of the question.

  3. Part/Parts of the same question must be answered together and should not be interposed between answers to other questions.

  4. The answer to each question or Part thereof should begin on a fresh page.

  5. Your answers should be precise and coherent.

  6. Candidates should attempt five questions taking at least two from each Section. Question No.1 is compulsory.

  7. If you encounter any typographical error, please read it as it appears in the text-book.

ढवस बसेेंत्रष्कमबपउंसष्झढसपझ निम्नलिखित अवतरणों में से किन्हीं चार अवतरणों की आलोचनात्मक व्याख्या कीजिए :- 20×4=80

(क) चकवी बिछुरी रैणि की, आइ मिली परभाति।

जे जन बिछुरे राम सूँ, ते दिन मिलैं न राति।।

अंबर कुंजा कुरलिया, गरजि भरे सब ताल।

जिन थैं गोविंद बीछुरे, तिनके कौण हवाल।।

(ख) आयो घोष बड़ो ब्यौपारी !

लादि खेप यह ज्ञान-जोग की ब्रज में आय उतारी।।

फाटक दै कर हाटक माँगत भोरी निपट सुधारी।

ऊधौ! ब्रज में पैठ करी !

वह निर्गुन निर्मूल गाठरी अब किन करहु, खरी।।

नफा जानिकै हाँ लै आए सबैं वस्तु अकरी।

(ग) सुनि सुर-बचन, लखन सकुचाने ! राम-सीय, सादर सनमाने।

कही तात! तुम नीति सुहाई। सब-तें कठिन राज-मद भाई।

जो अँचवत, मातहि नृप तेई। नाहिन साधु-सभा जेहि सेई।

सुनह, लखन! भल भरत-सरीसा। बिधि-प्रपंच-महँ सुना, न दीसा।

(घ) स्वयं देव थे हम सब, तो फिर क्यों न विश्र्ाृंखल होती सृष्टि ?

अरे अचानक हुई इसी से कड़ी आपदाओं की वृष्टि।

(ङ) दु:ख ही जीवन की कथा रही, क्या कहूँ आज, जो नहीं कहीं।

हो इसी कर्म पर वज्रपात। यदि धर्म, रहे नत सदा माथ।

इस पथ पर, मेरे कार्य सकल हो भ्रष्ट शीत के-से शतदल।’

(च) वह रहस्यमय व्यक्ति अब तक न पायी गयी मेरी अभिव्यक्ति है

पूर्ण अवस्था वह

निज-सम्भावनाओं, निहित प्रभावों, प्रतिमाओं को,

मेरे परिपूर्ण का आविर्भाव,

हृदय में रिस रहे ज्ञान का तनाव वह,

आत्मा की प्रतिमा।

(छ) ये हमारे गाँव के मुखिया हैं, गरीबों का खून चूसने वाला। सूद-ब्याज,

डेढ़ी-सबाई, नज़र-नजराना, घूस-घास जैसे भी हो, गरीबों को लूटो। उस पर

सुराज चाहिए। जेल जाने से सुराज न मिलेगा। सुराज मिलेगा धरम से, न्याय

से।

(ज) वहाँ है केवल दैन्य, संपूर्ण दासत्व, वहाँ माता-पिता अपने बच्चों को बोध कराते

हैं, अवज्ञा के लिए नहीं, स्वीकृति के लिए झुकना सिखाते हैं, अभिमान से नहीं

दासत्व भाव से। आत्माएं इस संबंध्ा६मेें इस तरह जकड़ी गई हैं कि वे स्वयं

नहीं जानते वे किस श्र्ाृंखला में बंधे हैं।

SECTION—A

2. कबीर की निर्गुण भक्ति की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए। 55

3. तुलसी का युगबोध और उनकी लोकवादी चेतना पर प्रकाश डालिए। 55

4. भ्रमरगीत परंपरा का उल्लेख करते हुए, उसमें सूरकृत भ्रमरगीत का स्थान निर्धारित

कीजिए। 55

5. ‘गोदान’ उपन्यास भारतीय कृषक जीवन का महाकाव्य है, इस कथन का औचित्य

प्रमाणित कीजिए। 55

6. शुक्ल जी की निबंध-कला की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए। 55

SECTION—B

7. ‘कामायनी’ के दार्शनिक तत्त्व पर प्रकाश डालिए। 55

8. ‘अंधेर नगरी’ की राष्ट्रीयता को स्पष्ट कीजिए। 55

9. प्रसाद जी के ‘चंद्रगुप्त’ नाटक के नायक कौन हैं ? ‘चंद्रगुप्त’ या ‘चाणक्य’। युक्तियुक्त

उत्तर दीजिए। 55

10. खण्डकाव्य के लक्षणों के आधार पर ‘राम की शक्तिपूजा’ की विवेचना कीजिए। 55

11. ‘शेखर एक जीवनी’ उपन्यास की वस्तु-योजना को समझाइये। 55