KAS Hindi Mains Paper 2

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INSTRUCTIONS

  1. Answers must be written in Devnagri.

  2. The number of marks carried by each question is indicated at the end of the question.

  3. The answer to each question or part thereof should begin on a fresh page.

  4. Your answer should be precise and coherent.

  5. The part/parts of the same question must be answered together and should not be interposed between answers to other questions.

  6. Candidates should attempt question no. 1 which is compuslory and any four more questions, selecting two from each Section.

  7. If you encounter any typographical error, please read it as it appears in the text-book.

  8. Candidates are in their own interest advised to go through the General Instructions on the back side of the title page of the Answer Script for strict adherence.

  9. No continuation sheets shall be provided to any candidate under any circumstances.

  10. Candidates shall put a cross (×) on blank pages of Answer Script.

  11. No blank page be left in between answer to various questions.

  12. No programmable Calculator is allowed.

  13. No stencil (with different markings) is allowed.

ढवस बसेेंत्रष्कमबपउंसष्झढसपझ निम्नलिखित अवतरणों में से किन्हीं चार अवतरणों की आलोचनात्मक व्याख्या कीजिए :- 20×4=80

ढवस बसेेंत्रष्पीदकपटवूमसेष्झढसपझ अवधू जोगी जगथैं न्यारा।

मुद्रा निरति सुरति करि सींगी नाद न खंडै धारा।।

बसै गगन में दुनीं न देखै, चेतनि चौकी बैठा।

चढ़ि अकास आसण नहिं छाँडै, पीवै महारस मीठा।।

परगट कथाँ माहैं जोगी दिल में दरपन जोवै।

सहँस इकीस छसै धागा, निहचल नाकै पोवै।

ब्रह्म-अगनि में काया जारै, त्रिकुटी संगम जागै।

कहै कबीर सोई जोगेश्वर सहज सुंनी ल्यौ लागै।।

तबहि उपंगसुत आइ गए।

सखा सखा कछु अन्तर नाहीं भरि अंक लए।।

अति सुन्दर तन स्याम सरीखो, देखत हरि पछिताने।

ऐसे के वैसी बुधि होती, ब्रज पठउँ मन आने।।

या आगैं रस कथा प्रकासो, जोग कथा प्रगटाऊँ। सूर ज्ञान

सूर ज्ञान याको दृढ़ कहिकै, जुवतिन्ह पास पठाऊँ।।

भलि भारत भूमि भले कुल, जन्म समाज सरीर थलोलहि कै।।

करषा तजि कै परूषा बरषा हिममरुत बाम सदा सहि कै।।

जो भजै भगवान सयान सोई तुलसी हट चातक ज्यों गहि कै।

नतु और सबे विष बीज बये हर-हाटक कामदुहा नहि कै।।

जबतें रामु ब्याहि घर आए। नित नव मंगल मोद बधाए।।

भुवन चारिदस भूधर भारी। सुकृत मेघ बरषहिं सुख बारी।।

रिधि सिधि संपति नदीं सुहाई। उमगि अवध अंबुधि कहँु आई।।

मनिगन पुर नर-नारी सुजाती। सुचि अमोल सुंदर सब भाँती।।

कहि न जाइ कछु नगर बिभूती। जनु एतानअबिरचि करतूता।।

सब बिधि सब पुर लोग सुखारी। रामचंद मुख चंदु निहारी।।

मुदित मातु सब सखी सहेली। फलित बिलोकि मनोरथ बेली।।

राम रूपु गुन सीलु सुभाऊ। प्रमुदित होइ देखि सुनि राऊ।।

(ङ) “भरा था मन में नव उत्साह

सीख लूँ ललित कला का ज्ञान;

इधर रह गंधर्वों के देश पिता की हूँ प्यारी संतान।”

(च) “धिक जीवन जो पाता ही आया है विरोध

धिक साधन जिसके लिए सदा ही किया शोध

जानकी ! हाय, उद्धार प्रिया का हो न सका।”

(छ) किन्तु संधि-पत्र स्वार्थों से प्रबल नहीं होते, हस्ताक्षर तलवारों को रोकने में

असमर्थ प्रमाणित होंगे। तुम दोनों ही सम्राट्‌ हो, शस्त्र व्यवसायी हो; फिर

भी संघर्ष हो जाना कोई आश्चर्य की बात न होगी। अतएव दो बालुका-पूर्ण

कगारों के बीच में एक निर्मल स्त्रोतस्विनी का रहना आवश्यक है।

(ज) नहीं, मैं यह नही कहता। एक गुस्सा कमजोरी होता है, एक गुस्सा कत्त्ार्व्य

होता है। अगर अपने राष्ट्र का अपमान होता है, तो उस पर रोष राष्ट्र

के और समाज के प्रति कत्त्ार्व्य होता हैµवह रोष हमें देश को देना ही है।

नहीं तो हम में भीतर कहीं प्राणों की जगह कचरा भरा हुआ है।

SECTION—A

2. कबीर की निर्गुण-भक्ति पर प्रकाश डालिए। 55

3. सूरदास के भ्रमरगीत की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए। 55

4. रामचरित मानस की लोकप्रियता के कारणों पर विचार कीजिए। 55

5. अंधेर-नगरी नाटक की विशेषताएँ लिखिए। 55

6. प्रेमचंद की बहुचर्चित कहानियों की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए। 55

SECTION—B

7. नाटककार भारतेन्दु की रंग-परिकल्पना पर विचार कीजिए। 55

8. ‘गोदान कृषक जीवन का दर्पण है’ इस कथन पर विचार कीजिए। 55

9. ‘चन्द्रगुप्त’ “जयशंकर प्रसाद का श्रेष्ठ ऐतिहासिक नाटक है”-इस कथन की समीक्षा कीजिए। 55

10. ‘निराला’ दव्ारा रचित ‘राम की शक्ति पूजा’ की काव्यगत विशेषताओं पर प्रकाश डालिए। 55

11. ‘शेखर’ : एक जीवनी’ हिन्दी का प्रथम मनोविश्लेषणात्मक उपन्यास है - कथन की समीक्षा कीजिए। 55