KAS Hindi Mains 2012 Paper 2

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INSTRUCTIONS

  1. Answers must be written in Devnagri.

  2. The number of marks carried by each question is indicated at the end of the question.

  3. The answer to each question or part thereof should begin on a fresh page.

  4. Your answers should be precise and coherent.

  5. The part/parts of the same question must be answered together and should not be interposed between answers to other questions.

  6. Candidates should attempt question no. 1 which is compulsory and any four more questions, selecting two from each section.

  7. If you encounter any typographical error, please read it as it appears in the text book.

  8. Candidates are in their own interest advised to go through the General Instructions on the back side of the title page of the Answer Script for strict adherence.

  9. No continuation sheets shall be provided to any candidate under any circumstances.

  10. Candidates shall put a cross (X) on blank pages of Answer Script.

  11. No blank page be left in between answer to various questions.

ढवस बसेेंत्रष्कमबपउंसष्झढसपझ निम्नलिखित अवतरणों में से किन्हीं चार अवतरणों की आलोचनात्मक व्याख्या कीजिए :- 20×4त्र80

(क) सतगुरु लई कमांण करि, वांहणा लागा तीर।

एक जु बाध्या प्रीति सूँ, भीतरि रह्‌या सरीर।।

सतगुरु साँचा सूरिवाँ, सबद जु बाध्या एक।

लागत ही भुइ (खै) मिलि गया, पड्‌या केलेजै छेक।।

(ख) प्रीति करि दीन्हीं गरे छुरी।

जैसे बधिक, चुगाय कपटकन पाछे करत बुरी।।

मुरली मधुर चेंप कर कापो मोरचंद्र ठटवारी।

बंक बिलोकनि लूक लागि बस सकी न तनहिं सम्हारी।।

तलफत, छाँड़ि चले मधुवन को फिर कै लई न सार।

सूरदास वा कलप-तरोवर फेरि न बैठी डार।।

(ग) सगुन-खीर, अवगुन-जल ताता। मिलइ रचइ परपंच बिधाता।

भरत हंस, रवि-बंस-तड़ागा। जनमि, कीन्ह गुन-दोष-विभागा।

गहि गुन-पय, तजि अवगुन-बारी।

निज जस, जगत कीन्हि उजयारी कहत भरत-गुन-सील-सुभाऊ।

प्रेम-पयोधि-मगन रघुराऊ।

(घ) रानी मैं जानी अजानी महा, पबि पाहनहू तें कठोर हियो है।

राजहु, काज अकाज न जान्यो, कह्‌यो तिय को किन कान कियो है

ऐसी मनोहर मूरति ये, बिछुरे कैसे प्रीतम लोग जियो है ?

आँखिन में सखि ! राखिबे जोग, इन्हें किमि के बनवास दियो ह

(ङ) जिसे तुम समझे हो अभिशाप जगत की ज्वालाओं का मूल -

ईश का वह रहस्य वरदान, कभी मत इसको जाओ भूल।

(च) है अमानिशा, उगलता गगन घन अन्धकार;

खो रहा दिशा का ज्ञान; स्तब्ध है पवन-चार

अप्रतिहत गरज रहा पीछे अम्बुधि विशाल

भूधर ज्यों ध्यान-मग्न; केवल जलती मशाल !

(छ) प्रेम में कुछ मान भी होता है, कुछ महत्व भी ! श्र्ा्रद्धा तो अपने को मिटा

डालती है और अपने मिट जाने को ही अपना इष्ट बना लेती है। प्रेम

अधिकार कराना चाहता है; जो कुछ देता है उसके बदले में कुछ चाहता भी

है। श्र्ा्रद्धा का चरम आनंद अपना समर्पण है, जिसमें अहम्मन्यता का ध्वंस हो

जाता है।

(ज) ब्राह्मण न किसी के राज्य में रहता है और न किसी के अन्न से पलता है;

स्वराज्य में विचरता है और अम त होकर जीता है। वह तुम्हारा मिथ्या गर्व

है। ब्राह्मण सामर्थ्य रखने पर भी, स्वेच्छा से इन माया स्तूपों को ठुकरा देता

है, प्रक ति के कल्याण के लिए अपने ज्ञान का दान देता है।

SECTION–A

मूर्तिपूजा एवं अवतारवाद का निषेध करनेवाले कबीर को समन्वयवादी कवि कहना

उचित है ? तर्कसंगत उत्तर दीजिए। 55

3. सूर की गोपिकाओं की वाक्‌विदग्धता पर प्रकाश डालिए। 55

4. ‘रामचरितमानस’ के ‘महाकाव्यत्व’ की विवेचना कीजिए। 55

5. नाटक के तत्वों के आधार पर ‘अंधेर नगरी’ की विवेचना कीजिए। 55

6. गोदान एक महाकाव्यात्मक उपन्यास है, तर्कसंगत उत्तर दीजिए। 55

SECTION–B

7. प्रसाद का वैशिष्ट्‌य चंद्रगुप्त और चाणक्य के चरित्र-चित्रण की दष्टि से अधिक है,

विशेषकर प्रसाद का चाणक्य अपने आप में विशिष्ट है - इस वक्तव्य के प्रकाश में

चाणक्य की चरित्र-सष्टि की विशिष्टता को रेखांकित कीजिए। 55

8. ‘राम की शक्तिपूजा’ की प्रतीकात्मकता को स्पष्ट कीजिए। 55

9. ‘शेखर एक जीवनी’ उपन्यास के मनोवैज्ञानिक आयाम को स्पष्ट कीजिए। 55

10. ‘कामायनी’ के रूपक तत्व पर प्रकाश डालिए। 55

11. ‘कहानी’ कला की दष्टि से ‘कफन’ कहानी की विवेचना कीजिए। 55