मांगणियार (राजस्थान के लोक गायक) सिक्किम के मठो में किया जाने वाला छाम नृत्य (Calligraphist-Folk Singers of Rajasthan Chamba Dance to be Held in the Monastery of Sikkim – Culture)

Get top class preparation for CTET-Hindi/Paper-2 right from your home: get questions, notes, tests, video lectures and more- for all subjects of CTET-Hindi/Paper-2.

• मांगणियार पश्चिमी राजस्थान के मुख्यत: तीन जिलों अर्थात्‌ जोधपुर, बाड़मेर और जैसलमेर के ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करने वाला एक छोटा सा आदिवासी समुदाय है।

• उनके गीत रेगिस्तान के एक मौखिक इतिहास के रूप में एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को हस्तांतरित किये जाते हैं।

• इस समुदाय दव्ारा बजाया जाने वाला धनुषाकार वाद्ययंत्र कमैचा वस्तुत: स्थानीय सामग्री से निर्मित होती है और देखने में इसकी संरचना और अधूरी सी जान पड़ती है किन्तु इसके दव्ारा उत्पन्न किये जाने वाले संगीत की प्रकृति अत्यंत जटिल होती है।

• इसमें संगीत उत्पन्न करने के लिए मुख्य तार के अतिरिक्त सहायक तार या ड्रोन (धीमी आवाज़) तार भी होता है। जिसे झरे या झरे की तार भी कहा जाता है, जो वाद्य यंत्र के मुख्य भाग पर आश्रित होता है तथा यह अधिक ध्वनि उत्पन्न करता है।

• उनके दव्ारा प्रयुक्त अन्य उपकरणों में ढोलक और खड़ताल शामिल हैं।

• मांगणियार के दव्ारा कल्याणी, कमायची आदि रागों को प्रस्तुत किया जाता है जिनकी हमारे शास्त्रीय संगीत से बहुत कम समानता है।

सिक्किम के मठो में किया जाने वाला छाम नृत्य (Chamba Dance to be Held in the Monastery of Sikkim)

• छाम लामाओं के दव्ारा त्योहारों के दौरान विभिन्न मठों पर प्रदर्शित किया जाने वाला एक आनुष्ठानिक नृत्य है। रंगीन मुखौटा का प्रयोग इसकी एक प्रमुख विशेषता है।

• रंगीन मुखौटों के साथ पारंपरिक वस्त्रों से सुसज्जित दव्ारा किये जाने वाले छाम नृत्य में विशेष रूप से प्रयोग होने वाली तलवारें इस नृत्य की विशेष पहचान हैं। ढोल की ध्वनि पर कूद और छलांग, सींग और संगीत इस नृत्य के विशेष आकर्षण है।

• छाम नृत्य के विभिन्न रूप प्रचलित हैं, जैसे-पौराणिक शेर को समर्पित सिंघी छाम तथा याकों को समर्पित याक छाम।

Developed by: