बागानी क्षेत्र के लिए पहल (Initiatives for the Horticulture Areas) for Maharashtra PSC Exam

Doorsteptutor material for CTET-Hindi/Paper-2 is prepared by world's top subject experts: get questions, notes, tests, video lectures and more- for all subjects of CTET-Hindi/Paper-2.

बागानी फसलों के लिए राजस्व बीमा योजना

सुर्ख़ियों में क्यों?

हाल ही में वाणिज्य मंत्रालय ने बागानी फसलों के लिए राजस्व बीमा योजना (आरआईएसपीसी) को मंजूरी दी है।

बागानी फसल के विषय में

  • बागानी फसलें वे फसलें होती हैं जिनकी खेती व्यापक पैमाने पर एवं विशाल संलग्न क्षेत्र में की जाती है। इसका स्वामित्व और प्रबंधन एक व्यक्ति या एक कंपनी (संघ) दव्ारा किया जाता है।
  • मुख्य बगानी फसलों में चाय, कॉफी, रबर, नारियल, आयल पाम, काजू, सुपारी आदि शामिल हैं।
  • ये बगानी फसलें अत्यधिक आर्थिक महत्व की उच्च मूल्य वाणिज्यिक फसलें हैं। ये देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभारती हैं क्योंकि इनकी निर्यात क्षमता अधिक होती है। ये रोजगार अवसरों का सृजन करती हैं एवं विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी उन्मूलन में सहायता करती हैं।

आरआईएसपीसी के बारे में

  • इस योजना का उद्देश्य किसानों को विभिन्न जोखिमों जैसे फसल हानि, कीट हमलों और अंतरराष्ट्रीय/घरेलू कीमतों में गिरावट के कारण होने वाले नुकसान से बचाना है।
  • इस योजना को पश्चिम बंगाल, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, असम, तमिलनाडु और सिक्किम में 2 वर्षो के लिए पायलट (संचालन) आधार पर लागू किया जाएगा। इसके अंतर्गत तंबाकू सहित विभिन्न बागानी फसलों को कवर (आवरण) किया जाएगा।
  • योजना के प्रदर्शन के आधार पर, इसका विस्तार अन्य जिलों में किया जाएगा।
  • इस योजना को 2013 में समाप्त की गई मूल्य स्थिरीकरण निधि योजना का उन्नत संस्करण माना जा सकता है।

मूल्य स्थिरीकरण निधि योजना

  • यह योजना वाणिज्य मंत्रालय के तहत 2003 में आरंभ की गयी थी (2013 में समाप्त) और इसके अंतर्गत सभी बागान फसलों को शामिल किया गया था।
  • इसका उद्देश्य वस्तुओं के मूल्यों में गिरावट के कारण होने वाले नुकसान से किसानों को सुरक्षा प्रदान करना था।

कृषि से जुड़ी अन्य योजनाएं

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना

  • आरकेवीवाई का आरंभ 2007 - 08 में 11वीं पंचवर्षीय योजना के तहत 4 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि के लक्ष्य के साथ किया गया था।
  • यह एक राज्य नियोजित योजना है जिसके लिए राज्यो को 100 प्रतिशत अनुदान के अतिरिक्त केन्द्रीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
  • प्रत्येक जिले/राज्य को जिला/राज्य कृषि योजना तैयार करनी होती है।
  • आरकेवीवाई के तहत 6 योजनाएं क्रियान्वित की जाती है:
  • पूर्वी क्षेत्रों में हरित क्रांति लाना
  • वनस्पति क्लस्टरों (समूहों) पर पहल
  • प्रोटीन पूरकों के लिए राष्ट्रीय मिशन (लक्ष्य)
  • केसरिया मिशन (दूतमंडल)
  • विदर्भ गहन सिचाई विकास कार्यक्रम
  • फसल विविधिकरण

Developed by: