सूचना का अधिकार (Right to Information) Part 3 for Maharashtra PSC Exam

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विश्व में सूचना के अधिकार का इतिहास

दुनिया भर में स्वीडेन ऐसा पहला देश है जिसने शासकीय कामकाज में पारदर्शिता और सूचना के अधिकार के लिए 243 साल पहले सूचना के अधिकार को लागू किया था। शासकीय कार्यों में पारदर्शिता एवं सूचना के अधिकार को लगभग 1940 के दशक में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण जरूरत मान लिया गया था। 1946 में संयुक्त राष्ट्रसंघ की आम सभा ने अपने प्रस्ताव में कहा था कि सूचना के अधिकार मनुष्य का एक बुनियादी अधिकार है तथा यह उन सभी स्वतंत्रताओं की कसौटी हैं, जिन्हें संयुक्त राष्ट्रसंघ ने प्रतिष्ठित किया है। इसी तरह, संयुक्त राष्ट्रसंघ ने 1948 में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में घोषणा की थी कि ‘जानकारी पाने की इच्छा रखना, उसे प्राप्त करना तथा किसी माध्यम से जानकारी से पूर्व विचार को फैलाना मनुष्य का मौलिक अधिकार है।’

फिनलैंड में 1951 में सरकारी दस्तावेजो की सार्वजनिक प्रकृति निर्धारित करने संबंधी करतूत के रूप में पारदर्शिता लागू की गयी। कनाडा, अमेरिका, फ्रांस न्यूजीलैंड, आस्ट्रेलिया जैसे देशो ने संयुक्त राष्ट्रसंघ की भावनाओं के अनुरूप सूचना के अधिकार संबंधी कानून बनाये। हालांकि इनमें कई प्रकार के निबंधन व अपवाद भी रखे गये। इसके बावजूद पूरी दुनिया में सूचना के अधिकार की लहर चल पड़ी। ब्रिटेन ने अपने सौ वर्ष पुराने गोपनीयता कानून में संशोधन किया।

कनाडा में एक्सेस ‘इनफॉरमेशन’ (सूचना) एक्ट (अधिनियम) 1989 के जरिये सूचना का अधिकार लागू हुआ। अमेरिकी के सूचना स्वातंत्रय अधिनियम, 1974 के तहत सूचना देने का दायित्व शासन पर है। फ्रांस में सरकारी दस्तावेज तक नागरिकों की पहुँच सुनिश्चित करने हेतु 1978 में कानून बना। न्यूजीलैंड ने ऑफिशियल (आधिकारिक) इनफॉरमेशन (सूचना) एक्ट (अधिनियम) , 1982 बनाया।

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