महत्वपूर्ण राजनीतिक दर्शन Part-6: Important Political Philosophies for Maharashtra PSC Examfor Maharashtra PSC Exam

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समाजवाद के विभिन्न रूप

समाजवाद के बहुत से रूप हैं। यूरोप के विभिन्न देशों में यह वहाँ की सामाजिक स्थितियों के अनुसार रूप बदलता रहा है। एक अर्थ में मार्क्सवाद भी समाजवाद का ही एक रूप है जो वर्ग संघर्ष और हिंसक क्रांति जैसे साधनों पर बल देता है। समाजवाद के कुछ रूप मार्क्सवाद के उदवित रुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्र्‌ुरुक्ष्म्ग्।डऋछ।डम्दव्रुरू भव से पहले दिखाई पड़ते हैं तो बहुत से अन्य रूप मार्क्सवाद के बाद। मार्क्स से पहले के समाजवाद को प्राय: स्वप्नदर्शी समाजवाद कहा जाता है। उन्हें यह नाम कार्ल मार्क्स ने ही दिया था क्योंकि उसके अनुसार इन समाजवादियों के पास समाजवाद के अमूर्त सपने तो थे पर उन्हें पूरा करने के लिए कोई निश्चित और ठोस कार्ययोजना नहीं थी।

आगे चलकर, जब मार्क्सवाद यूरोप में काफी प्रसिद्ध हो गया तो कुछ विचारक दावा करने लगे कि समाजवाद का वास्तविक रूप मार्क्सवाद ही है। किन्तु, 1860 के आसपास इंग्लैंड और अमेरिका जैसे देशों में उदार लोकतंत्र के माध्यम से वंचित वर्गों के पक्ष में कुछ बड़ी घटनाएं घटी, जैसे अमेरिका में अब्राहम लिंकन ने मजबूत कदम उठाते हुए दास व्यवस्था को समाप्त कर दिया। इसी समय इंग्लैंड में भी 1867 में मजदूरों को मताधिकार प्राप्त हुआ जिससे वे अपने पक्ष में कानून बनवाने में समर्थ हो गए। इन परिवर्तनों से लगने लगा कि समाजवाद लाने के लिए हिंसक क्रांति एकमात्र या अनिवार्य विकल्प नहीं है, अगर वंचित समुदायों के लोग राजनीतिक स्तर पर दबाव-समूहों के रूप में संगठित हो जाएं तो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से धीरे-धीरे समाजवाद की स्थापना की जा सकती है। इस दौर में जर्मनी और इंग्लैंड में समाजवाद के कुछ ऐसे रूप (जैसे जर्मन सामाजिक लोकतंत्र, संशोधनवाद, फ़ेबियन समाजवाद, समष्टिवाद तथा श्रेणी समाजवाद) विकसित हुए जो अलग-अलग होते हुए भी इस बिन्दु पर सहमत हैं कि समाजवाद की स्थापना शांतिपूर्ण तरीकों से की जा सकती है। सिर्फ फ्रांस में, वहाँं की विशिष्ट परिस्थितियां के कारण समाजवाद का एक ऐसा रूप (श्रमसंघवाद) विकसित हुआ जिसमें हिंसा को उचित माना गया।

जिस समय मार्क्सवाद के हिंसक साधनों के विरोध में समाजवाद के ये सभी रूप उभर रहे थे उसी समय मार्क्सवाद के भीतर भी एक नया संप्रदाय विकसित हुआ जिसे नवमार्क्सवाद कहा जाता है। नवमार्क्सवादी भी वर्ग संघर्ष और हिंसक क्रांति को अस्वीकार करते हैं पर इनके चिंतन का मूल आधार मार्क्सवाद ही है। ये विशेष रूप से युवा मार्क्स के अलगाव जैसे विचारों से प्रभावित हैं और पूंजीवाद के बदलते हुए चरित्र के मूल में छिपे शोषणकारी पक्षों को उभारते हैं। मार्क्सवाद के भीतर जो विचारक क्रांति और वर्ग संघर्ष पर बल देते हैं, उन्हें पारंपरिक मार्क्सवादी कहा जाता है। लेनिन स्टालिन और माओ को इसी वर्ग में रखा जाता है।

समाजवाद के इन सभी प्रकारों को निम्नलिखित रेखाचित्र से समझा जा सकता है। उसके बाद इन सभी प्रकारों का संक्षिप परिचय दिया जा रहा है। (मार्क्सवाद के दोनों प्रकारों का परिचय साम्यवाद या मार्क्सवाद ′ टॉपिक (विषय) में दिया जा चुका है। समाजवाद के शेष प्रकारों का परिचय यहांँ दिया जा रहा है।)

Types of Socialism

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